Cyber Alert डिजिटल लेनदेन में सतर्कता बरतें

जोधपुर( crime news jodhpur news ). आज ( Swarnim Bharat ) के सोशल साइट के जमाने में लोग बड़े ही प्यार से धोखा ( cyber criminals ) देते हैं ( cyber alert ) और लुटने वाले ( online fraud ) के समझने ( digital payments ) पहले ही नुकसान हो जाता है ( Cyber alert news ) । डिजिटल अवेयरनेस एक्सपर्ट डॉ नितिन राजवंशी का कहना ( Cyber talk ) है कि ( cyber sell helping news ) लोगों को डिजिटल लेन देन ( digital transactions ) में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए ( latest NRI news in hindi )।

 

MI Zahir

Updated: 17 Feb 2020, 11:40 PM IST

Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

जोधपुर( crime news jodhpur news ). आज ( Swarnim Bharat ) के सोशल साइट के जमाने में लोग बड़े ही प्यार से धोखा ( cyber criminals ) देते हैं ( cyber alert ) और लुटने वाले ( online fraud ) के समझने ( digital payments ) पहले ही नुकसान हो जाता है ( Cyber alert news ) । डिजिटल अवेयरनेस एक्सपर्ट डॉ नितिन राजवंशी का कहना ( Cyber talk ) है कि ( cyber sell helping news ) लोगों को डिजिटल लेन देन ( digital transactions ) में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए ( latest NRI news in hindi ) । जानिए पूरी बात उन्हीं के शब्दों में:

आजकल साइबर अपराधियों की नजर आपके डिजिटल लेनदेन और सोशल मीडिया एकाउंट पर ज्यादा रहती है। लोग आसानी से ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार बन जाते हैं। इसके लिए नये-नये तरीके अपनाए जा रहे हैं। धीरे-धीरे लोगों ने डिजिटल पेमेंट अपना लिया है, लेकिन कई बार धोखाधड़ी का सामना करना पड़ता है। डिजिटल पेमेंट आसान और सुविधाजनक है, लेकिन सावधान रहने की भी जरूरत है। आइए जानते हैं कि ये फ्रांड कैसे होते हैं और इनसे बचने के लिए क्या करना चाहिए।

ऐसे मुख्य प्रकार के फ्रॉड में - विभिन्न प्रकार के फिशिंग अटैक, रिमोट एक्सेस मोबाइल एप्लिकेशन स्कैम, इनकम टैक्स रिफंड के नाम पर ठगी, फर्जी पेमेंट लिंक व फर्जी पोर्टल इत्यादि शामिल हैं। फिशिंग में किसी बैंकिंग, क्रेडिट/ डेबिट कार्ड की डिटेल्स और पासवर्ड जानने के लिए किसी बैंक या संस्था के नकली प्रतिनिधि के माध्यम से कॉल या मैसेज किया जाता है, लेकिन वह फर्जी होता है। अपराधी आपको फिशिंग के द्वारा नकली ईमेल या मैसेज करते हैं, जो किसी कम्पनी या बैंक की तरह मिलते जुलते होते है। फिशिंग वेब पेज बिल्कुल मूल वेब पेज की तरह ही होता है। बस इसमें वेबपेज के पते ( URL address ) में बदलाव होता है जो किसी यूजऱ को नजर नहीं आता है। इसलिए यह आवश्यक है की डोमेन नाम अथवा वेबसाइट के पते को ठीक प्रकार से जांचें।
यदि ऑनलाइन केवाईसी ( KYC ) अपडेट करने के लिए मोबाइल पर किसी भी प्रकार का मैसेज आता है , तो उस मैसेज पर विश्वास नहीं करना है। साइबर ठगों द्वारा आपके मोबाइल में एक विशेष प्रकार का एप इनस्टॉल कराया जाता है , जिससे एक कोड जनरेट होता है और फिर आपका मोबाइल इनके नियंत्रण में चला जाता है। कोई भी वित्तीय संस्थान अथवा बैंक कभी भी केवाईसी ( KYC ) ऑनलाइन अपडेट करने के लिए नहीं कहते हैं। इसे अपडेट करने के लिए या तो आपको बैंक जाना पड़ेगा या फिर ऐसी कंपनी आपके पास अपना प्रतिनिधि भेज कर अपडेट कराती है।
किसी भी लिंक पर बिना जाने समझे क्लिक करना आपका खाता खाली कर सकता है। किसी के कहने पर एप डाउनलोड करने से बचें। जरूरी है कि पहले ठीक से पता करें कि कौन सी अधिकृत वेबसाइट है और इसके बाद ही किसी को पैसे ट्रान्सफर करें। किसी भी ऐसे लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें जो कि एकाउंट डिटेल मांग रहा हो। हमें सावधानी बरतने की जरूरत है ,तभी हम इन सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल कर पाएंगे और खतरे से सुरक्षित भी रहेंगे, क्यूंकि सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी।

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