बार कौंसिल कार्यकारी समिति ने चेयरमैन के आदेशों को किया खारिज

jay kumar bhati

Updated: 14 Jul 2019, 07:41:19 PM (IST)

Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

वीडियो-जेके भाटी/जोधपुर. बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के चेयरमैन चिरंजीलाल सैनी और अधिकांश सदस्य आमने-सामने हो गए हैं। चेयरमैन ने शनिवार को कौंसिल सचिव पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उन्हें काम करने से रोकने और वरिष्ठ सदस्य जगमालसिंह चौधरी के वित्तीय व अन्य अधिकारों को वापस लिए जाने के आदेश ईमेल से भेजे थे, जिन्हें क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए कार्यकारी समिति ने खारिज कर दिया है। कार्यकारी समिति ने निर्णय लिया कि सचिव आरपी मलिक यथावत कार्य करते रहेंगे। इसके विपरीत कौंसिल के सदस्यों ने चेयरमैन पर ही कई आरोप लगा दिए।

कौंसिल कार्यालय में रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए उपाध्यक्ष जीडी बंसल, सह अध्यक्ष सैयद शाहिद हसन, राजेश पंवार, रामप्रसाद सिंगारिया सहित सदस्य जगमालसिंह चौधरी, नवरंगसिंह चौधरी, इंद्रराज चौधरी एवं सुनील बेनीवाल ने कहा कि कौंसिल चेयरमैन ने शनिवार को अपनी शक्तियों से बाहर आदेश दिए थे। ईमेल से भेजे गए इन आदेशों के बाद कार्यकारी समिति की बैठक बुलाई गई, जिसमें कार्यकारी समिति के अन्य सदस्यों सहित संजय शर्मा उपस्थित थे। विशेष आमंत्रित सदस्यों को भी बुलाया गया, जबकि अन्य सदस्य सुरेशचंद्र श्रीमाली, सुशील शर्मा, कुलदीप शर्मा, रतनसिंह राव, सचिन आचार्य एवं हरेन्द्रसिंह सिनसिनवार से टेलीफोन पर बैठक बुलाने और इसके निर्णयों के बारे में सहमति ली गई।

 

नियमों का हवाला देकर खारिज किए आदेश
बैठक में लिए गए निर्णयों का ब्यौरा देते हुए सदस्यों ने बताया कि चेयरमैन ने बिना किसी क्षेत्राधिकार के अपनी मनमानी एवं नियम विरूद्ध जाकर सचिव को कार्य करने से रोका। समिति का मानना है कि बार कौंसिल के सेवा नियम 34 एवं कार्य संचालन नियम 13(9) के अनुसार सचिव को पद से हटाने या कार्य करने पर रोक लगाने का अधिकार सिर्फ कार्यकारी समिति को है। चेयरमैन को ऐसा कोई अधिकार नहीं है। कार्यकारी समिति ही मुख्य प्रशासनिक बॉडी है। इस आधार पर चेयरमैन द्वारा ईमेल से भेजे गए सभी आदेश खारिज कर दिए गए। मलिक यथावत काम करते रहेंगे। कार्यकारी समिति ने 2 अक्टूबर, 2018 को दैनिक कार्यों के लिए जगमालसिंह चौधरी को अधिकृत किया था। चौधरी अपना दायित्व निभाते रहेंगे।

 

समिति ने नहीं माने थे चेयरमैन के मनमाने प्रस्ताव: सदस्य
सदस्यों ने कहा कि चेयरमैन सैनी एक हिन्दी-अंग्रेजी अनुवादक नियुक्त करना चाहते थे, लेकिन सदस्यों ने मना कर दिया। बाद में चेयरमैन दो लैपटॉप और अपने नाम से मोबाइल पर प्रेषित करने के लिए 5 लाख संदेश खरीदना चाहते थे, लेकिन कार्यकारी समिति ने इन दो प्रस्तावों को भी नहीं माना। इससे चेयरमैन नाराज हो गए। इस घटना के बाद से चेयरमैन सैनी सदस्यों व सचिव से नाराज चलने लगे और बैठक नहीं बुलाने से कौंसिल कई निर्णय नहीं ले पाई। सदस्यों ने 12 जुलाई को एक पत्र लिखकर समिति की बैठक बुलाने को कहा, लेकिन इसके विपरीत चेयरमैन ने ईमेल से मनमाने आदेश भेज दिए। सदस्यों ने बताया कि चेयरमैन, जो जयपुर में अतिरिक्त महाधिवक्ता भी है, ने अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए शनिवार को कौंसिल कार्यालय के बाहर पुलिस बल तैनात करवा दिया और कार्यालय सीज करने की धमकी दी। सदस्य नवरंगसिंह चौधरी ने सैनी को अतिरिक्त महाधिवक्ता पद से हटाने की मांग की है।

 

मुझे अधिकार है या नहीं, यह कोर्ट तय करेगा: सैनी
बार कौंसिल के अधिकांश सदस्यों की खुलकर खिलाफत और व्यक्तिगत आरोपों के बाद चेयरमैन सैनी ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट जाने का विचार कर रहे हैं। इस संबंध में चर्चा चल रही है, वहीं से तय हो जाएगा कि मुझे अधिकार है या नहीं। उन्होंने कहा कि लैपटॉप मैं व्यक्तिगत उपयोग के लिए नहीं खरीदना चाहता था, स्टाफ के लिए खरीदने का प्रस्ताव दिया था, ताकि जिला स्तर पर लगाए जा रहे शिविरों में स्टाफ को लैपटॉप पर काम करने की सहूलियत रह सके। एक चेयरमैन के लैपटॉप खरीदने का प्रस्ताव भी सदस्यों ने खारिज कर दिया। जहां तक बार कौंसिल कार्यालय में पुलिस भेजने और अतिरिक्त महाधिवक्ता पद का दुरुपयोग करने का आरोप है, मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि चेयरमैन होने के नाते वह मेरा कार्यालय है। मुझे वहां झगड़ा होने की सूचना मिली थी, जिस पर मैंने पुलिस को इत्तला दी थी। कोई सदस्य मुझे अतिरिक्त महाधिवक्ता पद से हटाने की मांग करता है तो यह उसका व्यक्तिगत विचार हो सकता है

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