गरीब जनता के गेहूं पर यूं रसद अधिकारियों ने जमाई कुंडली, एसीबी कार्रवाई में सच सामने आने पर हुए भूमिगत

Vikas Choudhary

Publish: Jan, 14 2018 10:44:57 AM (IST)

Jodhpur, Rajasthan, India

निर्मला मीणा की गिरफ्तारी के लिए ब्यूरो ने अभी प्रयास नहीं किए हैं, लेकिन ब्यूरो का मानना है कि वो भी गायब है

जोधपुर . तत्कालीन जिला रसद अधिकारी व अन्य ने आठ करोड़ रुपए का पैंतीस हजार क्विंटल गेहूं गबन करने के लिए न सिर्फ एक साथ तैंतीस हजार परिवार नए जुडऩा बताया था, बल्कि अतिरिक्त आवंटित पैंतीस हजार क्विंटल गेहूं राशन डीलर के फर्जी हस्ताक्षर कर कागजों में सप्लाई कर दिए थे। जबकि हकीकत में इन राशन डीलर तक गेहूं पहुंचा ही नहीं था। गरीबों के हिस्से का गेहूं आटा मिल सप्लाई किया गया था, जहां से वह बाजार में बेच दिया गया था। तत्कालीन जिला रसद अधिकारी व निलम्बित आईएएस निर्मला मीणा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद शनिवार को चार एेसे राशन डीलर ब्यूरो के समक्ष पेश हुए और उन्होंने जांच में सहयोग करते हुए बयान दर्ज कराए। उधर, एसीबी ने निलम्बित आईएएस मीणा के अलावा अन्य तीनों आरोपियों के ठिकानों पर छापे मारे, लेकिन वे पकड़ में नहीं आए।

 

पुलिस अधीक्षक (एसीबी) अजयपाल लाम्बा ने बताया कि प्रकरण में आरोपी लिपिक अशोक पालीवाल, आटा मिल का संचालक स्वरूपसिंह राजपुरोहित व ठेकेदार सुरेश उपाध्याय की तलाश करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। उनके ठिकानों पर दबिशें दी गईं, लेकिन भूमिगत होने से कोई पकड़ में नहीं आया। उधर, निर्मला मीणा की गिरफ्तारी के लिए ब्यूरो ने अभी प्रयास नहीं किए हैं, लेकिन ब्यूरो का मानना है कि वो भी गायब है।

 

गबन के आरोपियों पर शिकंजा कसा


ब्यूरो का कहना है कि ३५०२० क्विंटल गेहूं का वितरण कागजों में राशन डीलर को किया गया था। जबकि वास्तविकता में यह गेहूं डीलर के फर्जी हस्ताक्षर कर के कागजों में ही सप्लाई कि या गया था। चार एेसे डीलर ब्यूरो के पास पहुंचे और इस बारे में तत्कालीन डीएसओ व अन्य के खिलाफ बयान दिए। इनके अलावा भी कई डीलर्स ने ब्यूरो से सम्पर्क कर जांच करने में सहयोग का भरोसा दिलाया है। इन डीलर के बयान दर्ज होने के बाद ब्यूरो के पास निलम्बित आईएएस निर्मला मीणा के खिलाफ और ठोस प्रमाण हो गया है। इससे मीणा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

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