video : वन विभाग के इस नियम ने चलाई हैण्डीक्राफ्ट उद्योग पर आरी

Jitendra Singh Rathore

Publish: Feb, 22 2018 10:00:31 AM (IST)

Jodhpur, Rajasthan, India

राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय स्तर तक अलग पहचान बना चुका जोधपुर का हैण्डीक्राफ्ट उद्योग संकट में है। पहले विश्वव्यापी मंदी, नोटबंदी, जीएसटी रिफण्ड से उद्योग कठिन दौर से गुजर रहा है। अब साथ ही, आरा मशीनों का नवीनीकरण उद्योग में बाधा बना हुआ है। लकड़ी आधारित हस्तशिल्प उद्योग में छोटी आरा मशीनों के लाइसेंस नवीनीकरण में देरी की वजह से हैण्डीक्राफ्ट उद्यमी असमंजस में है। पिछले एक साल से हस्तशिल्प निर्यातकों के आरा मशीनों के लाइसेंस के नवीनीकरीण की फइलें जिला वन अधिकरी के कार्यालय में अटकी पडी है ।
हैण्डीक्राफ्ट उद्योग पर संकट, आरा मशीनों का नवीनीकरण अटका साल भर से अटके पड़े है करीब 100 निर्यातकों के आवेदन जोधपुर। राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय स्तर तक अलग पहचान बना चुका जोधपुर का हैण्डीक्राफ्ट उद्योग संकट में है। पहले विश्वव्यापी मंदी, नोटबंदी, जीएसटी रिफण्ड से उद्योग कठिन दौर से गुजर रहा है। अब साथ ही, आरा मशीनों का नवीनीकरण उद्योग में बाधा बना हुआ है। लकड़ी आधारित हस्तशिल्प उद्योग में छोटी आरा मशीनों के लाइसेंस नवीनीकरण में देरी की वजह से हैण्डीक्राफ्ट उद्यमी असमंजस में है। पिछले एक साल से हस्तशिल्प निर्यातकों के आरा मशीनों के लाइसेंस के नवीनीकरीण की फइलें जिला वन अधिकरी के कार्यालय में अटकी पडी है ।

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लकड़ी का काम होल्ड पर नए निर्यातकों का आरा मशीनों के लाइसेंस के आभाव में काम होल्ड पर है । लाइसेंस नहीं होने की वजह से फैक्ट्रियों में मैन्यूफेक्चरिंग कार्य के लिए उपयोग में ली जाने वाली आरा मशीन स्थापित नहीं कर पा रहे है। नए निर्यातकों के मैन्यूफेक्चरिंग पर असर पड़ रहा है। वही, निर्यातक लाइसेंस नवीनीकृत नहीं होने की वजह भय में भी है, कि उनकी मशीन सीज नहीं कर ली जाए।

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100 निर्यातकों के लाइसेंस अटकें हुए जोधपुर के करीब 100 हैण्डीक्राफ्ट निर्यातकों के आरा मशीन नवीनीकरण के लिए लाइसेंस अटके हुए है। ये नवीनीकरण लाइसेंस वन विभाग की ओर से किए जाते है। वन विभाग की उदासीनता की वजह से निर्यातकों के लाइसेंसे नवीनीकृत नहीं हो रहे है। निर्यातक हरीश हासवानी ने बताया की उन्होंने 23 फरवरी 2017 में आरा मशीन के लाइसेंस नवीनीकरण के लिए फईल शुल्क सहित जिला वन अधिकारी के कार्यालय में जमा करवाई थी। परन्तु अभी तक लाइसेंस नवीनीकृत नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में विभाग के कई चक्कर काटे, लेकिन काम नहीं हुआ।

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नए लाइसेंस भी नहीं बन रहे सूत्रों से ज्ञात हुआ कि आरा मशीन के नए लाइसेंस पिछले कई वर्षो से नही बनाए गए है । जनवरी 2018 में आरा मशीन के लाइसेंस बनाने के लिए नई कमेटी का गठन किया गया था। इसमे गैर सरकरी सदस्यों के तौर पर जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.भरत दिनेश को चेयरमैन पद पर नियुक्त किया गया था । परन्तु इस कमेटी की एक भी बैठक का आयोजन अभी तक नही किया गया है ।

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24 इंच की आरा मशीन की ही अनुमति देश में वृक्षों की लकड़ी की अंधाधुंध कटाई को देखते हुए वर्ष 2003 में आरा मशीनों के उपयोग पर बैन लग गया था। वर्ष 2005-06 में बैन हटा। उस समय यह तय किया गया था, लकड़़ी आधारित हैण्डीक्राफ्ट क्षेत्र में 24 इंच की आरा मशीन का लकड़ी काटने के लिए उपयोग किया जा सकता है। वन विभाग की गाइडलाइन के अनुसार, आरा मशीन का लाइसेंस उसी को दिया जाएगा, जो किसी हैण्डीक्राफ्ट या औद्योगिक संगठन के सदस्य हो। तब से अब तक हैण्डीक्राफ्ट सहित अन्य क्षेत्रों में 24 इंच की ही आरा मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।

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