scriptDo you have these symptoms? don't take this disease lightly | omg: ये लक्षण आपको है क्या? इस बीमारी को हल्के में न लें | Patrika News

omg: ये लक्षण आपको है क्या? इस बीमारी को हल्के में न लें


4865 रोगियों पर अध्ययन

जोधपुर

Published: March 11, 2022 05:20:04 pm

जोधपुर. बदलती लाइफ स्टाइल हमें सुख-चैन तो दे रही है, लेकिन गलत खान-पान और फिर वॉकिंग-व्यायाम आदि नहीं कर हम बीमारियों को न्यौता दे रहे हैं। पिछले कुछ सालों में भारत में सबसे बड़ी बीमारी मधुमेह बन कर उभरी है। इन मधुमेह मलाइटिस के मरीजों में लीवर सिरोसिस कॉमन होता जा रहा है। इन रोगियों में लीवर में फैट जम जाता है। लगातार शरीर में कैलोस्ट्रॉल बढ़ने से लीवर कमजोर हो रहा है। शुरुआती अवस्था में खान-पान में कंट्रोल व नियमित व्यायाम से चिकित्सक हालात कंट्रोल में भी ला रहे हैं। गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग ने इस पर अध्ययन भी किया है। जिसमें 4865 रोगियों को सम्मिलित किया गया।
omg: ये लक्षण आपको है क्या? इस बीमारी को हल्के में न लें
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गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ सुनील दाधीच ने बताया कि लीवर सिरोसिस बीमारी में लीवर सिकुड़ जाता है और उसका फंक्शन कम हो जाता है। लीवर में प्रेशर बढ़ता है। इस कारण मरीज को कॉम्पिलिकेशन होते हैं। जिसमें लीवर में पानी भरना, पीलिया, बेहोशी, खून की उल्टी व लीवर का कैंसर तक हो जाते है। लीवर ट्रांसप्लांट करना ही इलाज होता है। पिछले पांच-दस सालों से लीवर सिरोसिस के दो मुख्य कारण रहे है, जिनमें पहला एल्कॉल का सेवन करने से लीवर सिक़ुड़ना और दूसरा मुख्य कारण डायबिटीज मलाइटिस है। डायबिटीज वालों में सबसे पहले लीवर के अंदर फैट जम जाता है, जो ब्लड के अंदर तक सम्मिलित होता है।
249 मरीजों का किया चयन

गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग ने इस पूरे अध्ययन में 4865 मरीज सम्मिलित रहे, जिनको लीवर सिरोसिस की बीमारी थी। लेकिन इसमें विभाग ने 249 चयनित मरीजों पर रिसर्च ट्रायल शुरू की। डॉ. दाधीच ने बताया कि शुरुआती चरण में चयनित मरीजों में लगा कि इनमें वे बीमारी को आगे बढ़ने से रोक सकते हैं। मरीजों को खान-पान का कंट्रोल, व्यायाम आदि करने की सलाह दी गई। साथ ही ब्लड व लीवर फैट कम करने की दवाएं दी गई।165 ने मेडिसिन ली, बचे हुए ने मेडिसिन नहीं ली। फॉलोअप मरीजों को लगातार ब्लड जांच व लीवर फाइब्रोस्कैन आदि तीन, छह व नौ माह से कराया गया। ऐसे मरीजों में दवा व फॉलाेअप न कराने वाले मरीजों की तुलना में खासा इंप्रूवमेंट आया। इन मरीजों की बीमारी काफी हद तक रिवर्स हो गई।

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