बुंदेलखंड में गहराया पेयजल संकट, 39 गांवों के डेढ़ लाख लोग टैंकरों के भरोसे

बंगरा और बबीना ब्लॉक सबसे ज्यादा संकटग्रस्त

By: BK Gupta

Published: 25 Apr 2018, 01:12 PM IST

झांसी। बुंदेलखंड में पेयजल संकट गहराने लगा है। अकेले झांसी जिले के 39 गांवों के करीब डेढ़ लाख लोग बुरी तरह इस समस्या से जूझ रहे हैं। इन गांवों की आबादी पूरी तरह से टैंकरों पर निर्भर है। स्थिति यह है कि इन टैंकरों के पहुंचते ही पानी भरने वालों की कतारें लग जाती हैं। इसमें भी सबसे ज्यादा खराब स्थिति जिले के बंगरा और बबीना ब्लाक की है।

किसी गांव में एक तो किसी में चल रहे हैं दो टैंकर

जिले के समस्याग्रस्त गांवों में जलापूर्ति के लिए टैंकरों की व्यवस्था की गई है। ये व्यवस्था फिलहाल जिले के 39 गांवों के 22836 परिवारों के लिए की गई है। इससे इन गांवों की करीब डेढ़ लाख की आबादी लाभान्वित हो रही है। इनमें से किसी गांव में एक तो किसी गांव में पानी के दो टैंकर चलाए जा रहे हैं। टैंकरों की देखरेख का जिम्मा ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव का है। यहां 56 टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति कराई जा रही है।

कुछ गांवों की है ऐसी स्थिति

जल संकट की गंभीरता का इसी बात से लगाया जा सकता है कि बंगरा ब्लाक के मगरपुर गांव की आबादी 5841 है। यहां दो टैंकर सर्वाधिक 25 चक्कर लगा रहे हैं। इसी तरह से बंगरा ब्लाक के ही खिसनी बुजुर्ग की आबादी 2092 है। यहां पर दो टैंकर प्रतिदिन 18 चक्कर लगा रहे हैं। उधर, मऊरानीपुर ब्लाक के बड़ागांव में 5459 आबादी है और यहां दो टैंकर 24 चक्कर लगा रहे हैं।

रिजर्व में भी रखे गए हैं टैंकर

जिले में जलापूर्ति के लिए 181 टैंकर तैयार कराए गए। इनमें से अभी केवल 56 से ही जलापूर्ति की जा रही है। बाकी के 125 टैंकर रिजर्व में तैयार रखे गए हैं, ताकि यदि और गांवों में पानी की परेशानी हो तो वहां पर भी टैंकरों से पानी भिजवाया जा सके। इसके लिए एक व्यवस्था तय की गई है। इसके तहत किसी भी गांव में जलसंकट हो तो वहां का ग्राम प्रधान जिला पंचायत राज अधिकारी को सूचना देते हैं। इसके बाद क्रास चेकिंग में वाकई जरूरत पाए जाने पर वहां टैंकर से जलापूर्ति शुरू कराई जा सकती है।

 

Show More
BK Gupta Desk/Reporting
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned