कोरोना ने छीना ममत्व और पिता का दुलार, बच्चों को परिजनों का इंतजार

- कोई तारों में मम्मी ढूंढ रहा, किसी को चौखट पर पापा का इंतजार

By: Jay Kumar

Updated: 03 Aug 2021, 06:40 PM IST

अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. ये बोलते नहीं...रोते हैं तो कारण नहीं बताते। इन्हें प्यार का इजहार करना नहीं आता, क्योंकि ये अभी छोटे हैं, लेकिन अंदर से बिछुड़े मम्मी-पापा से मिलने को इनका दिल हर रोज बेकरार होता है। कोई रोज शाम ढलते ही चौखट पर अपने पापा का इंतजार करता है तो किसी को तारों में अपनी मम्मी ढूंढऩे की आदत पड़ गई है। मम्मी का गिफ्ट व पापा की चॉकलेट इन्हें याद आती है।

ये कोई कहानी नहीं, हकीकत है उन मासूमों की, जिनके सिर से छोटी उम्र में ही मां या पिता का साया उठ गया। मनहूस कोरोना ने इनसे मां की ममता और पिता का प्यार तक छीन लिया। इन मासूमों को देख परिजन हर दिन कोरोना संक्रमण को कोसते हुए बिलख पड़ते हैं।

दोनों जुड़वां बहनें देख रही पिता की बाट
वीर मोहल्ला निवासी आठ वर्षीय जुड़वा बहनों रिद्धी और रश्मि के पिता नरेन्द्र हर्ष का २९ अप्रेल को कोरोना से निधन हो गया था। नरेन्द्र अपनी दोनों पुत्रियों से बेहद ज्यादा प्यार करते थे। अक्सर वे अपनी मां से पिता के बारे में पूछती हैं। कई बार उन्हें हकीकत भी बताई, लेकिन अक्सर दोनों बेटियां पिता को याद कर अपना मूड ऑफ कर लेती हैं।

आसमान की ओर तकता रहता है नन्हा केशव
गूंदी मोहल्ला निवासी पांच वर्षीय केशव अक्सर तारों में मां आकांक्षा पुरोहित को ढूंढ़ता है। केशव की मम्मी का गत १ मई को कोरोना से निधन हो गया था। इससे कुछ समय पहले बड़ी दादी भी चल बसी थी। केशव अक्सर कहता है कि जहां उनकी बड़ी दादी है और वहीं उनकी मम्मा चली गई है। दोनों ‘तारा’ बन गई हैं। वह शाम ढलते ही आसमां की ओर ताकता रहता है। बुआ व दादी के पास रहने वाले केशव को देख सभी की आंखें नम हो जाती हैं।

विधवाओं के बच्चों को १-१ हजार दे रही सरकार
राज्य सरकार की ओर से समाज कल्याण विभाग के मार्फत १-१ हजार रुपए बच्चों को प्रतिमाह दिए जाते है। ये राशि उन्हें ही मिलती है, जो अनाथ या विधवा के बच्चे हो। जिनकी मां का देहांत हो गया और पिता जिंदा हैं, वे इस योजना में लाभान्वित नहीं हो रहे हंै। विधवा को १५ सौ रुपए प्रतिमाह दिए जा रहे हैं।

कुल सवा दो सौ बच्चे लाभान्वित
समाज कल्याण विभाग अब तक कोरोना में काल कवलित हुए दिवंगतों के ० से १८ साल के अनाथों व विधवाओं के सवा दो सौ बच्चों को लाभान्वित कर चुका हैं। वहीं १५ से २० बच्चों के आवेदन जमा हुए हैं, जिन्हें भी जल्द योजना का लाभ मिलेगा।

Jay Kumar
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