यह है जानवरों की दोस्त दीदी, नाम है प्रिया महरिया

आस-पास आवारा घूमने वाली गाय, बछड़ों तक के नाम रख दिए हैं। जब प्रिया नाम लेकर उनको पुकारती है तो गाय, बछड़े, श्वान व अन्य पशु दौड़े चले आते हैं। कस्बेवासियों व आस-पास के लोगों को बेटी पर नाज होने लगा है।

By: Rajesh

Published: 16 Oct 2020, 09:46 AM IST

#priya mahariya

खेतड़ीनगर. यह है प्रिया महरिया...। एमए तक पढ़ी हुई...। कोई इसे जानवरों की दोस्त दीदी कहता है तो कोई डॉग वाली दीदी के नाम से पुकारता है। पूरे क्षेत्र में प्रिया की अलग पहचान बनी हुई है। पहचान बने भी क्यों नहीं। सर्दी, गर्मी हो या बरसात। जानवरों की सेवा के लिए वह हमेशा तत्पर रहती है। वह भी बिना कोई मेहनताना लिए।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के खेतड़ीनगर स्थित केसीसी टाउनशिप में रहने वाली प्रिया महरिया पिछले सात साल से बीमार पशुओं का प्राथमिक उपचार निशुल्क कर रही है। गंभीर होने की स्थिति में खुद के खर्चे पर दूसरे चिकित्सकों से उपचार करवाती है।

#dog wali didi

कोई भी व्यक्ति यदि किसी जानवर को मारता हुआ दिखाई देता है तो उससे टोकने से भी नहीं चूकती। अब तो प्रिया को देखकर अनेक व्यक्ति पशुओं को मारने की बजाय उनसे स्नेह करने लगे हैं।

#dog wali priya
आस-पास आवारा घूमने वाली गाय, बछड़ों तक के नाम रख दिए हैं। जब प्रिया नाम लेकर उनको पुकारती है तो गाय, बछड़े, श्वान व अन्य पशु दौड़े चले आते हैं। कस्बेवासियों व आस-पास के लोगों को बेटी पर नाज होने लगा है। वे भी दवा के लिए राशि देने लगे हैं। कहीं भी बीमार श्वान या घायल गाय बछड़ा होता तो लोग प्रिया को तुरंत सूचना देते हैं। सूचना मिलते ही दवाई का बैग लेकर वह घायलों का इलाज करने पहुंच जाती है।

#priya in jhunjhunu

जानवरों को हर दिन बिस्किट व खाना भी खिलाती है। श्वानों के लिए सर्दियों में घर से बाहर घर बनाकर गरम कंबल तक डालती है। ज्यादा बीमार, टूटे पैरों की गाय व बछड़ों के इलाज के लिए हरियाणा के नारनौल अस्पताल में भेजने का खर्चा भी खुद उठाती है। आवारा घूम रही गायों के लिए कई घरों के आगे पानी की व्यवस्था कर रखी है।

#mandasi ki priya

लॉकडाउन में गायों को खिलाई सब्जियां
लॉकडाउन लगा तब आवारा घूम रहे गाय ,बछड़ों के खाने की तकलीफ हुई तो खुद सब्जी मंडी से प्रतिदिन सब्जियां लाती व गायों को खिलाती थी।

प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण लिया
एमए तक पढ़ी प्रिया महरिया को शुरू में दवाइयों की जानकारी नहीं थी। तब स्थानीय पशु चिकित्सकों व सहायकों की मदद से प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण लिया।

#priya mahariya

मां ने बढ़ाया हौसला
प्रिया मूल रूप से झुंझुनूं व नवलगढ़ के बीच स्थित मांडासी गांव की रहने वाली है। प्रिया के पिता केसीसी में नौकरी करते थे। इसलिए परिवार अब यहीं बस गया। प्रिया जब डेढ़ साल की थी, उसी समय पिता का साया उठ गया, लेकिन मां पार्वती देवी ने दोनों बेटियों को अच्छे संस्कार दिए। प्रिया की मां ने बताया कि घर में एक बिल्ली का बच्चा था। वह बीमारी के कारण उसकी आंखों के सामने मर गया। तब उसे बहुत दुख हुआ। उसी दिन से उसने मूक जानवरों की सेवा का संकल्प ले लिया।

एसपी कर चुके सम्मानित
लॉकडाउन में बेजुबान पशु पक्षियों की सेवा करने पर प्रिया का चिड़ावा में जिला स्तर पर जिला पुलिस अधीक्षक जेसी शर्मा सम्मान कर चुके।

कंटेट- हर्ष स्वामी

Rajesh Desk/Reporting
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