सहायक मैनेजर ने एक शाखा में क्रेडिट कार्ड के 17 आवेदन किए थे, 6 खारिज हुए

- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में सहायक मैनेजर के एक करोड़ से अधिक गबन करने का मामला
- आरोपी सहायक मैनजर व रिश्तेदारों के एक दर्जन बैंक खाते सीज करवाए, आरोपी अभी भी गायब

सहायक मैनेजर ने एक शाखा में क्रेडिट कार्ड के 17 आवेदन किए थे, 6 खारिज हुए
जोधपुर।
यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया की दो शाखाओं से 5-5 लाख रुपए लिमिट वाले बीस से अधिक क्रेडिट कार्ड जारी करवाकर एक करोड़ से अधिक रुपए का गबन करने के मामले में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। निलम्बित सहायक मैनेजर ने यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया की सोजती गेट तकिया चांद शाह में क्रेडिट कार्ड के लिए 17 आवेदन किए थे। इनमें से 6-7 खारिज कर दिए गए थे। शेष कार्ड जारी करवाकर 5-5 लाख रुपए की लिमिट देकर सम्पूर्ण लिमिट काम में ले ली गई थी। गबन की राशि शेयर बाजार में निवेश करने की जानकारी सामने आई है। 60 लाख रुपए का नुकसान भी उसने गबन की राशि से भरा था। (Union Bank of India Scam)
थानाधिकारी थानाधिकारी मोहम्मद शफीक खान ने बताया कि गबन की जांच की जा रही है। बैंक ने आंतरिक जांच के बाद 1.65 करोड़ रुपए के गबन की जानकारी दी थी। अब बैंक प्रबंधन ने 1.44 करोड़ रुपए का गबन होने के बारे में अवगत कराया है। जांच पूरी होने पर गबन राशि में कमी या बढ़ोतरी हो सकती है। बैंक प्रबंधन ने घोटाले के संबंध में पुलिस को कुछ दस्तावेज उपलब्ध करवाए हैं। जबकि अभी कई और दस्तावेज मिलने बाकी हैं।
अब तक की जांच के बाद पुलिस ने गबन की राशि जिन-जिन बैंक खातों में जमा हुई थी। उन बैंक खातों को सीज करने की कार्रवाई शुरू की है। सहायक मैनेजर आकाश वर्मा के आधा दर्जन बैंक खाते और पिता, पत्नी, भाई व भाभी आदि रिश्तेदारों के नाम वाले आधा दर्जन से अधिक बैंक खाते सीज करवाए हैं।
आरोपी सहायक प्रबंधक आकाश वर्मा यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया की सोजती गेट तकिया चांद शाह और बासनी शाखा में पदस्थापित रहा था। इस दौरान उसने तकिया चांद शाह शाखा में क्रेडिट कार्ड जारी करवाने के लिए 17 आवेदन किए थे। जांच के बाद इनमें से 6-7 आवेदन खारिज कर दिए गए थे। शेष क्रेडिट कार्ड जारी कर 5-5 लाख रुपए की लिमिट भी दे दी गई थी। सहायक मैनेजर आकाश वर्मा ने इन क्रेडिट कार्ड की लिमिट राशि हड़प कर ली थी।
दो साल तक आंखें मूंदे रहा बैंक प्रबंधन
सहायक मैनेजर आकाश वर्मा ने पिछले दो साल में बीस से अधिक क्रेडिट कार्ड जारी करवाकर 1.44 करोड़ रुपए का गबन किया। क्रेडिट कार्ड से खरीदारी होने के बाद दो साल तक कोई राशि जमा नहीं करवाई गई थी। इस दौरान बैंक प्रबंधन भी आंखें मूंदे रहा था।
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