संत आसाराम के फैसले के मद्देनजर पुलिस व खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर

संत आसाराम पर बुधवार को जोधपुर राजस्थान में फैसला सुनाया जाएगा। ऐहतियाती कदम के तौर पर जिला पुलिस तथा खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर हैं।

By: शंकर शर्मा

Published: 25 Apr 2018, 12:58 AM IST

सुरेन्द्र कुमार

जींद। नाबालिग से दुष्कर्म केस में संत आसाराम पर बुधवार को जोधपुर राजस्थान में फैसला सुनाया जाएगा। ऐहतियाती कदम के तौर पर जिला पुलिस तथा खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर हैं। हालांकि जिले में आसाराम अनुयायियों का गांव निर्जन से मांडी की तरफ जाने वाले रास्ते पर एकमात्र आश्रम है और अनुयायी भी कम हैं। फिर भी ऐतिहात के तौर पर लगातार नजर रखी जा रही है। ताकि फैसले के बाद किसी भी हालात से निपटा जा सके।

नाबालिग से दुष्कर्म केस में संत आशाराम को बुधवार को जोधपुर राजस्थान अदालत में सजा सुनाई जानी है। आशाराम पर आरोप है कि मध्यप्रदेश छिंदवाड़ा आश्रम में पढऩे वाली 12वीं कक्षा की छात्रा को ईलाज के बहाने जोधपुर के मणई आश्रम में बुलाकर 14 अगस्त 2013 को दुष्कर्म किया। एक सितंबर 2013 से आसाराम जोधपुर जेल में बंद है ओर मामले की सुनवाई सात अप्रैल 2018 को पूरी हो चुकी थी। फैसला 25 अप्रैल को सुनाया जाना है। फैसले के मध्यनजर हालातों से निपटने के लिए पुलिस को अलर्ट पर रखा गया है। उसी अलर्ट के चलते जिला पुलिस तथा खुफिया एजेंसियों ने जिले के एकमात्र आश्रम तथा अनुयायियों पर चौकसी बढ़ा दी है।


सात साल पहले गांव निर्जन के निकट मांडी रोड पर बना था आश्रम-
संत आसाराम समर्थकों ने सात साल पहले गांव निर्जन से मांडी की तरफ जाने वाले लिंक रोड पर आश्रम का निर्माण किया था। जिसे योग वेदांता सेवा समिति संचालित करती है। संत आसाराम का जिले में यह एकमात्र आश्रम है। हालांकि आश्रम में सत्संग होता रहता है, समर्थक भी ज्यादा नहीं है जो सत्संग के दौरान आते जाते रहते हैं। बहुत कम लोगों को आश्रम के बारे में जानकारी है। सड़क से हटकर एकांत में बने आश्रम में केवल अनुयायी ही आते जाते हैं। आश्रम की देखरेख के लिए कमेटी का गठन भी किया गया है।

गलत फंसाया गया संत आसाराम को
आसाराम के अनुयायी तथा आश्रम कमेटी के सदस्य लक्ष्मण दास ने बताया कि आसाराम को गलत तरीके से फंसाया गया है। उनके जेल में जाने के बाद भी यहां पर सत्संग का आयोजन होता है। वे कानून व्यवस्था में विश्वास रखते हैं, हिंसा के खिलाफ है। उन्होंने आशा जताई की संत आशाराम बरी होंगे।

पुलिस अधीक्षक डा. अरूण सिंह ने बताया कि संत आसाराम के फैसले के मध्यनजर चौकसी बरती जा रही है। हालांकि अनुयायी भी कम हैं, ऐसा कोई इनपुट नहीं मिला कि व्यवस्था खराब हो। फिर भी विशेष चौकसी बरती जा रही है और नजर रखी जा रही है।

शंकर शर्मा
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