मालिकाना हक को लेकर सामने आया अनूठा मामला, फैसले के लिए मजिस्ट्रेट के सामने पेश हुई गाय

Harshwardhan Singh Bhati

Publish: Apr, 12 2019 02:41:24 PM (IST)

Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

वीडियो : गौतम उडेलिया/कंटेंट : कैलाश सारस्वत/जोधपुर. हालांकि इन चुनावो में गाय का मुद्दा इतना बड़ा नहीं है जितना पिछले चुनाव में था। वहीं एक गाय के मालिकाना हक को लेकर बड़ा विवाद शुक्रवार को जोधपुर में खासा गर्मा गया है। जोधपुर की एक अदालत में एक गाय की पेशी है, इससे गवाही तथा सबूत पूछे जाएंगे। अतिरिक्त महानगर मजिस्ट्रेट संख्या तीन की अदालत में आज गाय को पेश किया जा रहा है। गाय पर सरकारी विभागों में कार्यरत दो व्यक्ति अर्से से अपना मालिकाना हक जता रहे हैं। इन में से एक बिजली विभाग में कांस्टेबल हैं जबकि दूसरे सरकारी शिक्षक हैं।

पुलिस के एएसआइ मनोहरसिंह गाय को अतिरिक्त महानगर मजिस्ट्रेट संख्या तीन के पीठासीन अधिकारी मदनसिंह चौधरी के कोर्ट रूम के बाहर लेकर आए ।न्यायाधीश कुर्सी से उठकर रूम से बाहर आए तथा जिस गाड़ी में गाय बंधी थी उसके पास पहुंचे।ड्राइवर को कहा कि गाड़ी सीधी करे। गाय तथा बछड़े को मजिस्ट्रेट के सामने गाड़ी में ही रखा। गाय पर हक जताने वाले वहा खड़े एक पक्ष से पुछा निशान बताओ । गाय के साथ आई एक महिला ने कहा कि गाय की गर्दन पर निशान है तो मजिस्ट्रेट ने न्यायिक कर्मचारी से गाय की फोटो लेने तथा दोनों दावेदार को गाय के पास खड़ा करके फोटो लेने को कहा। तकरीबन 5 मिनट तक मजिस्ट्रेट ने गाय का निरीक्षण किया उसके बाद वहां से उठ कर कोर्ट रूम जाकर सीट पर बैठ गए।

पुलिस गाय को गाड़ी में लेकर आई

मंडोर पुलिस थाना के एएसआइ शुक्रवार सुबह 11.45 बजे मंडोर स्थित पन्नालाल गोशाला से गाय को एक लोडिंग गाड़ी में बैठाकर न्यायालय परिसर में लेकर आए।

9 महीने पुराना मामला

चेनपुरा बावड़ी स्थित नयाबास निवासी शिक्षक श्यामसिंह परिहार के अनुसार उनकी गाय पिछले डेढ़ दो महीने से लापता थी। गत 31 जुलाई 2018 को स्कूल से लौटते वक्त उन्हें खुद की गाय रास्ते में नजर आई तो वे उसे घर लाकर बांध दी। 4 दिन बाद यानी 4 अगस्त को उनके पड़ोस में रहने वाले डिस्कॉम में सिपाही पद पर तैनात ओमाराम विश्नोई ने परिहार के घर पर बंधी गाय को यह कहकर ले गए कि यह गाय उसकी है। दोनों के बीच में गाय को लेकर ठन गई और दोनों ने मालिकाना हक जताना शुरू कर दिया। दोनों के बीच गाय को लेकर जबरदस्त कहासुनी हुई और पूरे परिवार के लोग तथा मोहल्ले के लोग भी इस मामले में कूद पड़े।

इस बीच शिक्षक ने कांस्टेबल ओमाराम पर मारपीट करने का आरोप लगाया। बात पुलिस तक पहुंची। मामला पुलिस में जाने के बाद मालिकाना हक को लेकर तहकीकात शुरू हुई। श्यामसिंह ने कहा कि गाय खुद का दूध पीती है जबकि ओमाराम ने कहा कि गाय की एक बछड़ी है वह खुद का दूध नहीं पीती। इत्तफाक से उस वक्त गाय दूध नहीं दे रही थी इसलिए पीने या नहीं पीने का फैसला नहीं हो सका। गाय के दुधारू होने तक पुलिस ने गाय को पन्नालाल गौशाला भेज दिया था। और आज कोर्ट में पेश किया।

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