13 को चांद की 16 कलाओं से बरसेगा अमृत

13 को चांद की 16 कलाओं से बरसेगा अमृत
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Gunjan Shekhawat | Updated: 11 Oct 2019, 12:01:02 PM (IST) Jhunjhunu, Jhunjhunu, Rajasthan, India

jhunjhunu news : झुंझुनूं. शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को है। इस दिन चंद्रमा की सोलह कलाओं की शीतलता देखने लायक होती है। यह पूर्णिमा सभी बारह पूर्णिमाओं में सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। इस दिन भगवान को खीर का प्रसाद अर्पित किया जाता है। मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण का महारास हुआ था और इसी दिन चंद्र देवता ने अमृत की वर्षा की थी। पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि सनातन धर्म में खीर को उच्च कोटि का व्यंजन माना गया है, जो भगवान को प्रिय है। पूर्णिमा के दिन खुले आसमान के नीचे खीर का प्रसाद र

झुंझुनूं. शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को है। इस दिन चंद्रमा की सोलह कलाओं की शीतलता देखने लायक होती है। यह पूर्णिमा सभी बारह पूर्णिमाओं में सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। इस दिन भगवान को खीर का प्रसाद अर्पित किया जाता है। मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण का महारास हुआ था और इसी दिन चंद्र देवता ने अमृत की वर्षा की थी। पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि सनातन धर्म में खीर को उच्च कोटि का व्यंजन माना गया है, जो भगवान को प्रिय है। पूर्णिमा के दिन खुले आसमान के नीचे खीर का प्रसाद रखा जाता है, ताकि चंद्रमा की किरणें खीर पर पड़ सकें। मान्यता है कि यह खीर आने वाले शीत ऋतु के प्रकोप से रक्षा करती है तथा वात, पित्त एवं कफनाशक होती है। मिश्रा के अनुसार शरद पूर्णिमा का व्रत करने से संतान दीर्घायु को प्राप्त होती है। शरद पूर्णिमा का व्रत विशेष कर सौभाग्यवती नारियों को करना चाहिए। व्रत के दौरान कथा एवं चंद्रदेव, तुलसी और भगवान विष्णु का विशेष पूजन-अर्चन किया जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। यह रास पूर्णिमा के नाम से भी जानी जाती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूरे वर्ष में केवल इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं का होता है और इससे निकलने वाली किरणें अमृत समान मानी जाती है इस दिन सभी ठाकुरजी के मंदिरों में खीर का प्रसाद लगाया जाता है। रात्रि को चांदनी में रखकर प्रसाद बांटा जाएगा।

सीतसर बालाजी धाम पर मेला आज से
झुंझुनूं. सीतसर बालाजी धाम पर शरद पूर्णिमा के मौके पर तीन दिवसीय मेला शुक्रवार से शुरू होगा। धाम समिति अध्यक्ष पीएल शर्मा ने बताया कि मेला महंत पुष्करलाल पारीक के सानिध्य में लगेगा। इस मौके पर धाम परिसर की भव्य सजावट की गई है। गायक कलाकार भजनों की प्रस्तुति देंगे।

चिड़ावा में भगवान श्रीराम का राजतिलक
चिड़ावा. गांधी चौक में साहित्यकार डॉ.ओमप्रकाश पचरंगिया मार्ग पर नोहरे में चल रही रामलीला का समापन बुधवार रात को राज तिलक के साथ हुआ। जिसके मुख्य अतिथि ब्रह्म चैतन्य संस्थान के पूर्व अध्यक्ष विश्वनाथ अरड़ावतिया थे। अध्यक्षता श्रीरामलीला परिषद के संरक्षक बैजनाथ मोदी ने की। विशिष्ट अतिथि रामवतार दाधीच और महेंद्र धनखड़ थे। अतिथियों ने पं.पवन महर्षि के सानिध्य में विधिवत पूजन किया। भगवान श्रीराम, जानकी, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, हनुमान और वशिष्ठ के तिलकार्चन किया। जिसके बाद आरती की गई। इस दौरान पुरस्कार वितरण समारोह हुआ। जिसमें परिषद के संरक्षक रहे साहित्यकार डॉ.पचरंगिया की पुण्य स्मृति में स्मृति संस्थान और इंद्र सूरजगढिय़ा के सहयोग से कलाकारों पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम में रूप-बसंत का नाटक मंचित किया गया। इस मौके पर परिषद अध्यक्ष प्रमोद अरड़ावतिया, सचिव सुशील पदमपुरिया, कोषाध्यक्ष सुरेश डालमिया, संरक्षक बैजनाथ मोदी, निदेशक महेश धन्ना, किशोरीलाल आदि ने आभार जताया।

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