बस में 91 पाक विस्थापित रोके,एजेंटों के मार्फत पाकिस्तान जाने की आशंका

-एफआरओ को सूचना दिए बगैर स्वदेश के लिए जा रहे थे वाघा बॉर्डर
- दो साल पूर्व आए थे भारत, कईयों के परिजन पाकिस्तान में फंसे हैं तो कईयों को रोजगार-सुविधा नहीं मिली
- सीआइडी जोन ने शुरू की जांच

By: Vikas Choudhary

Published: 20 Sep 2021, 01:17 AM IST

Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

जोधपुर.
एफआरओ को सूचना किए बगैर पाकिस्तान लौटने के लिए बस में वाघा बॉर्डर जा रहे 91 पाक विस्थापितों को करवड़ थाना पुलिस ने रविवार को रोक लिया। रोजगार के संसाधन व अन्य सुविधाएं न मिलने और पारिवारिक कारणों से यह विस्थापित किन्हीं एजेंटों के मार्फत वाघा बॉर्डर होकर पाकिस्तान लौटने निकले थे, लेकिन एफआरओ को सूचित न करने की वजह से इन्हें रोका गया।

सूत्रों के अनुसार करीब दो साल पहले पाकिस्तान से बड़ी संख्या में विस्थापित सीमा पार से भारत आए थे। जो धार्मिक यात्रा पर लॉंग टर्म वीजा लेकर आए थे। कइयों के पास पर्यटन वीजा भी था। इनके परिवार के कुछ लोग पाकिस्तान में हैं। वे भी भारत आने वाले थे, लेकिन लॉक डाउन व कोरोना की वजह से आ नहीं पाए।
उधर, लॉक डाउन की वजह से भारत आए पाक विस्थापितों को न तो पर्याप्त रोजगार मिला और न ही सरकार की तरफ से सुविधाएं मुहैया कराई गईं। परिवार के बाकी सदस्य भी पाकिस्तान में हैं। ऐसे में जोधपुर में रहने वाले पाक विस्थापितों ने पाक लौटने का निर्णय किया। थार एक्सप्रेस बंद है। पाकिस्तान जाने के लिए सिर्फ वाघा बॉर्डर चालू है।

ऐसे में इन पाक विस्थापितों को सीमा पार कराने के लिए कुछ एजेंटों ने झांसे में लिया और एक बस में बिठाकर अटारी के लिए रवाना कर दिया। बगैर एफआरओ को सूचित किए पाक लौटने का पता लगा तो सीआइडी (जोन) ने करवड़ थाना पुलिस को सूचना दी।
पाक विस्थापितों की बस जैसे ही करवड़ थाने के सामने पहुंची तो पुलिस ने उसे रोक लिया। बस में महिलाओं व बच्चों के साथ 91 पाक विस्थापित सवार थे। सीआइडी जोन के अधिकारी करवड़ थाने पहुंचे और सभी के नाम व पते नोट कर जांच शुरू की। सभी से पूछताछ की जा रही है।

कपास की फसल कटाई करने का बताकर निकले
पाक विस्थापितों के लिए कार्य करने वाले भागचंद भील का कहना है कि पाक से बड़ी संख्या में आए विस्थापित जोधपुर के आस-पास गंगाणा, कालीबेरी, गोकुलजी की प्याऊ व अन्य क्षेत्रों में रह रहे हैं। करवड़ थाना पुलिस ने बस में जिन विस्थापितों को रोका था उनमें से अधिकांश लोग चोरी-छुपे निकले थे। बस्ती में साथ रहने वालों को कपास की फसल कटाई करने का बताकर रवाना हुए थे।

रोजगार नहीं मिला, परिवार भी अलग-अलग हो गए
पाकिस्तान जाने की फिराक में रोके 91 जने प्रताडऩाओं से परेशान होकर भारत आए थे। अधिकांशत: थार एक्सप्रेस से आए थे। जो अब बंद है। परिवार के कुछ सदस्य पाकिस्तान में ही रह गए थे। इन्हें भी भारत आना था, लेकिन कोरोना की वजह से आ नहीं पाए। परिवार के सदस्य अलग-अलग हो गए। भारत में रोजगार भी नहीं मिला। यही वजह है कि यह पाक विस्थापित वापस लौटने की फिराक में थे।

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