गर्मी व उमस से प्याज की उपज पर मंडराया खतरा

अक्सर भावों को लेकर किसानों के आंसू निकालने वाली प्याज की उपज को लेकर किसान दोहरी दुविधा में हैं।

By: pawan pareek

Published: 07 Jul 2019, 10:00 AM IST

भोपालगढ़ (जोधपुर) . अक्सर भावों को लेकर किसानों के आंसू निकालने वाली प्याज की उपज को लेकर किसान दोहरी दुविधा में हैं। ग्रामीण इलाकों में पिछले कई दिनों से पड़ रही गर्मी, उमस और बरसात के चलत किसानों और व्यापारियों में प्याज की उपज को बचाने को लेकर हलचल शुरु हो गई है और वे इसकी जुगत में लगे हैं। प्याज की फसल में तेज गर्मी और हल्की सी बरसात भी खासा नुकसान कर देती है।

 

क्षेत्र में किसानों ने पिछले बार के बम्पर भावों को देखकर इस बार प्याज की बुवाई भी बम्पर की और इसकी उपज भी आशानुरुप हुई है। इस बार प्याज के शुरुआती भाव भी आशानुरुप मिलने से किसानों में संतोष तो है। ऐसे में जहां जरुरत वाले किसानों ने तो उपज बेच दी, लेकिन अधिकांश किसानों और व्यापारियों ने भाव अभी और बढऩे की आस में उपज को रोक रखा है और भंडारण भी किया जा रहा है।

 

 

ऐसे किसानों के यहां प्याज के ढेर पड़े हैं। वहीं व्यापारी भी किसानों से खरीद और मंडी में बिक्री के भाव लगभग समान होने से उपज को आगे बेच नहीं पा रहे हैं। वर्तमान में कई जगहों पर किसानों व व्यापारियों को फसल बचाने के उपाय करते देखा जा सकता है। किसानों का कहना है कि प्याज को आज बेचो तो बिल्कुल ही नफा नहीं है, लेकिन अभी आस है और गर्मी से खराब हो गई अथवा बरसात से फसल भीग गई तो उन्हें उल्टे खासा नुकसान हो जाएगा।

 

किसान व व्यापारी उहापोह में

 

ग्रामीण इलाकों में पिछले बार के बम्पर भावों को देखते हुए किसानों ने इस बार भी बुवाई का रकबा लगभग दुगुना हो गया है। शुरुआती भाव ठीकठाक मिलने से किसानों व व्यापारियों दोनों के सामने उहापोह की स्थिति है। ऐसे में न तो ज्यादातर किसान फसल बेच पा रहे हैं और न माल खरीद चुके व्यापारी इसे मंडियों में ले जा रहे हैं।

 

मंडियों में भावों में की के पीछे मुख्य कारण बुवाई का रकबा बढऩा भी है और इसके साथ ही प्रदेश के बीकानेर आदि कई जिलों एवं खासकर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र व हरियाणा आदि प्रदेशों से भी प्याज की आवक शुरु होना माना जा रहा है। साथ ही नासिक से आने वाले प्याज की आवक खूब होने लगी है।

 

यह है प्याज का गणित

 

क्षेत्र में बुवाई - 7000 से 7500 हैक्टेयर (लगभग)

 

पैदावार प्रति हैक्टेयर - 900-1000 मण (लगभग)

क्षेत्र में कुल पैदावार - 7 से 8 लाख मण

 

अब तक बेचान - मात्र एक से डेढ़ लाख मण

भंडारण (किसानों के यहां) - 5 से 6 लाख मण

 

भंडारण (व्यापारियों के यहां) - एक से दो लाख मण

वर्तमान भाव -

 

- फव्वारा से सिंचित - 250 से 300 रुपए प्रति मण

- सीधे सिंचित - 300 से 400 रुपए प्रति मण

 

भावों की आशा - 500 से 600 रुपए प्रति मण (पिछले साल के भाव)

 

एक्सपर्ट व्यू

जोधपुर जिले में प्याज की उपज दो तरह से ली जाती है। पहली उपज तो फव्वारों से सिंचाई करके और दूसरी सीधे सिंचाई से। फव्वारा से सिंचाई कर ली प्याज की उपज बिना भंडारण सुविधा के माह भर में सड़ने व खराब होने लगती है और सीधे सिंचित उपज को भी 40 डिग्री से ऊपर के तापमान में महिने से ज्यादा समय तक सहेज कर नहीं रखा जा सकता है। ग्रामीण इलाकों में भंडारण सुविधा के लिए वेयर हाऊस बनाने की जरुरत है।

- बाबूलाल सोलंकी, प्याज व्यापारी भोपालगढ़

pawan pareek Desk
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