शहरी सरकार से ना डे्रनेज सिस्टम डवलप हुआ ना ग्रीन बेल्ट

शहर के विकास को अमली जामा पहनाने वाले प्रोजेक्ट या तो कछुआ चाल से चल रहे हैं या फिर उनमें किसी ना किसी वजह से लगे अड़ेंगे की वजह से अटक कर रह गए हैं

By: Jitendra

Published: 19 Jan 2019, 01:29 PM IST

जितेन्द्र योगी. झुंझुनूं.

शहर के विकास को अमली जामा पहनाने वाले प्रोजेक्ट या तो कछुआ चाल से चल रहे हैं या फिर उनमें किसी ना किसी वजह से लगे अड़ेंगे की वजह से अटक कर रह गए हैं। ऐसे में नगर परिषद की ओर से शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना तय समय सीमा में पूरा होने की उम्मीद धूमिल सी नजर आ रही है। शहर में कई सालों से सीवरेज प्रोजेक्ट धीमी गति से चल रहा है और इसका दंश कई सालों से जनता झेल रही है। अब यही हाल अमृत योजना के तहत हो रहे कार्यों का होता नजर आ रहा है। नगर परिषद की ओर से अमृत योजना के तहत ड्रेनेज में रेनवॉटर डिस्पोजल और ग्रीन स्पेश को विकसित करने का काम चल रहा है। इसमें झुंझुनूं में पांच पार्कों को विकसित किया जाना था। वहीं डे्रनेज के तहत गंदे पानी की निकासी को लेकर पुख्ता इंतजाम करने थे। परंतु ग्रीन स्पेश भी नया नहीं बढ़ा, जो पहले से थे, उन्हीं में खानापूर्ति कर ली गई।करीब 11 करोड़ रुपए की लागत से ड्रेनेज के तहत रीको सर्किल, जिला स्वर्ण जयंती स्टेडियम और रीको इडस्ट्रीयल एरिया के पानी निकासी की बेहतर व्यवस्था की जानी थी। इनमें दो स्थानों पर रीको सर्किल में रेलवे ट्रेक के पास जमा गंदे पानी के लिए वॉटर टैंक बनाने तथा जिला स्वर्ण जयंती स्टेडियम में जाने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए नाले का निर्माण किया जाना था। नाले का निर्माण कार्य शुरू हुआ, परंतु इसका काम भी सीतसर में जाकर रुक गया। फिलहाल समझाइश का दौर ही चल रहा है। वहीं, रीको इंडस्ट्रीयल एरिया के पानी निकासी को लेकर अभी तक किसी प्रकार की सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में अभी तक ना डे्रनेज सिस्टम डवलप हुआ और ना ही ग्रीन बेल्ट।

 

पांच में से तीन पार्क हुए विकसित
ग्रीन स्पेश के तहत पांच पार्कों नेहरू पार्क, चूणा चौक, इंदिरा नगर पार्क, हाउसिंग बोर्ड और बसंत विहार के पार्कों को विकसित किया जाना था। लेकिन इनका कार्य भी चल रहा है। नया कुछ नहीं किया, केवल उन्हीं की सुंदरता के ढकोसला पीटा जा रहा है।

 

नहीं मिल रहा पर्याप्त बजट
नगर परिषद अधिकारियों की मानें तो कुछ कार्य विवाद के कारण अटक गए। वहीं, बजट भी कुछ खास नहीं मिला है। गंदे पानी की निकासी को लेकर 11 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। वहीं अन्य कार्यों के लिए अभी तक ढाई करोड़ रुपए ही मिले हैं। जबकि ७० से ८० करोड़ रुपए तक योजना के झुंझुनूं को मिलने बताए जा रहे हैं।

 

१९ मार्च तक का है समय
अमृत योजना के तहत शहर के ड्रेनेज और ग्रीन बेल्ट समेत अन्य विकास कार्यों को पूरा करने की समय सीमा १९ मार्च२०१९ हैं। परंतु इंजीनियरों का कहना है कि तय समय सीमा में काम पूरा होना संभव नहीं है। ग्रामीणों से समझाइश का दौर चल रहा है।

 

क्या है अमृत योजना
अटल मिशन फार रिजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफार्मेशन (अमृत) स्कीम में सीकर, चूरू व झुंझुनूं को शामिल किया गया था। सरकार ने अमृत योजना में विकास के लिए शहरी निकाय की जिम्मेदारी तय की थी। इसमें ग्रीन बेल्ट और यातायात के साधन बेहतर करना प्राथमिकता रहेगी। साथ ही बच्चों के लिए विशेष पार्क बनाने का भी प्लान है। गंदे पानी की निकासी होना था। इस स्कीम में 20 फीसदी राशि निकाय को वहन करनी थी।

 

इनका कहना है.....
योजना के तहत काम चल रहा है। वॉटर डिस्पोजल को लेकर रीको में वॉटर टैंक व सीतसर तक जाने वाले नाले का निर्माण हो रहा है। पांच पार्क विकसित किए गए हैं।
सुदेश अहलावत, सभापति नगर परिषद (झुंझुनूं)

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