टूटती उम्मीदें...अधूरे ख्वाब

-आंखों में ही रह गए शहर विकास के दिखाए गए ख्वाब

- जेडीए जोधपुर के कई प्रोजेक्ट जो कागजों से बाहर ही नहीं आए

By: Avinash Kewaliya

Published: 01 Jul 2019, 11:59 PM IST

 

अविनाश केवलिया

जोधपुर. शहर विकास के कई ख्वाब एक साल बाद भी आंखों में हैं। कई प्रोजेक्ट कागजों से बाहर नहीं आए तो कई रद्द ही करने पड़े। इनमें कई ऐसे प्रोजेक्ट भी शामिल हैं जो पीपीपी मोड पर बनने थे, मतलब इसका जेडीए की वित्तीय स्थिति पर ज्यादा प्रभाव भी नहीं पड़ता। लेकिन इसमें भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। इनमें शहर को पहला रोप-वे देना, राष्ट्रीय स्तर का कंवेंशन सेंटर जैसीे सौगातें वर्षों तक शहर याद रख सकता था। लेकिन अभी तक रेंग रही सरकारी प्रक्रिया में सभी अटक गए हैं।

फोटो...40...रोप-वे प्रोजेक्ट अधर में

यह थी योजना - कायलाना के पीछे के क्षेत्र में सिद्धनाथ मंदिर तक रोप-वे प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया। पीपीपी मोड पर इस काम को अंतिम रूप दिया गया। 8.93 हैक्टेयर जमीन आवंटन के लिए सकारात्मक रिपोर्ट दी गई थी। यह रोप-वे 800 मीटर लम्बाई का बनना था। इसकी लागत करीब 18 करोड रुपए आंकी गई थी। सिद्धनाथ मंदिर दर्शन के लिए जाने वाले लोगों को यह सुविधा मिलनी थी।

इसलिए अटका- जमीन वन विभाग के अधीन थी। जिसको आवंटन व पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए केन्द्रीय वन मंत्रालय को फाइल भेजी गई। लेकिन यह सहमति अब तक नही आई।

अब यह उम्मीद- वन मंत्रालय से स्वीकृति मिलती है तो यह प्रोजेक्ट शुरू हो सकता है। इसके लिए जेडीए को अलग से किसी प्रकार की भी आवश्यकता नहीं है।
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फोटो..37...सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर अटका
यह थी योजना - विवेक विहार योजना के समीप ही प्रदेश का सबसे बड़ा और आधुनिक कन्वेंशन सेंटर बनाने की योजना कई सालों से अटकी है। यह भी पीपीपी मोड पर बनना है। 25 से ज्यादा बीघा भूमि पर बनना है यह सेंटर। औद्योगिक प्रशिक्षण व शिक्षण के लिए बड़े सेमिनार इस प्रकार के सेंटर में होने प्रस्तावित है। 356 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट को गुजरात मॉडल पर बनाया जाना है।

इसलिए अटका - नगरीय विकास विभाग की ओर से प्लानिंग कमेटी ने इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी थी। पिछले वर्ष एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट मांगे गए थे। लेकिन महज एक ही कंपनी ने रुचि दिखाई। इसलिए इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
अब यह उम्मीद-रिफाइनरी प्रोजेक्ट को लेकर इस कन्वेंशन सेंटर में तेजी आने की उम्मीद है। चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद यदि राज्य सरकार रुचि ले तो काम हो सकता है।

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फोटो 39...स्वाद नहीं दे पाया मसाला चौक

यह थी योजना-शहर के सबसे पुराने उम्मेद उद्यान में जयपुर के रामनिवास बाग की तर्ज पर मसाला चौक विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। उम्मेद उद्यान में जू के स्थानांतरित होने के बाद उस स्थान को विकसित करने की योजना थी। यहां 28 दुकानें एक ही थीम पर विकसित की जानी थी और करीब 350 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। यहां प्रसिद्ध व्यंजनों की बिक्री की व्यवस्था की गई थी।

इसलिए अटका - नगरीय विकास विभाग की ओर से प्लानिंग कमेटी ने इस प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी थी। पिछले वर्ष एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट मांगे गए थे। लेकिन महज एक ही कंपनी ने रुचि दिखाई। इसलिए इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
अब यह उम्मीद - उम्मेद उद्यान में मसाला चौक पर फोरेस्ट पार्क व प्ले गार्डन को तरजीह दी गई है। ऐसे में मसाला चौक का भविष्य फिलहाल उजला नहीं है। राज्य सरकार की पहल पर यह प्रोजेक्ट शुरू होना था, सरकार बदलने के साथ इसके भी खटाई में पडऩे के आसार है।

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फोटो 38...लोकार्पण के बाद भी भी रोक दी हेरिटेज रोड

यह थी योजना - शहर के भीतरी क्षेत्र में पर्यटकों को लुभाने के लिए हेरिटेज रोड प्रोजेक्ट शुरू किया गया। इसके लिए वित्तीय स्वीकृति जारी हुई और शिलान्यास पत्थर भी लगा दिए। लेकिन इसके बाद इस काम को आगे नहीं बढ़ाया गया। 2 करोड़ से अधिक इस प्रोजेक्ट में घंटाघर से किला रोड तक दो सडक़ों को हेरिटेज रोड के रूप में विकसित करना था। यहां होटल-गेस्ट हाउस की भरमार है, इसलिए पर्यटकों की चहल-कदम भी ज्यादा रहती है।
इसलिए अटका- इस प्रोजेक्ट को शुरू करने की बारी आई तो विधानसभा चुनावों की आचार संहिता आड़े आ गई। ठेकेदार ने मौखिक आदेश पर काम नहीं बढ़ाया। चुनावों के बाद बजट की कमी को देखते हुए इसे गैर जरूरी माना और शुरू नहीं किया गया।

अब यह उम्मीद - इस काम के कार्यादेश जारी हो चुके हैं। ऐसे में यदि राजनीतिक इच्छा शक्ति और पर्यटन विकास की ओर सरकार ध्यान दे तो प्रोजेक्ट शुरू हो सकता है।
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इनका कहना...

रोप-वे प्रोजेक्ट में पर्यावरण मंत्रालय से स्वीकृति का इंतजार है। वहीं कंवेंशन सेंटर के लिए एक बार फिर प्रयास कर रहे हैं। मसाला चौक प्रोजेक्ट पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं हो पाया है।
- सुखराम चौधरी, अधीक्षण अभियंता, जेडीए

Avinash Kewaliya
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