लाइफ सपोर्ट सिस्टम के बिना दौड़ रही हमारी एम्बुलैंस मरीजों की जिंदगी से कर रही खिलवाड़

उच्च अधिकारियों को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में एम्बुलेंस एजेंसी की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिले में काफी ऐसी एम्बुलेंस ऐसी हैं जो खटारा हैं और उनमें एग्रीमेंट के अनुसार मरीज को बचाने वाली आवश्यक सुविधाएं तक नहीं हैं। यहां तक की इन एम्बुलेंस को चलाने वाले अनेक चालक भी पूरी तरह से प्रशिक्षित नहीं हैं।

By: Jitendra

Published: 21 Oct 2020, 11:45 AM IST

झुंझुनूं. किसी एम्बुलेंस में जरूरी उपकरण नहीं है तो किसी में ऑक्सीजन सिलेण्डर की कमी है। फिर भी अधिकारियों की मिलीभगत से जिले में ऐसी अनेक खटारा एम्बुलेंस सरपट दौड़ रही है। हैरानी की बात यह है कि यह एम्बुलेंस समय पर मरीज तक भी नहीं पहुंच रही। जिले के सबसे बड़े राजकीय भगवान दास खेतान अस्पताल में पिछले दिनों कोरोना पॉजिटिव मरीज को चार घंटे देरी से एम्बुलेंस मिलने के मामले में सीइओ ने जांच की तो यह खुलासा हुआ है। उच्च अधिकारियों को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में एम्बुलेंस एजेंसी की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिले में काफी ऐसी एम्बुलेंस ऐसी हैं जो खटारा हैं और उनमें एग्रीमेंट के अनुसार मरीज को बचाने वाली आवश्यक सुविधाएं तक नहीं हैं। यहां तक की इन एम्बुलेंस को चलाने वाले अनेक चालक भी पूरी तरह से प्रशिक्षित नहीं हैं।

चार घंटे देरी से आना घोर लापरवाही
जांच रिपोर्ट में सामने आया हैकि कोरोना पॉजिटिव मरीज को जयपुर रैफर करने के लिए एम्बुलेंस के लिए दोपहर एक बजे फोन किया गया था। यह एम्बुलेंस चार घंटे बाद पहुंची और वह भी खटारा निकली जिसमें मरीज को प्रारंभिक तौर चाहने वाली कोई सुविधाएं नहीं थी। इसके बाद दूसरी एम्बुलेंस बुलाई गई जो जाखल से यहां पहुंची।

चिकित्सकों से नहीं करना चाहिए था विवाद
अप्रशिक्षित एम्बुलेंस चालकों ने मरीज को ले जाने की बजाए चिकित्सकों से बहसबाजी करने लगे। ऐसे में जांच रिपोर्ट में बताया गया किएम्बुलेंस चालकों को चिकित्सकों से बहसबाजी की बजाए मरीज को ले जाने में सहयोग करना चाहिए था। मरीज की परेशानियों को देखते हुए चिकित्सकों का देरी से एम्बुलेंसपहुंचने पर आपत्ति करना वाजिब है।

नहीं होता साप्ताहिक निरीक्षण
जिले में संचालित एम्बुलेंस का साप्ताहिक निरीक्षण भी नहीं किया जाता है। जबकि बिना निरीक्षण और सुविधाओं को जांचे कार्यकारी एजेंसी को भुगतान कर दिया गया। एक-दो बार जरूर पैनल्टी लगाई गई बताई और वह भी नाममात्र की।

जिले में एम्बुलेंस की स्थिति....

एम्बुलेंस 108 22
एम्बुलेंस 104 11
बैस एम्बुलैंस 05

एम्बुलेंस में ये होना जरूरी....
-प्रशिक्षित पायलट
-नर्सिंग स्टाफ (इएमटी)
-इमरजेंसी मेडिकल इकप्यूपमेंट
-ऑक्सीजन सिलेंडर

इनका कहना है....
कोरोना मरीज को एम्बुलेंस के चार घंटे देरी से मिलने के मामले में जांच रिपोर्ट कलक्टर को सौंप दी गई है। एम्बुलैंस को एक बजे बुलाया गया और वह चार बजे आई। जो एम्बुलेंस आई वह भी बिल्कुल खटारा निकली। बाद में एक एम्बुलेंस जाखल से बीडीके पहुंची। जिसमें मरीज को जयपुर रैफर किया गया। ज्यादातर एम्बुलेंस खटारा हैं और इनमें अप्रशिक्षित चालक लगे हुए हैं।
रामनिवास जाट, सीइओ जिला परिषद (झुंझुनूं)

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