राजस्थान का भोजासर गांव जहां 1952 से बंद है मृत्युभोज

गांव के थानाराम आर्य के नेतृत्व में चूनाराम, धूकलराम, सूरजाराम, नाराणाराम, चिमनाराम, कालूराम, जगनाराम, नेतराम, हरनंद, जेलाराम, जोखीराम, हुणताराम, हीराराम आदि सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आर्य समाज से प्रभावित होकर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष करके लोगों को जागरूक करने का काम किया था।

By: Rajesh

Published: 21 Nov 2020, 11:33 PM IST

#bhojasar village in jhunjhunu
मंडावा. भोजासर गांव जिला मुख्यालय झुंझुनूं से 21 किलोमीटर पश्चिम तथा पंचायत समिति मुख्यालय मंडावा से 11 किलामीटर दूर पूर्व में स्थित है। गांव का इतिहास करीब चार सौ पचास साल पुराना है। सरपंच ओमप्रकाश ने बताया कि आर्य समाज ने गांव को विकास की राह दिखाने का काम किया। गांव के थानाराम आर्य के नेतृत्व में चूनाराम, धूकलराम, सूरजाराम, नाराणाराम, चिमनाराम, कालूराम, जगनाराम, नेतराम, हरनंद, जेलाराम, जोखीराम, हुणताराम, हीराराम आदि सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आर्य समाज से प्रभावित होकर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष करके लोगों को जागरूक करने का काम किया था। जिसके परिणाम स्वरूप सन् 1952 में गांव के लोगों ने मृत्युभोज बंद करने का निर्णय लिया था। गांव में तब से आज तक मृत्युभोज बंद है। शहीद हुए करणीराम करणीराम का जन्म 2 फरवरी सन् 1914 को देवाराम मील के घर हुआ था। चंद्रपाल मील व सुनील कुमार ने बताया कि करणीराम ने इलाहाबाद से वकालत की पढ़ाई की। वकालत के दौरान गरीब लोगों से कभी फीस नहीं ली। आजादी से पहले किसानों में जागीरदारी प्रथा के प्रति रोष होने लगा। इसी दौरान 13 मई 1952 को उदयपुरवाटी क्षेत्र के चंवरा गांव में सेडू गुर्जर की ढाणी में करणीराम व रामदेव शहीद हो गए।

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आजादी से पहले भी चलता था स्कूल सेवानिवृत व्याख्याता नेमीचंद मील ने बताया कि गांव ऐतिहासिक धरोहर समाध भवन में आजादी से पूर्व सन् 1925 में प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की गई थी। उन्होंने इस विद्यालय में अध्ययन किया था। स्कूल में एक अध्यापक पढ़ाता था। अखिलेश कुमार ने बताया कि अब समाध भवन का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। आजादी के बाद गांव में राजकीय विद्यालयों की स्थापना हुई। आज गांव में शहीद करणीराम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय, दो प्राईवेट माध्यमिक विद्यालय, सहित आयुर्वेद औषधालय, पशु चिकित्सालय, उप स्वास्थ्य केन्द्र, बैंक, पोस्ट ऑफिस, पंचायत भवन, पेयजल टंकी की सुविधा है।

आस्था का केन्द्र है श्री रघुनाथ जी का मंदिर

श्रीरधुनाथजी का मंदिर, समाध भवन, कुआं व कुशळाराम की छतरी ऐतिहासिक धरोहर हैं। श्रीरघुनाथजी मंदिर की स्थापना करने का काम एक महात्मा ने किया था। उन्होंने ठाकुरजी की मूर्ति लाकर गांव के एक कोने में छोटी सी गुमटी बनाकर स्थापित की थी। फिर धीरे धीरे कई सालों के बाद मंदिर का बड़ा आकार हो गया। पूर्व सहायक राजस्व अधिकारी बसंतलाल शर्मा व प्रभूदयाल शर्मा ने बताया कि यह मंदिर करीब तीन सौ वर्ष पुराना है। मंदिर में सर्व प्रथम लालदास महंत थे। कृषि व पशुपालन:- आर्य समाज से गांव में शिक्षा के प्रति जागरूकता आई। रामेश्वर सिंह मील सेवानिवृत आईएएस तथा रघुवीर सिंह मील आरएएस पद से सेवानिवृत हुए है। इसके अलावा भी गांव के कई प्रशानिक अधिकारी, चिकित्सक, प्रोफेसर, प्राचार्य, सैनिक, सहित अनेक विभागों में कर्मचारी है। लेकिन ग्रामीणों का मुख्य धंधा कृषी व पशुपालन हैं।

#story of bhojasar

भोजासर में रुकती थी रेल सीकर-लुहार रेल लाईन पर मुकुंदगढ़ व नूआं के मध्य भोजासर का रेल्वे स्टेशन था। दिन में गुजरने वाले ट्रेन भोजासर में रूकती थी। लेकिन बड़ी लाइन बनने के बाद कोई रेल नहीं रूकती है। सहीराम, रामनिवास व महेश कुमार ने बताया कि अब भोजासर रेल्वे स्टेशन को भी हटा दिया गया। हालांकि झुंझुनूं से मुकुंदगढ़, झुंझुनूं से मंडावा तथा खेतड़ी कॉपर से सुजानगढ़ जाने वाली प्राईवेट बसें गांव से होकर जाती है। एक रोडवेज बस भी झुंझुनं से भोजासर आती है। रोडवेज का रात्रि विश्राम भी गांव में ही होता है।

समस्याएं :- गावं में गंदे पानी की निकासी की समस्या काफी सालों से है। प्रधानाचार्य प्यारेलाल मीणा, सत्यवान व पूर्णमल ने बताया कि गांव की नालियों का गंदा पानी आकर अमर शहीद करणीराम राजकीय उमावि के सामने एकत्र होता है। जिससे विद्यार्थियों सहित आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल सामने हमेशा गंदा पानी भरा रहना गांव की मुख्य समस्या है।

फैक्ट फाइल:-2011 के अनुसार
जनसंख्या-2457
(पुरूष-1250, महिला-1207)
औसत साक्षरता-79. 48 प्रतिशत
कुल आवास-440
समुद्र तल से ऊंचाई-341 मीटर

(कंटेंट- महिपाल मील)

Rajesh Desk/Reporting
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