वायुसेना दिवस विशेष- पाक के सामने जोधपुर का लॉयन, 8 मिनट में बॉर्डर पर गूंज सकती है दहाड़

- जोधपुर में लड़ाकू विमान सुखोई की एकमात्र स्क्वाड्रन, मिग-27 की दोनों स्क्वाड्रन रिटायर
- अब रफाल की तीसरी स्क्वाड्रन और तेजस स्क्वाड्रन में आने की उम्मीद

By: Jay Kumar

Published: 08 Oct 2020, 06:53 PM IST

जोधपुर. देश के सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जोधपुर वायसुेना स्टेशन पर इन दिनों लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई की एकामात्र स्क्वाड्रन बची है। स्क्वाड्रन का नाम लॉयन है और इसे संचालित करने वाले डेजर्ट वारियर कहलाते हैं। फाइटर पायलट्स का कहना है उनका लॉयन 8 मिनट में पाकिस्तान के सामने बॉर्डर पर दहाड़ सकता है। पिछले साल भारतीय वायुसेना की ओर से पाक अधिकृत कश्मीर के बालाकोट में की गई एयर स्ट्राइक के समय जोधपुर से सुखोई विमानों ने उड़ान भरकर गुजरात से राजस्थान सीमा तक पहरा दिया था। लॉयन का साथ देने के लिए वायुसेना अब रफाल अथवा तेजस को भेज सकती है। भारत ने फ्रांस से रफाल की फिलहाल दो स्क्वाड्रन खरीदी है जो हरियाणा के अंबाला और पश्चिमी बंगाल के हाशिमाना एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात की जाएगी। तीसरी स्क्वाड्रन आने पर उसका घर जोधपुर होगा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा तैयार स्वदेशी तेजस भी भारतीय वायुसेना में शामिल हो गया है।

गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना की आेर से हर साल 8 अक्टूबर को वायुसेना दिवस का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर देशभर में वायुसेना के विभिन्न एयरबेस पर कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

कराची के एफ-16 व जेएफ-17 पर भारी

जोधपुर के सामने पाकिस्तान का कराची एयरफोर्स स्टेशन है जहां अमरीकी लड़ाकू विमान एफ-16 और चीनी जेएफ-17 लड़ाकू विमान तैनात है। सुखोई-30 इन दोनों पर भारी है। बालाकोट हमले के समय एफ-16 को विंग कमाण्डर अभिनंदन वद्र्धमान ने मिग-21 से ही मार गिराया था, जबकि जेएफ-17 सिंगल इंजन एयरक्राफ्ट है जिसकी गति 1.6 मैक है। सुखोई-30 के दो इंजन और 2 मैक की गति इसे कहीं अधिक ताकतवर बनाती है।

कभी 4 स्क्वाड्रन थी जोधपुर में
जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर लड़ाकू विमानों की 4 स्क्वाड्रन हुआ करती थी। कुछ साल पहले लड़ाकू विमान मिग-21 की स्क्वाड्रन बाड़मेर भेज दी गई। मिग-27 अपगे्रडेड की दो स्क्वाड्रन थी। मिग-27 की स्क्वाड्रन संख्या-दस को डेजर्ट कहा जाता था जो फरवरी 2019 में रिटायर हो गई। मिग-27 की अन्य स्क्वाड्रन संख्या-27 स्कोर्पियन कहलाती थी। इसे दिसम्बर 2019 में अलविदा कह दिया गया। वर्तमान में सुखोई-30 की एकमात्र स्क्वाड्रन है, जिसका नाम लॉयन है।

सुखोई का साथ देने के लिए रुद्र
लड़ाकू विमानों के अलावा जोधपुर में दो हेलीकॉप्टर यूनिट है। एचएएल मार्क-1 रुद्र हेलीकॉप्टर की स्क्वाड्रन संख्या-116 और एमआई-17 हेलीकॉप्टर यूनिट की स्क्वाड्रन संख्या-117 यहां तैनात है। बीकानेर और जैसलमेर में दूरी अधिक होने पर बीच में फलोदी एयरबेस बनाया गया है जहां रुद्र हेलीकॉप्टर तैनात है। जोधपुर से आगे पश्चिमी सीमा पर बाड़मेर का उत्तरलाई, गुजरात का नलिया और बीकानेर का नाल एयरबेस है जहां मिग-21 बायसन तैनात है जो हमले के समय जोधपुर एयरबेस की सुरक्षा कर सकते हैं। जोधपुर एयरबेस पर आधुनिक मिसाइल सिस्टम भी है। यहां पिछोरा, सैम और ओएसए-एके मिसाइल तैनात है जिनकी रेंज अलग-अलग है।

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