92 साल पहले चूडी चतरपुरा गांव में रोड लाइट के लिए लंदन से लाए थे जनरेटर

जनरेटर को संचालित करने के लिए पेट्रोल या डीजल नहीं डाला जाता था। बस, जीप व अन्य वाहनों के इंजन ऑयल खराब होने पर बाहर निकाला जाता है। उस वेस्ट ऑयल को जरनेटर इंजन में डालकर संचालित किया जाता था। इस जनरेटर को पानी निकालने के लिए कुआं की मोटर चलाने तथा बिजली बनाने के लिए चलाया जाता था।

By: Rajesh

Published: 27 Nov 2020, 06:03 PM IST

मंडावा(झुंझुनूं) मंडावा से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित चूड़ी चतरपुरा गंाव में आजादी से पहले रोड लाइट थी। ग्रामीणों को बिना रुपए खर्च किए नल से मीठा पानी मिलता था। गांव में रात्रि को जनरेटर की बिजली से रोशनी होती थी। जनरेटर और बिजली की रोशनी देखने दूर-दूर से लोग आते थे। जब राजस्थान के बडे शहरों/कस्बों में रोड लाइट नहीं होती थी तब आज से करीब 92 वर्ष पहले चूड़ी चतरपुरा गांव के मार्ग रात को भी जगमग रहते थे। इस बात पर ग्रामीणों को अभी भी गर्व है।

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सेवानिवृत शिक्षक हरिप्रसाद टेलर व पूर्व सरपंच गिरवर सिंह शेखावत ने बताया कि गांव के विकास में सेठ शिवनारायण नेमानी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। नेमानी ने सन् 1928 में नि:शुल्क बिजली व जल योजना शुरू की थी। संपूर्ण गांव के चोराहों व बस्ती के रास्तों में बिजली के खंभे खड़े किए, उन पर रात्रि में जनरेटर की बिजली से रोशनी होती थी। कई विद्यार्थी रात्रि में बिजली के खंभे की रोशनी में पढ़ते थे। उस समय मंडावा व मुकुंदगढ़ जैसे शहरों में भी बिजली नहीं थी। दूर दूर से लोग जनरेटर की रोशनी को देखने के लिए आते थे। कुआं से पानी निकालने तथा बिजली उत्पादन करने के लिए लंदन से जनरेटर मंगवाया था। लंदन कंपनी का लोगो अंकित जनरेटर साक्ष्य के रूप में आज भी एक भवन में सुरक्षित है। हालांकि बिजली के खंभे उखड़ गए हंै। आजादी के कुछ साल बाद जनरेटर की बिजली सप्लाई बंद हो गई। जबकी बिजली आने के बाद जनरेटर की जगह बिजली से कोठी कुआं का पानी प्याऊ गांव में सप्लाई होता है। जो शिवनारायण बक्सीराम चेरिटी ट्रस्ट द्वारा आज भी जारी है। वहीं 1960 के आस-पास गांव में सरकारी बिजली आने पर जनरेटर को बंद कर दिया गया।

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वेस्ट ऑयल से चलता था जनरेटर:-
ट्रस्ट के व्यवस्थापक बुद्धकरण ने बताया कि जनरेटर को संचालित करने के लिए पेट्रोल या डीजल नहीं डाला जाता था। बस, जीप व अन्य वाहनों के इंजन ऑयल खराब होने पर बाहर निकाला जाता है। उस वेस्ट ऑयल को जरनेटर इंजन में डालकर संचालित किया जाता था। इस जनरेटर को पानी निकालने के लिए कुआं की मोटर चलाने तथा बिजली बनाने के लिए चलाया जाता था।

हवेलियां व मंदिरों का गांव :-
गांव में नेमाणी हवेली, नेमाणी बैठक, केजड़ीवाल हवेली, सर्राफा की हवेली, नेमानी शिव मंदिर, कोठी, टिबड़ेवाल हवेली सहित दो दर्जन से अधिक हवेलियां है। मगन टेलर ने बताया कि हवेलिया स्थापत्य कला का नमूना तथा भिति चित्रों से ओतप्रोत है। इसके अलावा विश्वकर्मा मंदिर, जमवाय माता मंदिर, शक्ति मांजी मंदिर, राणी सती, श्रीगणेश मंदिर, श्याम मंदिर, मुरली मनोहर मंदिर, वीर पंख बालाजी, पाठणसा माता मंदिर सहित अनेक मंदिर है। कई भव्य हवेली व मंदिर पर्यटक स्थल बन गए हैं। जिसके कारण विदेशी पर्यटक यहां हवेलियां व मदिर देखने आते हैं।

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गांव का इतिहास :-
पूर्व पंस सदस्य रणवीर सिंह व प्रभाकर व राजेन्द्र कुलहरी ने बताया कि सर्वप्रथम गांव का नाम चूड़ी जोधा था। बाद में गांव नाम चूड़ी चतरपुरा हो गया गांव में चिकित्सा व शिक्षा सुविधा सौ वर्ष से हैं। ट्रस्ट के अनुसार नेमानी ने सन् 1922 में अस्पताल शुरू किया था। चेरिटी ट्रस्ट ने 90 साल तक संचालन के बाद सरकार दान कर दिया। अब राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के रूप में संचालित है। (विक्रम संवत-1965) सन् 1908 में स्थापित नेमानी उमावि आज भी संचालित है। राजकीय नेमानी बालिका उमावि, गुरू निकेतन स्कूल, बैंक, पशु चिकित्सालय, पटवार घर, राजीव गांधी सेवा केन्द्र, बिजली व पानी की सुविधा है।

समस्याएं:-
ग्रामीणों ने बताया कि गंदे पानी की निकासी के अभाव में नालियों का गंदा पानी सड़क व आम रास्तों एकत्र होने से लोग परेशान हैं। कई जगह सड़क क्षतिग्रस्त हो गई। कहीं सड़क कार्य अधूरा पड़ा है।

फैक्ट फाइल:-
2011 के अनुसार
जनसंख्या-4657
औसत साक्षरता दर-61.9 प्रतिशत
कुल घर-845
कूल भूमि-857 हैक्टेयर
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