बोर्ड का अच्छा परिणाम देने में शिक्षा मंत्री डोटासरा का जिला पिछड़ा

शेखावाटी में सबसे खराब हाल शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के गृह जिले के हैं। यहां 42 शिक्षकों ने बोर्ड का परिणाम अच्छा नहीं दिया। इसके अलावा चूरू के 27 तथा झुंझुनूं के 14 कार्मिकों को नोटिस जारी हुआ है। झुंझुनूं के दस व्याख्याता और चार प्रधानाध्यापक शामिल हैं।

By: Rajesh

Published: 12 Jul 2021, 11:00 PM IST

सुरेंद्र डैला.चिड़ावा (झुंझुनूं). राजस्थान के सैकड़ों शिक्षक ऐसे हैं जो लाखों की मोटी तनख्वाह लेकर भी अच्छा रिजल्ट नहीं दे पा रहे। जबकि निजी शिक्षक कम वेतन लेकर भी अच्छा परिणाम दे रहे हैं। शेखावाटी में सबसे खराब हाल शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के गृह जिले के हैं। यहां 42 शिक्षकों ने बोर्ड का परिणाम अच्छा नहीं दिया। ऐसे सरकारी शिक्षकों के खिलाफ विभाग ने कार्रवाई की तैयारी कर रखी है। निदेशालय माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर ने सत्र 2019-20 में दसवीं और बारहवीं कक्षा में न्यूनतम परिणाम देने वाले एक हजार 932 कार्मिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। जिसमें 129 प्रधानाचार्य, 982 व्याख्याता और 821 प्रधानाध्यापक शामिल हैं। उक्त कार्मिकों को 15 दिन में न्यूनतम परिणाम रहने का कारण बताना होगा। नोटिस का जवाब नहीं देने पर 17 सीसीए की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। न्यूनतम परिणाम देने में उदयपुर सबसे आगे हैं। यहां के दो सौ कार्मिकों को नोटिस मिला है। कुछ शिक्षकों का परिणाम तो पांच प्रतिशत तक रहा। लिस्ट में ऐसे दर्जनभर सेज्यादा कार्मिक शामिल हैं, जिनका परीक्षा परिणाम पांच प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच रहा। विभाग ने प्रधानाचार्य, व्याख्याता और प्रधानाध्यापक को अलग-अलग न्यूनतम प्रतिशत तय कर नोटिस जारी किया है। हालांकि अनेक सरकारी शिक्षक ऐसे भी जिनका परिणाम सौ फीसदी रहा है। लेकिन कुछ शिक्षकों के कारण पूरा परिणाम प्रभावित हो रहा है।

शेखावाटी में सीकर पिछड़ा

शेखावाटी में सबसे खराब हाल शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के गृह जिले के हैं। यहां 42 शिक्षकों ने बोर्ड का परिणाम अच्छा नहीं दिया। इसके अलावा चूरू के 27 तथा झुंझुनूं के 14 कार्मिकों को नोटिस जारी हुआ है। झुंझुनूं के दस व्याख्याता और चार प्रधानाध्यापक शामिल हैं। अजमेर के 59, अलवर के 111, बांसवाड़ा के 117, बांरा के 63, बाड़मेर के 77, भरतपुर के 73, भीलवाड़ा के 36 , बीकानेर के 38 , बूंदी के 47, चित्तौडगढ़़ के 62, दौसा के 47, धौलपुर के 51, डूंगरपुर के 53, गंगानगर के 37, हनुमानगढ़ के 21, जयपुर के 91, जैसलमेर के 40, जालौर के 18 , झालावाड़ के 65, जोधपुर के 55, करौली के 94, कोटा 6 5, नागौर के 53, पाली के 69, प्रतापगढ़ के 57, राजसमंद के 34, सवाईमाधोपुर के 48 , सिरोही के 32, टोंक के 25 और उदयपुर के 200 प्रधानाचार्य, व्याख्याता और प्रधानाध्यापक शामिल हैं।

झुंझुनूं में 14 कार्मिक शामिल-

न्यूनतम परिणाम के मामले में प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में झुंझुनंू की स्थिति अच्छी है। यहां के केवल 14 व्याख्याता और प्रधानाध्यापकों को नोटिस मिला है। जिसमें राजकीय उमावि रायपुर घरड़ाना के व्याख्याता ओमप्रकाश मीणा, राजकीय उमावि बुहाना के अरुण कुमार चौमाल और संजू कुलश्रेष्ठ, राजकीय उमावि भिर्र के अतुल दहिया, सुधा कुमारी व विजय सिंह, श्री शिवलाल राजकीय उमावि मंडावरा के कुरड़ाराम यादव, राजकीय उमावि उदयपुरवाटी के भंवरसिंह सैनी, स्वतंत्रता सैनानी पंडित ताडकेश्वर शर्मा राजकीय उमावि पचेरी बड़ी के अनिल और ओमप्रकाश को नोटिस जारी किया गया है। इसी प्रकार राजकीय बालिका मावि पचेरी कलां की प्रधानाध्यापक सुशीला कुल्हार, राजकीय मावि बुहाना के ईश्वरसिंह, राजकीय उमावि किठाना के देशराम और शहीद मनीराम राजकीय मावि लांबा की प्रधानाध्यापक मनेश कुमारी को नोटिस मिला है।


इनका कहना है

न्यून परीक्षा परिणाम रहने की परिस्थितियों और कारणों की पूरी समीक्षा की जानी चाहिए। यदि समीक्षा उपरांत संबंधित शिक्षक ही जिम्मेदार है तो कार्रवाई की जाए।
-उपेन्द्र शर्मा, प्रदेश महामंत्री
राजस्थान शिक्षक संघ (शेखावत)

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