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मारवाड़ी कॉर्डिया मिक्सा में मिले एंटी ऑक्सीडेंट, त्वचा रहेगी जवां

- काजरी के शोध में खुलासा

- गूंदे की सब्जी व अचार के सेवन से बुढ़ापा रहेगा दूर

 

By: M I Zahir

Published: 04 Apr 2019, 03:32 AM IST

Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

जोधपुर. मारवाड़ के मशहूर गूंदों की सब्जी बुढ़ापे को दूर रखने में मददगार साबित हो सकती है। पंचकूटे की सब्जी के पांच तत्वों में शामिल गूंदे (कॉर्डिया मिक्सा) में एंटी ऑक्सीडेंट्स मिले हैं जो शरीर में मौजूद हानिकारक तत्वों को खत्म कर कोशिकाओं की रक्षा करते हैं। यह खुलासा केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) द्वारा किए गए शोध में सामने आया है।

फिनोलिक यौगिक

गूंदे में फिनोलिक यौगिक मिले हैं जो एंटी ऑक्सीटेंट से भरपूर है। ये यौगिक शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को आक्रमण कर उनसे कोशिकाओं को बचाते हैं। पेस्टीसाइड्स युक्त सब्जी, फल, भूख से अधिक भोजन करने और उपापचयी क्रिया मंद होने से शरीर में फ्री रेडिकल्स पैदा होते हैं जो शरीर में बगैर किसी नियंत्रण के इधर-उधर घूमकर स्वस्थ कोशिकाओं को क्षति पहुंचाते हैं। उम्र बढऩे के साथ शरीर में नई कोशिकाओं के निर्माण की क्षमता कम हो जाती है और शरीर बूढ़ा होता जाता है। गौरतलब है कि पंचकूटे की सब्जी में गूंदे के अलावा केर, सांगरी, कुमट और सूखी लाल मिर्च शामिल है जो रेगिस्तान की सब्जी कही जाती है। ये पांचों सब्जी शुष्क व अद्र्ध शुष्क क्षेत्रों में होती है। गूंदे की सब्जी के अलावा इसका अचार भी मारवाड़ में खूब पसंद किया जाता है।

12 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन मिला

काजरी के उद्यानिकी प्रभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पीआर मेघवाल ने बताया कि गूंदे पर किए गए शोध में इसमें १२ प्रतिशत क्रूड प्रोटीन भी मिला है जो शरीर में प्रोटीन की कमी हो पूरा करता है। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीज और मॉलिब्डनम मिले हैं। ये चारों सूक्ष्म मात्रिक तत्व हैं जिनकी कमी से शरीर में विकार पैदा हो जाते हैं। गूंदा पाचन में भी मदद करता है।

बारिश व सर्दी में बगैर पानी होंगे गूंदे

गूंदे की फसल अपे्रल में बाजार में आ जाती है। डॉ. मेघवाल बताते हैं कि गूंदे की नई वैरायटी को तीन साल उगाने के बाद इसमें केवल तीन महीने पानी देकर फसल प्राप्त की जाती है। बारिश व सर्दी में पानी देने की आवश्यकता नहीं रहती। फरवरी के प्रथम सप्ताह से प्रति दस दिन के अंतराल पर पानी और प्रति पौधा बीस किलो कम्पोस्ट से फसल बेहतर होती है।

डायबिटिक के लिए भी फायदेमंद
गूंदा शरीर में शर्करा को नियंत्रित रखता है। इसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटीफंगल, एनालजेसिक और साइटोटॉक्सिक जैसे गुण भी होते हैं। एंटी ऑक्सीडेंट के गुण मिलने से अब इसका महत्व बढ़ गया है।

डॉ. ओपी यादव, निदेशक, काजरी जोधपुर

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