हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में बाड़मेर की रूमादेवी की क्लास, गर्ल्स को सिखाई कशीदाकारी

-छात्राओं को समझाई कशीदाकारी की बारीकियां

जोधपुर/बाड़मेर. हार्वर्ड विश्वविद्यालय में बाड़मेर की कशीदाकारी और हस्तशिल्प कला के प्रमोशन को लेकर आयोजित क्राफ्ट वर्कशॉप में बड़ी संख्या में विवि के विद्यार्थियों ने रूचि दिखाई। विवि परिसर में आयोजित वर्कशॉप में बाड़मेर की रूमादेवी ने छात्राओं को कशीदाकारी की बारीकियां बताई।

राजस्थान के थार रेगिस्तान के हस्तशिल्प व संस्कृति की विशेषताओं पर पावर प्रजेंटशन के साथ कार्यशाला में कला पर प्रकाश डाला गया। कार्यशाला में छात्राओं ने कशीदाकारी को लेकर काफी उत्सुकता दिखाई। रूमादेवी ने उन्हें कला का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद विद्यार्थियों के एक समूह को एप्लिक व मिरर वर्क के लिए सामग्री देकर कशीदाकारी का अभ्यास करवाया गया।

सुई-धागों के साथ दिखाई कला
रूमादेवी की क्लास में छात्राओं ने फैब्रिक पर सुई-धागों के साथ कशीदाकारी करके भी दिखाई। कुछ बातें जो समझ में नहीं आई वे रूमादेवी से पूछी। कशीदाकारी में विवि की बड़ी संख्या में छात्राओं ने रूचि दिखाई।

घूमर की गूंज
कला के साथ यहां पर राजस्थान का वाणी गायन भी खूब गूंजा। परम्परागत गायन की कला से भी छात्राएं रूबरू हुई। वहीं बाद में घूमर नृत्य की गूंज तो पूरे विवि परिसर में सुनाई दिया। छात्राएं भी घमर पर खुद को रोक नहीं पाई।

आत्मीयता के कायल विद्यार्थी
रूमादेवी के आत्मीयता से बातचीत करने का तरीका और वर्कशॉप में छोटी से छोटी बात को भी सरल तरीके से बताने का अंदाज मानों सभी को भा गया। बिना किसी झिझक के छात्राओं ने कशीदाकारी की बारीकियां पूछी। छात्राओं के समूह उनके पास आते रहे और वे उनको फेब्रिक और कला की विशेषताएं समझाती रही। इसके बाद उन्होंने छात्राओं से पूछा कि क्यों न आप सीाी का टेस्ट हो जाए। वर्कशॉप में जो आपने सीखा है उसे फेब्रिक पर भी उतारा जाए। छात्राएं तो जैसे इसी का इंतजार कर रही थी।

राजस्थान की कला से करवाया रूबरू
कार्यशाला में राजस्थान की ढाणियों, वाणी गायन, घूमर नृत्य के साथ केर-सांगरी की विशेषताओं से विद्यार्थियों को रूबरू करवाया। वर्कशॉप में छात्राओं ने उत्साह के साथ भागीदारी की।

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Jay Kumar Photographer
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