विदेशों में बजता था राजस्थान के चिड़ावा के पहलवानों का डंका

बिड़ला परिवार ने दिल्ली में अखाड़े की स्थापना करवाकर दी। जिसका संस्थापक गुरु हनुमान के बनाया गया। उनका निधन 24 मई 1999 को हुआ।दिल्ली में तैयार किए हजारों पहलवान-दिल्ली में संचालित अखाड़े में गुरु हनुमान ने हजारों पहलवान तैयार किए। जिसने देश-दुनियां में नाम कमाया।

By: Rajesh

Published: 27 Jul 2020, 10:04 PM IST


सुरेन्द्र डैला
चिड़ावा. स्वादिष्ठ पेड़ों के लिए प्रसिद्ध चिड़ावा कस्बे के पहलवानों का डंका कभी विदेशों में भी बजता था। पिलानी रोड पर संचालित गुरु हनुमान व्यायामशाला को दर्जनों पहलवान देने का गौरव मिला तो बहुत से लोगों को पहलवानी के दम पर सरकारी नौकरी भी मिली। यही वजह है कि देश-प्रदेश में व्यायामशाला का डंका बजता है।

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राजस्थान के झुंझुनूं जिले के चिड़ावा शहर में जन्मे गुरु हनुमान ने देश-दुनिया में कुश्ती के क्षेत्र में नाम कमाया। उन्होंने दिल्ली में अखाड़ा चलाकर हजारों पहलवान दिए। जिसके बाद चिड़ावा में भी व्यायामशाला की स्थापना की। जो कि करीब 35 साल से संचालित हो रही है। व्यायामशाला में फिलहाल भी दर्जन युवक व्यायाम के लिए पहुंच रहे हैं। कोरोना के चलते कुश्ती का अभ्यास नहीं करवाया जा रहा। व्यायामशाला को पिछले तीन साल से स्कूल स्तर की राज्यस्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता हो रही है।

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करीब दस बीघा जमीन में संचालित व्यायामशाला की स्थापना वर्ष 1985-86 में की गई। जिसका उद्ेश्य क्षेत्र के युवाओं का पहलवानी में आगे लाना था। जिसमें संस्थापक गुरु हनुमान कामयाब भी हुए। गुरु हनुमान ने भामाशाहों का सहयोग लेकर कमरा और ट्यूबवैल का निर्माण करवाया। वहीं तत्कालीन सांसद शीशराम ओला ने अपने कोटे से करीब तीन लाख की लागत में चारदीवारी का निर्माण करवाया।

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अखाड़े की स्थापना-

गुरु हनुमान का जन्म 15 मार्च 1901 को हुआ। व्यायामशाला कमेटी अध्यक्ष महासिंह राव बताते है कि जन्म साधारण परिवार में हुआ। बचपन में ही माता-पिता का निधन हो गया। जिस कारण घर-परिवार की जिम्मेदारी गुरु हनुमान के कंधों पर आ गई। घर चलाने के लिए गुरु दिल्ली चले गए। दिल्ली में बिड़ला परिवार की मिल थी। जिसमें चिड़ावा और पिलानी के लोगों को ही ज्यादा रोजगार दिया जाता रहा था। गुरु को पन्नालाल कौशिक दिल्ली लेकर गए। जहां नौकरी के साथ पहलवानी को भी जारी रखा। बाद में बिड़ला परिवार ने दिल्ली में अखाड़े की स्थापना करवाकर दी। जिसका संस्थापक गुरु हनुमान के बनाया गया। उनका निधन 24 मई 1999 को हुआ।दिल्ली में तैयार किए हजारों पहलवान-दिल्ली में संचालित अखाड़े में गुरु हनुमान ने हजारों पहलवान तैयार किए। जिसने देश-दुनियां में नाम कमाया। अखाड़े से 16 अर्जुन अवार्डी पहलवान, तीन पद्मश्री, एक पद्मभूषण, सात गुरु द्रोणाचार्य अवाडऱ्ी, एक ध्यानचंद अवार्डी शामिल हुए। गुरु हनुमान खुद पद्मश्री और द्रोणाचार्य अवार्डी थे। चिड़ावा में जुटते हैं प्रदेशभर के पहलवान-व्यायामशाला में स्थापना के बाद ओपन और स्कूल स्तर के दंगल होते रहे हैं। सत्र 2017 से लेकर 2019 तक बालक वर्ग की स्कूली राज्यस्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता हो चुकी हैं। जिसमें सैकड़ों पहलवानों ने हिस्सा लिया। कोरोना संकट टलने के बाद फिर से दंगल करवाए जाएंगे।

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ट्रैक निर्माण और टीनशैड को प्राथमिकता-व्यायामशाला कुछ व्यवस्थाओं में भी कमी दिख रही है। जिसे भी पूरा करने के प्रयास किए जाएंगे। अध्यक्ष राव के अनुसार अखाड़े में ट्रैक का निर्माण करवाया जाएगा। वहीं दंगल स्थल पर छाया के लिए टीनशैड लगवाए जाएंगे। जिसके लिए क्षेत्रीय विधायक जेपी चंदेलिया से संपर्क किया जा रहा है।

क्षेत्र में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। प्रोत्साहन की जरूरत है। कोरोना संकट टलने के बाद फिर से अखाड़े में कुश्ती की तैयारी करवाई जाएगी। व्यायामशाला के विकास के लिए क्षेत्रीय विधायक से भी सहयोग लिया जाएगा

-महासिंह राव, व्यायामशाला अध्यक्ष एवं गुरु द्रोणाचार्य अवार्डी

व्यायामशाला के दम पर बहुत से लोगों को नौकरी मिली है। बहुत से पहलवानों ने क्षेत्र का नाम रौशन किया है। व्यायामशाला में भविष्य में भी कुश्ती दंगल को बढ़ावा देने के लिए प्रतियोगिताएं करवाई जाएंगी। जिसका फायदा स्थानीय पहलवानों को भी मिलेगा-कोच राजेंद्रपालसिंह, सचिव, गुरु हनुमान व्यायामशाला, चिड़ावा

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