video : राम दिल का सुरूर, सीता आंखों की नूर है - सीता स्वयंवर का मंचन

Jitendra Singh Rathore

Updated: 24 Feb 2018, 10:38:11 AM (IST)

Jodhpur, Rajasthan, India

 


जोधपुर . माना कि स्वयंवर में राजा-महाराजाओं की जमात है, पर मेरे राम और लक्ष्मण के सामने किसी की क्या बिसात है... एक पिता मजबूर है, पर क्या करें, बेटी को विदा करना ही जमाने का दस्तूर है.... हे महाराज दशरथ मेरी बेटी सीता नादान है, कर जाए कोई भूल तो कर देना तुम माफ उसे..., दशरथ का जवाब जहां राम दिल का सुरूर है, वहीं सीता मेरी आंखों का नूर है....। यह कवित्तमय संवाद पारसी रंगमंच के तहत शुक्रवार शाम टाउन हॉल में बीकानेर की संस्थान अर्पण आर्ट सोसाईटी की प्रस्तुति नाटक सीता स्वयंवर में कुछ इस तरह अदा किए गए। हॉल में बैठे दर्शक प्रत्येक संवाद पर करतल ध्वनि कर दाद देता रहा। तुलसी कृत रामायण के एक प्रसंग की झलक के साथ ही राजस्थान संगीत नाटक अकादमी के तत्वावधान में पहली बार आयोजित पांच दिवसीय राज्य स्तरीय पारसी रंगमंच नाट्य समारोह का समापन हो गया।

नाटक में श्रीराम की भूमिका वेणु गोपाल ने, लक्ष्मण की सुरेश कुमार वालेचा ने, परशुराम विवेक दर्डा, रावण की भूमिका सुरेन्द्र स्वामी ने एवं जनक की भूमिका दयाराम ने की। अन्य पात्रों में सीता की भूमिका ज्योति ने, कौशल्या गीतिका खत्री, शशांक, काननाथ, विजय कुमार शर्मा, अनिल बांदडा, मेहताब खान व शाहरूख खान ने अभिनय के जौहर दिखाए। आरंभ में अकादमी के सचिव महेश पंवार ने नाटक के निर्देशक करणी सिंह राठौड का सम्मान किया।

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