व्हाट्सएप ग्रुप में महिला पर ये टिप्पणी करना पड़ा भारी, पुलिस ने एडमिन के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा

Harshwardhan Bhati

Publish: Dec, 07 2017 03:36:47 (IST)

Jodhpur, Rajasthan, India

निचली अदालत ने की जमानत खारिज, अब हाईकोर्ट से मिली राहत

 

RP Bohra/जोधपुर. व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाकर सदस्य बनाना आसान है, लेकिन जब सदस्य एक-दूसरे पर छींटाकशी करने लगे, तो किस तरह ग्रुप एडमिन के लिए आफत हो जाती है, एेसा वाकया राजस्थान हाईकोर्ट में नजर आया। हाईकोर्ट ने एक एेसे व्यक्ति के अग्रिम जमानत आवेदन को सशर्त स्वीकार किया कि वह अगली बार इस तरह के मामले मंे लिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ गैर जमानती मामला दर्ज होगा।

 

आवेदनकर्ता का कसूर इतना था कि वह एक एेसे व्हाट्सएप्प ग्रुप का एडमिन था, जिसके सदस्यों ने उनके ही समाज की एक महिला का फोटो शेयर कर असंगत टिप्पणियां करनी शुरू कर दी। महिला की शिकायत पर पुलिस ने टिप्पणी करने वाले व्यक्ति के साथ ही ग्रुप एडमिन के खिलाफ भी आईपीसी की धारा ५०९ तथा आईटी एक्ट की धारा ६७ के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की तैयारी कर ली।

 

यह था मामला


जस्टिस विनीत माथुर की एकलपीठ में जैसलमेर के युवा महेन्द्र गर्ग की ओर से पेश अग्रिम जमानत आवेदन पर जब उनके अधिवक्ता अशोक छंगाणी ने मामला बयां किया तो एकबारगी कोर्ट में उपस्थित सभी सकते में आ गए। दरअसल जैसलमेर मजदूर पाड़ा निवासी महेन्द्र ने अपने मोबाइल पर एक ग्रुप बनाया हुआ था। उसमें शामिल सदस्यों में से एक ब्रजेन्द्र गर्ग ने एक महिला का चित्र पोस्ट कर उसे अपने भाई की पूर्व पत्नी बता डाला। अन्य सदस्यों ने उस पर अपनी राय कायम करनी शुरू कर दी। इस पर महिला व उसके पति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणी से उसके वैवाहित जीवन में जहर घुल रहा है।

 

पुलिस ने आईपीसी की धारा ५०९ व आईटी एक्ट की धारा ६७ में मुकदमा दर्ज कर लिया। टिप्पणीकर्ता व ग्रुप एडमिन दोनों ने ही जैसलमेर डीजे कोर्ट में अग्रिम जमानत आवेदन दायर किए, लेकिन वहां की पुलिस व अभियोजन पक्ष की ओर से जोरदार विरोध के चलते आवेदन खारिज कर दिए गए। इस पर ग्रुप एडमिन महेन्द्र ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई, जहां उसकी सशर्त अग्रिम जमानत स्वीकार हो सकी। उनके खिलाफ मुकदमा तो चलेगा ही।

 

विस्थापितों संबंधी याचिका की सुनवाई १४ तक टली

 

पाकिस्तान व बांग्लादेश से आने वाले हिंदू अल्पसंख्यकों को लान्ॅग टर्म वीजा, मौलिक सुविधाएं व नागरिकता प्रदान करने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से स्व:प्रेरणा प्रसंज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई बुधवार को जस्टिस संगीतराज लोढ़ा व जस्टिस विनीत माथुर की खंडपीठ में हुई।

 

चार मिनट चली सुनवाई में सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता कांतिलाल ठाकुर ने कहा कि चूंकि इस मामले में राज्य के महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा बहस करेंगे, इसलिए थोड़ा समय दिया जाए। इस पर खंडपीठ ने कोर्ट में मौजूद न्यायमित्र कमल जोशी व सज्जनसिंह राठौड़ की सहमति से अगली सुनवाई १४ दिसंबर नियत की।

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