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बच्चों पर बढ़ा साइबर अटैक, दर्ज मामले 400 गुणा, ‘चुप्पी’ में ही फंसे हजारों केस

जोधपुर. लाडनूं में मोबाइल गेम की लत में 16 साल के बच्चे ने 12 साल के चचेरे भाई की हत्या की...हनुमानगढ़ जिले में नशा मुक्ति केन्द्र भेजने से नाराज किशोर ने माता-पिता की हत्या कर दी...जोधपुर में अक्सर उदास रहने के बाद एक नाबालिग ने आत्महत्या कर ली...। इस माह प्रदेश की यह तीन घटनाएं इशारा कर रही है कि बच्चे साइबर क्राइम के साथ ही मनोरोग की दलदल में जा रहे हैं।

जोधपुर

Published: December 27, 2021 12:18:06 pm

- साइबर अटैक से बच्चे मनोरोग के शिकार, बढ़ रहे हैं आत्महत्या के मामले
- देश में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक तक 22 करोड़ बच्चे हैं अध्ययनरत

सिकन्दर पारीक
जोधपुर. लाडनूं में मोबाइल गेम की लत में 16 साल के बच्चे ने 12 साल के चचेरे भाई की हत्या की...हनुमानगढ़ जिले में नशा मुक्ति केन्द्र भेजने से नाराज किशोर ने माता-पिता की हत्या कर दी...जोधपुर में अक्सर उदास रहने के बाद एक नाबालिग ने आत्महत्या कर ली...। इस माह प्रदेश की यह तीन घटनाएं इशारा कर रही है कि बच्चे साइबर क्राइम के साथ ही मनोरोग की दलदल में जा रहे हैं। निराशाजनक माहौल उन्हें आत्महत्या की तरफ धकेल रहा है। देश में बच्चों पर साइबर अटैक के मामले 400 गुणा बढ़े हैं। एक वर्ष में ही देश में 1102 मामले दर्ज हुए हैं।
बच्चों पर बढ़ा साइबर अटैक, दर्ज मामले 400 गुणा, ‘चुप्पी’ में ही फंसे हजारों केस
बच्चों पर बढ़ा साइबर अटैक, दर्ज मामले 400 गुणा, ‘चुप्पी’ में ही फंसे हजारों केस
राजस्थान में दो वर्ष पहले 2 का आंकड़ा बढकऱ अब 24 हो गया। हजारों ऐसे मामले भी हैं, जो पुलिस के पास तो दूर माता-पिता की जानकारी में भी नहीं हैं। अश्लील सामग्री परोसने के अलावा साइबरबुलिंग का सर्वाधिक शिकार 13 से 18 वर्ष तक के किशोर हैं।

इसलिए बच्चों पर साइबर अटैक


कोविड-19 के बाद ऑनलाइन पढ़ाई में स्मार्ट फोन के उपयोग के बाद साइबर अटैक बढ़े हैं। देश में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक तक 21 करोड़ 70 लाख 55 हजार 608 बच्चे नामांकित हैं। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 85 लाख 17 हजार 638 और निजी में 80 लाख 88 हजार 828 बच्चे नामांकित हैं। यानी सीधा-सीधा टारगेट देश के करीब 22 करोड़ बच्चे हैं। स्मार्ट कक्षाओं की संख्या भी बढ़ी है। प्रदेश में 2020 में प्रारंभिक स्कूलों में 59 और माध्यमिक तक 3231 स्मार्ट कक्षाएं थी, जो इस वर्ष क्रमश: 135, 5374 हो गई।

एक दिन में 31 बच्चों की मौत


वर्ष 2020 में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों में आत्महत्या का ग्राफ बढ़ा है। वर्ष 2018 में 9431, 2019 में 9613 से बढकऱ 2020 में आंकड़ा 11396 पहुंच गया। एक अनुमान के अनुसार 2021 में प्रतिदिन करीब 31 बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं।

यह है साइबरबुलिंग


सोशल मीडिया के चैट रूम में बच्चों को धमकाया जाता है। अभद्र भाषा, चित्रों और धमकियों से इंटरनेट पर किसी को परेशान करना साइबर बुलिंग की श्रेणी में आता है। ट्रोल करना, दूसरे की पहचान का इस्तेमाल, निजी फोटो या बात सार्वजनिक करना या फिर अश्लील फोटो या वीडियो भेजना, इस श्रेणी में आते हैं।

बच्चे यों करें
- सोशल मीडिया पर कोई तंग कर रहा है तो तत्काल माता-पिता को बताएं
- निजी जानकारियां साझा नहीं करें
- बुली की पहचान कर उसे ब्लॉक करें लेकिन आक्रामक जवाब कभी नहीं दें
- उसके मैसेज को सलेक्ट और सेव करें, जो कानूनी रूप से मददगार बनेंगे

अब तक ये प्रयास
- बाल यौन सामग्री परोसने पर पांच वर्ष की सजा व जुर्माना
- बच्चों को अवसाद से निकालने के लिए राष्ट्रीय टोल फ्री नम्बर 8448440632 जारी
- सीबीएसई की ओर से टेली-काउंसलिंग
- टवीट्र पर साइबर दोस्त की मदद
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल
- प्रदेश में रेंज एवं जिला स्तर पर साइबर क्राइम प्रकोष्ठ का गठन।
- राज्य में साइबर क्राइम प्रिवेंशन अगेंस्ट वूमेन एण्ड चाइल्ड लैब संचालित

एक तिहाई बच्चे उत्पीडि़त
साइबर अपराधी अच्छे से जानते हैं कि पहली बार ऑनलाइन में प्रवेश के दौरान व्यक्तिगत जानकारियां साझा करने में बच्चे क्या गलती करते हैं। एक सर्वे के अनुसार एक तिहाई बच्चे साइबर बदमाशी से लगातार उत्पीडऩ का शिकार हुए हैं। जोधपुर में एक लडक़ी के ऑनलाइन क्लास से नम्बर लेकर सहपाठी ने उसके व्यक्तिगत मुद्दों व फोटो को पोस्ट करना शुरू कर दिया। लडक़ी इतनी परेशान हुई कि छह माह के लिए खुद को पढ़ाई से ही दूर कर लिया। उसकी तीन बार काउंसलिंग कर मुख्यधारा में लाया गया। कई छात्रों के पास इन दिनों अपने फोन, टैबलेट या लैपटॉप में एक डेस्कटॉप वेबकैम या कैमरा रहता है, हैकर्स वेबकैम के रिमोट एक्सेस और नियंत्रण प्राप्त करते हैं।
डॉ. प्राची गौड़, फाउंडर व सीइओ, रिमार्केबल एजुकेशन

बच्चे डरे नहीं, तत्काल बताएं
ऑनलाइन एजुकेशन के साथ बच्चों पर साइबर अटैक के मामले बढ़े हैं। विद्यार्थी सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की व्यक्गितगत जानकारी शेयर करने से बचें। साइबरबुलिंग या अश्लील मैसेज का शिकार होने पर अभिभावकों को बताएं। निकटवर्ती पुलिस थाने, कन्ट्रोल रूम से तुरंत सम्पर्क करें। बिल्कुल भी नहीं घबराएं। पुलिस मित्रवत सहयोग करेगी।
भुवन भूषण यादव
पुलिस उपायुक्त (पूर्व) जोधपुर

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