यह है झुंझुनूं की ऐसी गुरु मां, जो खुद ज्यादा नहीं पढ़ी, लेकिन बेटा बनेगा कलक्टर

अगर आप स्कूल में हैं तो कुछ नहीं सोचें, केवल अपनी पढाई पर ध्यान दें। कुछ खेल भी खेल सकते हैं। दसवीं के बाद तय करें कि उनको किस क्षेत्र में जाना है। डॉक्टर/ इंजीनियर बनना है या सिविल सेवा में जाना है। या कुछ और बनना है। इसके बाद उसी के अनुरूप पढ़ाई करें। नवीन ने बताया कि सिविल सेवा की परीक्षा के लिए हिन्दी की बजाय अंगे्रजी माध्यम बेहतर रहता है। असफलता से घबनाएं नहीं, उससे सीखें।

By: Rajesh

Published: 05 Sep 2019, 12:14 PM IST

राजेश शर्मा

झुंझुनूं. मां ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है, लेकिन फिर भी शिक्षा का महत्व भली भांती जानती है। प्रारंभिक पढ़ाई गांव में हुई। ना लाइट की सही व्यवस्था थी ना ही पढ़ाई का श्रेष्ठ माहौल था। प्रारंभिक शिक्षा भी हिन्दी माध्यम में हुई। मां के साथ पिता ने शहर लाकर पढ़ाई करवाई। बेटे का हर समय सहयोग किया। नतीजा यह रहा कि जो मां कभी स्कूल नहीं गई, उसका बेटा अब कलक्टर बनेगा।
हाल ही में आइएएस में चयनित नवलगढ़ के देलसर खुर्द गांव निवासी नवीन कुमार ने 'राजस्थान पत्रिकाÓ को बताया कि पंाचवीं तक की पढाई देलसर खुर्द गांव में हिन्दी माध्यम में हुई। इसके बाद बारहवीं तक झुंझुनूं में पढ़ा। बीटेक जालंधर से किया। इसके बाद दिल्ली में लगातार चार साल तक तैयारी की। कई बार निराशा हाथ लगी, लेकिन हार नहीं मानी। नवीन की मां सुनीता देवी गृहिणी है, जबकि पिता सुभाष चंद्र मार्बल व्यवसायी हैं। छोटा भाई कार्तिक बीकॉम कर रहा है। आइएएस ने कहा, मां मेरी पहली गुरु है।


चार जगह नंबर आया, लेकिन जोइन नहीं किया
नवीन ने बताया कि 2014 में बैंक पीओ में नंबर आ गया, लेकिन जोइन नहीं किया। इसके बाद 2016 में आइबी और सहायक कमांडेंट में नंबर आया, लेकिन दोनों ही जगह जोइन नहीं किया। इसके बाद 2017 में एक्साइज इंस्पेक्टर पद पर नियुक्ति मिली। यहां छह माह नौकरी की, इसके बाद सिविल सेवा में नंबर आ गया। उन्होंने बताया कि मेरा लक्ष्य सिविल सेवा में जाने का था, इसके लिए लगातार चार साल तैयारी की। दूसरी नौकरियां नहीं की।


यूथ को संदेश
अगर आप स्कूल में हैं तो कुछ नहीं सोचें, केवल अपनी पढाई पर ध्यान दें। कुछ खेल भी खेल सकते हैं। दसवीं के बाद तय करें कि उनको किस क्षेत्र में जाना है। डॉक्टर/ इंजीनियर बनना है या सिविल सेवा में जाना है। या कुछ और बनना है। इसके बाद उसी के अनुरूप पढ़ाई करें। नवीन ने बताया कि सिविल सेवा की परीक्षा के लिए हिन्दी की बजाय अंगे्रजी माध्यम बेहतर रहता है। असफलता से घबनाएं नहीं, उससे सीखें। नवीन फिलहाल मसूरी में आइएएस का प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे जब-जब भी झुंझुनूं आएंगे, युवाओं का मार्गदर्शन जरूर करेंगे।


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