आठ साल में झुंझुनूं के खेल विश्वविद्यालय में नहीं लगी आठ ईंट, अधिकारी उठा चुके लाखों रुपए

अगस्त 2013 में आरएएस अधिकारी परशुराम को पहला विशेषाधिकारी (ओएसडी) नियुक्त किया। इनके दस दिन बाद ही उनकी जगह किशोर कुमार को नया ओएसडी लगा दिया गया। इनके कार्यग्रहण करने से पहले इनका तबादला हो गया। इसकी जिम्मेदारी झुंझुनूं एडीएम को सौंपी गई। वहीं, राज्य सरकार ने एथलीट के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रामवतार जाखड़ को विवि का नया सलाहकार नियुक्त किया। कांग्रेस सरकार चली गई, लेकिन हमारा विवि धरातल पर नहीं आया। इस दौरान अपने चेहतों को सरकार ने वेतन/ भत्ते जरूर दिलाए।

By: Jitendra

Published: 07 Jul 2019, 02:21 PM IST

झुंझुनूं. आठ साल में तीन सरकार बदल गई।हर सरकार ने हमारे जिले के युवाओं को सपने दिखाए, लेकिनकिसी भी सरकार ने सपने पूरे नहीं होने दिए।नतीजा यह रहा कि हमारा खेल विश्वविद्यालय अभी कागजों से बाहर नहीं आया।खेलों में आगे जाने के लिए हमारे खिलाडिय़ों को अभी दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है। वर्ष 2011 में कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में निजी जनसहभागिता (पीपीपी) मोड में प्रदेश का पहला खेल विवि झुंझुनूं में खोलने की घोषणा की थी। लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो पाया। फिर दिसंबर 2012 में सरकार ने निकट के गांव दोरासर में प्रदेश का पहला सरकारी खेल विश्वविद्यालय खोलने की घेाषणा की।इस घोषणा के बाद खिलाडिय़ों में खुशी की लहर दौड़ गई। दोरासर गांव में चारागाह भूमि आवंटित होने के बाद जुलाई 2013 में डा. शैलेंद्रकुमार सिन्हा को खेल विश्वविद्यालय का प्रथम कुलपति नियुक्त किया गया। मगर वे यहां पर नहीं आए। इसके एक माह बाद फिर डॉ. एलएस राणावत को नया कुलपति लगाया गया। वे केवल एक बार झुंझुनूं आए। उन्होंने जयपुर से ही विवि चलाया।उन्होंने अपना पूरा वेतन उठाया। लेकिन राजस्थान वालों का अभी यह नहीं पता कि खेल विवि है कहां?

अगस्त 2013 में आरएएस अधिकारी परशुराम को पहला विशेषाधिकारी (ओएसडी) नियुक्त किया। इनके दस दिन बाद ही उनकी जगह किशोर कुमार को नया ओएसडी लगा दिया गया। इनके कार्यग्रहण करने से पहले इनका तबादला हो गया। इसकी जिम्मेदारी झुंझुनूं एडीएम को सौंपी गई। वहीं, राज्य सरकार ने एथलीट के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रामवतार जाखड़ को विवि का नया सलाहकार नियुक्त किया। कांग्रेस सरकार चली गई, लेकिन हमारा विवि धरातल पर नहीं आया। इस दौरान अपने चेहतों को सरकार ने वेतन/ भत्ते जरूर दिलाए।


भाजपा ने यह किया
कांग्रेस के बाद भाजपा की सरकार आई। उन्होंने सपना दिखाया खेल विवि तो छोटा होता है हम तो तो पटियाला की तर्ज पर राष्ट्र स्तर का खेल संस्थान बनाएंगे। जहां राजस्थान ही नहीं पूरे देश के खिलाड़ी तैयार होंगे।इस घोषणा के बाद फिर उम्मीद जगी की देरी से ही सही हमारा खेल विवि हमें मिलेगा। पांच साल में भाजपा सरकार भी चली गई, लेकिन हमारे खेल विवि के लिए कुछनहीं हुआ।

 

अब फिर कांग्रेस से आस
भाजपा सरकार जाने के बाद अब कांग्रेस की सरकार फिर आई है। पहले भी कांग्रेस सरकार के समय ही खेल विवि की घोषणा 2011 में हुई थी।इसके लिए झुंझुनूं के निकट कुलोद ग्राम पंचायत के राजस्व गांव दोरासर में 50.58 हैक्टेयर जमीन चिह्नित की गई। चिह्निकरण के बाद जमीन भी आवंटित कर दी गई। आवंटित जमीन पर खेल एकेडमी को लेकर कोई गतिविधि नहीं हुई। वर्तमान में यहां पर केवल कंटीली झाडिय़ों के अलावा कुछ भी नहीं हैं।

Jitendra Reporting
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