जिसने मंडावा को पर्यटन नगरी के रूप मेंं दिलाई पहचान वे अब नहीं रहे

जिसने मंडावा को पर्यटन नगरी के रूप मेंं दिलाई पहचान वे अब नहीं रहे

rajesh sharma | Updated: 04 Jun 2019, 04:04:25 PM (IST) Jhunjhunu, Jhunjhunu, Rajasthan, India

उनके पिता देवी सिंह गुढ़ागौडज़ी से विधायक व राज्यसभा सांसद रह चुके। उनके चाचा भीमसिंह भी झुंझुनूं से सांसद रह चुके। उनके निधन पर अनेक संगठनों व जनप्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि दी है। अंतिम संस्कार बुधवार सुबह दस बजे मंडावा में होगा।


मंडावा/ झुंझुनूं. मंडावा को पर्यटन नगरी के रूप में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले केसरी सिंह मंडावा का निधन हो गया। जयपुर के एक निजी अस्पताल में उन्होंने मंगलवार सुबह करीब पांच बजे अंतिम सांस ली। वे करीब 74 वर्ष के थे। चूड़ी अजीतगढ़ के सरपंच गिरवरसिंह ने बताया कि वे मेयो कॉलेज अजमेर के अध्यक्ष रह चुके। वर्तमान में ट्रस्टी थे। मयूर कॉलेज अजमेर व सार्दुल एजुकेशन ट्रस्ट के वर्तमान में अध्यक्ष थे। इनके अलावा अशोक क्लब जयपुर सहित कई संगठनों के अध्यक्ष रह चुके। उनकी खुद का होटल समूह है। पिछले दिनों उनके भाई प्रद्युम्नसिंह का निधन हो गया था। उनके पिता देवीसिंह गुढ़ागौडज़ी से विधायक व राज्यसभा सांसद रह चुके। उनके चाचा भीमसिंह भी झुंझुनूं से सांसद रह चुके। उनके निधन पर अनेक संगठनों व जनप्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि दी है। अंतिम संस्कार बुधवार सुबह दस बजे मंडावा में होगा।


दुग्ध अवशीतन केन्द्र को बंद करने से दूधविक्रेता परेशान
झुंझुनूं. सीकर-झुंझुनूं जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड पलसाना की दुग्ध अवशीतन इकाई झुंझुनूं को करीब चार दिन पहले बिना सूचना अचानक बंद करने से जिले के पशुपालकों में रोष फैला हुआ है।इससे नाराज पशुपालक शिकायत लेकर कलक्टर के पास पहुंचे।
पशुपालकों ने बताया कि बिना किसी पूर्व सूचना के झुंझुनूं स्थित अवशीतन इकाई को बंद कर दिया गया।उन्होंने बताया कि पूर्व में डेयरी प्रशासन ने पशुपालकों के घर से दूध एकत्रित कर ले जाने की व्यवस्था की थी।गाडिय़ों से दूध आस-पास की डेयरियों तक पहुंचता था।लेकिन नए आदेशों में डेयरियों को बंद कर सभी तहसीलों में एक-एक बीएमसी खोल दी है।जहां पशुपालकों को स्वयं के स्तर पर वाहनों से दूध की सप्लाई करने के लिए कहा गया है।पशुपालकों ने बताया कि जिले में 54 समितियां बनी हुई है, जिसमें अधिकांश महिलाएं हैं। लोगों का कहना था कि बीएमसी की दूरी अधिक होने से दूध ले जाना महंगा सौदा साबित होगा।नई व्यवस्था शुरू होने दोहरा घाटा हो रहा है। उन्होंने अवशीतन केन्द्र को फिर से शुरू करवा राहत पहुंचाने की मांग की है।इस मौके पर दूध संकलन केन्द्र सिरियासर का बास के सचिव राजेश, अजाड़ी कला के राजेश, तोगड़ा कला की संतोष, ढेलसर की ज्योति, पीपल का बास के अनिल, प्रियंका, विमला, खेतडी ललिता, संतोष, गोरा, रामप्यारी, प्रमिला, मंजू, सुमित्रा, सरस्वती, सुप्यार, सुमन, अनिता, धर्मवीर, मोहरसिंह आदि उपस्थित रहे।

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