माघी पूर्णिमा 27 को, करें यह कार्य

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान और स्नान करने से बत्तीस गुना फल की प्राप्ति होती है, इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है। पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु और चंद्रदेव को समर्पित की जाती है। यह तिथि बेहद शुभ मानी गई है।

By: Rajesh

Published: 25 Feb 2021, 10:58 PM IST

#magh purnima
झुंझुनूं. वर्षों बाद इस बार माघी पूर्णिमा पर शनिवार का विशेष संयोग बना है। यह पावन तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन स्नान दान के साथ व्रत उपवास करना विशेष फलदाई बताया गया है। जो श्रद्धालु पिछले एक माह से नियमित माघ स्नान कर रहे हैं उनका समापन की 27 फरवरी को माघी पूर्णिमा के साथ हो जाएगा।
पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि चंद्रमा के पूर्ण रूप में आने वाली तिथि को ही पूर्णिमा कहते हैं। यह तिथि हर माह में पड़ती है। ऐसे में इस बार माघ मास की पूर्णिमा तिथि 27 फरवरी, शनिवार को पड़ रही है। हिंदू धर्म में माघ मास की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान और स्नान करने से बत्तीस गुना फल की प्राप्ति होती है, इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है। पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु और चंद्रदेव को समर्पित की जाती है। यह तिथि बेहद शुभ मानी गई है।

#magh purnima


ऐसा करें
इस दिन स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु का पूजन, पितरों का श्राद्ध और जरूरतमंदों को दान करने का विशेष फल है। भोजन, वस्त्र,तिल, कंबल, गुड़, कपास, घी, लड्डू, फल, अन्न, पादुका आदि का दान करना चाहिए।
पति-पत्नी को गाय के दूध से चंद्रमा को अघ्र्य देना चाहिए। इससे दंपत्य जीवन सुखमय रहता है।

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धूमधाम से मनाई विश्वकर्मा जयंती
झुंझुनूं. शहर के कारूंडिया रोड स्थित खातियों की बगीची स्थित विश्वकर्मा मंदिर में गुरुवार को समाज के लोगों ने भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना कर प्रसाद वितरण किया और विश्व कल्याण की कामना की। शाम को भण्डारे का आयोजन किया गया। पंडित सुशील मिश्रा के सानिध्य में समाज के लोगों ने विश्वकर्मा के प्रसाद का भोग लगाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान वक्ताओं ने समाजहित में अपनी भागीदारी निभाते हुए व्याप्त बुराईओं के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए कहा। इस दौरान अखिल भारतीय जांगिड़ ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष श्रवण कुमार जांगिड़, जांगिड़ समाज विकास समिति अध्यक्ष बनवारी लाल जांगिड़, मंदिर कमेटी अध्यक्ष प्रभुदयाल, नवल किशोर बंदूकिया, हरिकिशन, विक्रम, कैलाश बंदूकिया, रवि, राकेश बंदूकिया, अमित कुमार, जगदीश प्रसाद, रमेश कुमार, लादुराम, बाबुलाल, शिवकुमार, मनरूप, श्यामलाल, दयानन्द, भागीरथ प्रसाद समेत समाज के लोग मौजूद रहे।

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