अब मेडिकल स्टोर पर इन दवाओं को खरीदने के लिए देनी होगी निजी जानकारी

अब मेडिकल स्टोर पर इन दवाओं को खरीदने के लिए देनी होगी निजी जानकारी

Vishwanath Saini | Publish: Feb, 09 2018 02:53:36 PM (IST) Jhunjhunu, Rajasthan, India

उन्हें रोगी के सम्बंध में पूरी जानकारी का रिकोर्ड रखना होगा।

झुंझुनूं.

मेडिकल स्टोर संचालकों को अब टीबी की दवाओं के लिए अलग से रजिस्टर रखना होगा।जिसमें उन्हें रोगी के सम्बंध में पूरी जानकारी का रिकोर्ड रखना होगा। पूरी कवायद का मकसद छिपे हुए टीबी रोगियों को सामने लाकर 2020 तक देश को टीबी मुक्त करना है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो सरकारी के बजाए कई लोग निजी चिकित्सालयों में उपचार करवाते हैं। मेडिकल स्टोर संचालकों की ओर से इन रोगियों का अलग से रिकोर्ड नहीं रखने से टीबी रोगियों के बारे में पता नहीं चल पाता है। लेकिन औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमावली 1945 के नियम 6 5 के अनुसार शिड्युल एच-1 के अंतर्गत आने वाली टीबी औषधियों के विक्रय का संपूर्ण विवरण खुदरा औषधि विक्रेता को अलग से एक रजिस्टर में इंद्राज करना होगा।


दवा के सेवन से फायदा
जिला क्षय विभाग के चिकित्सा अधिकारी डॉ. महेंद्र नागर ने बताया कि शिड्युल एच-1 के अंतर्गत आने वाली 13 टीबी औषधियों में रिफावुटिन, ईथामबुटोल, साईक्लोसिरिन, क्लोफाजीमिन, पैरा अम्यनोसेली सिलिक एसिड, रिफाम्पिसिन, पैराजिनामाईड, थाईसिटा जॉन, आईसोनाइजिड, लिवोफ्लोक्सिन, केनामाईसिन, केपरियो माईसिन, मोक्सी फ्लोम्सासिन सेवन कर मरीज क्षय रोग से मुक्ति संभव है।


यह देनी होगी जानकारी
मेडिकल स्टोर संचालकों को चिकित्सा विभाग की ओर से निर्धारित प्रपत्र में प्रत्येक टीबी रोगी का नाम, पिता का नाम, रोगी की उम्र, पूरा पता, मोबाइल नंबर, निजी स्तर पर उपचारित चिकित्सक का नाम व पता, रोगी को दी जाने वाली दवा का नाम, दवा के बैंच नंबर, दवा की संख्या व बिल नंबर की जानकारी देनी होगी।


निजी अस्पताल संचालक नहीं दे रहे सूचना
प्रदेश में एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान चलाकर टीबी के रोगियों की सही संख्या का पता लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।लेकिन निजी चिकित्सक उनके पास आने वाले लोगों की संख्या को दर्ज नहीं कर रहे हैं।जबकि नियम यह है कि रोगियों का उपचार करने वाले प्राइवेट चिकित्सकों को इनकी सूचना क्षय रोग विभाग को देना जरूरी है।दिलचस्प बात यह है कि अस्सी प्रतिशत से अधिक चिकित्सक विभाग को सूचना नहीं दे रहे हैं।इतना होने के बावजूद अधिकारियों की ओर से कार्रवाई करने में लापरवाही बरती जा रही है।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो जिलेभर के करीब 200 से अधिक निजी क्लिनिक हैं, जिनमें से करीब सौ चिकित्सक टीबी के मरीजों का उपचार कर रहे हैं। इसके बावजूद महज 15 क्लिनिक है जो सम्बंधित विभाग को सूचना विभाग को दे रहे हैं।


इनका कहना है...
मेडिकल स्टोर संचालकों को टीबी रोगियों के सम्बंध में निर्धारित प्रपत्र में सूचना देनी होगी। इससे रोगियों की वास्तविक संख्या का पता चलने से उपचार करने में आसानी होगी। -डॉ. नरोत्तम जांगिड़, जिला क्षय रोग अधिकारी झुंझुनूं।

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