तीन साल की बच्ची ने जगाई ऐसी अलख, जून में बन गया देहदान का रिकॉर्ड, जून माह में हुए सर्वाधिक देहदान

तीन साल की एक नन्हीं सी बच्ची...। भले ही देहदान जैसे शब्द को नहीं समझती थी, लेकिन पिछले दिनों छह जून को उसके माता-पिता ने एम्स में देहदान कराया तो वह एक मिसाल बन गई।

By: Harshwardhan bhati

Published: 07 Jul 2019, 04:04 PM IST

राजेश दीक्षित/जोधपुर. तीन साल की एक नन्हीं सी बच्ची...। भले ही देहदान जैसे शब्द को नहीं समझती थी, लेकिन पिछले दिनों छह जून को उसके माता-पिता ने एम्स में देहदान कराया तो वह एक मिसाल बन गई। अब इसे संयोग कहें या फिर देहदान के प्रति जबरदस्त जागरूकता कि इस वर्ष का जून माह जोधपुर के ‘देहदान के इतिहास’ में एक अलग ही अलख जगा गया। जून अब तक सर्वाधिक देहदान का माह बन गया है। जून माह में एम्स व मेडिकल कॉलेज दोनों को मिलाकर कुल 11 देहदान हुए हैं।

यों तो जोधपुर शहर में पहला देहदान फरवरी 2004 में हुआ था। यह देहदान जोधपुर के चांदपोल स्थित पुरोहित का क्षेत्र में रहने वाले गोविन्द प्रकाश आर्य ने किया। इसके बाद देहदान का सिलसिला शुरू हो गया। हालांकि 2012 तक देहदान की रफ्तार धीमी रही। लेकिन 2013 से जोधपुर में देहदान कई परिवारों के लिए एक परम्परा ही बन गई है।

अब आगे बढकर दे रहे महत्व
इस कार्य में पूरी शिद्दत से जुटे एम्स व मेडिकल कॉलेज दोनों में देहदान के काउंसलर मनोज मेहता कहते हैं कि शुरू में तो लोगों को समझाने में काफी दिक्कतें आती थी, लेकिन अब लोग खुद आगे बढकर देहदान को महत्व दे रहे हैं। यह बदलाव अच्छा संकेत है। मेहता यह भी बताते हैं कि यदि कोई देहदान का संकल्प पत्र भरता है तो परिवार व समाज को प्रेरणा मिलती हैं, लेकिन किसी ने देहदान का संकल्प पत्र नहीं भरा है तो भी पारिवारिक सहमति से उसका देहदान किया जा सकता है।

3 से 95 वर्षीय तक का देहदान
देहदान में उम्र कोई बाधा नहीं होती। इसी माह छह जून को जहां तीन साल की एक छोटी बच्ची का उनके परिजनों ने देहदान कराया, वहीं 13 अप्रेल 2018 को 95 वर्षीय एक व्यक्ति का एम्स में देहदान हुआ।

पत्रिका ने चलाया था अभियान
राजस्थान पत्रिका ने जनवरी 2013 में ‘पत्रिका पहल: देहदान करो, हो जाओ अमर’ शीर्षक से अभियान चलाया था। इसके बाद जोधपुर शहर में देहदान का सिलसिला लगातार बढ़ता गया। वर्ष 2004 से 2012 तक यानी कुल आठ साल में 16 देहदान हुए थे, वहीं पिछले वर्ष 2018 में जोधपुर के 42 लोगों ने देहदान की अलख जगाई। इस वर्ष अब तक एम्स व मेडिकल कॉलेज में कुल 23 देहदान हो चुके हैं।

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