आवाम की अधूरी हसरतें, नई सरकार से पूरी होने की उम्मीद

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By: Vinod Chauhan

Published: 18 Dec 2018, 02:51 PM IST

आवाम की अधूरी हसरतें, नई सरकार से पूरी होने की उम्मीद
झुंझुनूं. उपखंड में अनेक ऐसे प्रोजेक्ट हैं जो रेंगते हुए चल रहे हैं। शहर का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट सीवरेज कईसालों बाद आज भी रेंगे रहा और शहर की जनता खुदे पड़े शहर का दंश झेलती आ रही है। यह कार्य 2010 में शिलान्यास के बाद से ही यह कार्य धीमी गति से चल रहा है। कईबार कार्यकारी एजेंसियां टर्मिनेट हुई और इन्हें बदल दिया गया। बावजूद इसके नईआने वाले एजेंसियां भी कुछखास नहीं कर सकीं है और नतीजा यह है कि काम वर्तमान में भी चल रहा है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान दोरासर गांव की चारागाह भूमि पर मंजूर किए गए खेल विश्वविद्यालय को बदलकर भाजपा सरकार ने खेल संस्थान कर दिया। परंतु अभी तक यह धरातल पर नहीं आया है। पुराने बस स्टैंड को खेमी शक्ति स्थित नव निर्मित बस स्टैंड के शिफ्टिंग का कार्य अभी तक नहीं हुआ है।दो नंबर रोडगौरव पथ भी अधरझूल में हैं। वहीं, इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत कुंभाराम लिफ्ट कैनाल का पानी से उपखंड के बड़ी संख्या में वंचित हैं। गांवों के जोडऩे वाली मुख्य सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। साथ ही जिले के सबसे बड़े बीडीके अस्पताल में ब्लड कंपोनेंटर यूनिट समेत अनेक ऐसे प्रोजेक्ट अधूरे हैं जिन्हें पूरा करना विधायकों के सामने चुनौती है।

कॉलेज खुले और चले रोडवेज बसें
बुहाना. उपखंड मुख्यालय पर सरकारी कॉलेज खोलने, आजादी के बाद भी रोडवेज सेवाओं का संचालन नहीं होना हमेशा से लोगों को खलता आया है। निरंतर गिरते जलस्तर के कारण कुंभाराम लिफ्ट परियोजना का मीठा पानी क्षेत्र में लाना भी बड़ी चुनौती है। सूरजगढ़ में सरकारी आईटीआई, सिंघाना को नगर पालिका घोषित कराने, बुहाना में एडीजे कोर्ट , सूरजगढ़ में न्यायिक कोर्ट खोलने की मांग भी काफी पुरानी है। यहां पर लोगों ने इस बार भाजपा से नये चेहरे को जीताकर विधानसभा भेजा है ताकि यहां की समस्याएं हल हो सकें।
चिड़ावा. मुख्य रूप से नया बस स्टैंड पर बरसाती पानी की समस्या सदैव बनी रहती है। बरसात के समय स्टैंड में घुटनों तक पानी भर जाता है। जिससे राहगिरों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इसी प्रकार पिलानी रोड पर जल निकासी की समस्या भी हर साल बनी रहती है। हालांकि शहर में सीवरेज का काम चल रहा है, जिससे कुछ हद तक जलभराव की समस्या दूर हो सकती है। इसी प्रकार शहर में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं। जिससे हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। खासकर, स्टेशन रोड व बाजार में तो हर समय जाम लगा रहता है। उपखंड स्तर पर सरकारी कॉलेज खुलवाना भी सरकार व स्थानीय विधायक के लिए चुनौती पूर्ण रहेगा। क्योंकि, सरकारी कॉलेज को लेकर हर साल आंदोलन होते रहते हैं।
खेतड़ी. तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने बबाई में छह करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली डेयरी प्लांट की स्वीकृति जारी की थी और बजट आवंटन से डेयरी की चारदीवारी व भवन का लगभग आधा कार्य ही पूर्ण हो सका था। फिर बजट अभाव में प्लांट आदि का कार्य अधरझूल में लटक गया। फिर से यहां कांग्रेस आने से आस बंधी है कि डेयरी पुन: शुरु होगी। डेयरी की उत्पाद क्षमता विधायक डा.जीतेन्द्र सिंह ने कहा कि अब इस डेयरी का पुन: संशोधित तकमीना बनवा कर पहले स्वीकृत 25 हजार लीटर क्षमता के स्थान पर गुजराज की अमूल डेयरी की तर्ज पर एक लाख लीटर क्षमता की स्वीकृती जारी की जाएगी।

Vinod Chauhan
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