जोधपुर की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे अपने ही गुरुकुल की नाबालिग से यौन दुराचार के आरोपी आसाराम मामले में सह अभियुक्त संचिता उर्फ शिल्पी की ओर से सजा स्थगन व जमानत आवेदन के लिए दायर याचिका पर बुधवार को समय की कमी की वजह से जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ में सुनवाई नहीं हो सकी। अब जस्टिस विजय विश्नोई की अदालत में २५ सितंबर को सुनवाई होगी।

शिल्पी पर आसाराम की राजदार और अपराध में सहयोग करने का आरोप है। इस केस में जज ने आसाराम के साथ साथ उसे भी सजा सुनाई थी। पिछली बार सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश बोड़ा व उनके सहयोगी निशांत बोड़ा ने बहस शुरू की थी, जो अधूरी रही थी। तब उन्होंने शिल्पी के पक्ष में पैरवी करते हुए चालान व सजा के आदेश में अंकित आईपीसी की धाराओं की व्याख्या करते हुए याचिकाकर्ता को दी गई सजा को चुनौती दी थी। वहीं शिल्पी के साथ आसाराम, पीडि़ता व उनके परिजनों के साथ हुए मोबाइल व लैंडलाइन फोन पर बातचीत का टैक्स्ट रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होने पर भी आपत्ति जताई थी। आज भी समय की कमी के कारण भी सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले में २५ सितंबर को अगली सुनवाई होगी। ध्यान रहे कि एससी एसटी कोर्ट के जज मधुसूदन शर्मा ने यौन उत्पीडऩ के मामले में 25 अप्रेल 2018 को शिल्पी व शरद को 20-20 साल की सजा देने के आदेश दिए थे। वहीं आसाराम को आजीवन कारावास की सजा देने के आदेश दिए गए थे।

 

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