जोधपुर का ये दिव्यांग बना दूसरे दिव्यांगों का सहारा, मुश्किलों का सामना कर बने मिसाल

दिव्यांगों की सेवा के लिए हुकमाराम ने संस्थान ही कर दिया स्थापित

 

By: Harshwardhan bhati

Published: 12 Mar 2018, 02:36 PM IST

मंडोर/जोधपुर. हौसले बुलंद हों तो किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए कठिन डगर भी आसान होती है। भोपालगढ़ तहसील के बागोरिया गांव के गरीब परिवार में जन्मे दिव्यांग हुकमाराम ने वो काम कर दिखाया जो सरकार और सक्षम लोग भी नहीं कर पाए। मरघट में बैठकर अपने जैसे ही दिव्यांग लोगों को राहत दिलाने की ठानी और दिव्यांग संस्थान की रूपरेखा तैयार करने में जुट गए। शुरुआत में कुछ लोगों ने हास्यास्पद बताया। लेकिन २५ दिव्यांग साथियों और रामस्नेही संत रामप्रसाद ने आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। अपने जैसे ही दिव्यांग भाइयों को राहत के लिए आखिरकार वर्ष २०११ में जन सहयोग से अशोक कॉलोनी मगरा पूंजला रोड़ रामसागर चौराहा पर पूरा संस्थान खड़ा कर दिया। सत्य प्रेम करुणा सेवा संस्थान पिछले सात सालों में 9000 से अधिक दिव्यांगों को शिक्षा के साथ साथ प्रति वर्ष अलग अलग जगह शिविर लगवाकर प्रमाण पत्र, रोडवेज पास, रेलवे पास, पेंशन आदि सेवाओं के लिए लाभान्वित कर चुका है।

 

संस्थान के छात्रावास में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले 1७ दिव्यांग पिछले सात साल में सरकारी सेवा में पहुंचे हैं। संस्थान का प्रबंधन एवं देखरेख में जुटे कर्मचारी भी दिव्यांग है। संस्थान के अध्यक्ष पापालाल सांखला व कोषाध्यक्ष जानुराम पटेल भी दिव्यांग है। विभिन्न क्षेत्रों से भामाशाह संस्थान में आकर संस्थान के कार्यशैली देखकर सहयोग करते हैं। जोधपुर के अलावा नागौर और भरतपुर में भी संस्थान की उपशाखा संचालित है जिसमें नि:शुल्क आवासीय छात्रावास संचालित है। इन छात्रावास में किसी भी प्रकार का दिव्यांग व्यक्ति या बीपीएल परिवार का छात्र आकर रह सकता है और अपनी पढ़ाई कर सकता है। संस्थान भोजन, आवास और पाठ्यपुस्तक आदि सभी जरूरत की वस्तुएं नि:शुल्क दी जाती है। दिव्यांगों की २१ सूत्री मांगों को लेकर हुक्माराम लंबे अर्से से संघर्षरत है।

 

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