सरसों में बंपर तेजी, किसानों को मिला एमएसपी से ज्यादा मूल्य

- किसानों का तिलहन फसलों की ओर बढ़ रहा रुझान, आयातित तेल पर निर्भरता होगी खत्म

- जिले में 1.10 लाख हैक्टेयर में 2 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन

By: Amit Dave

Published: 15 Jun 2021, 11:02 PM IST

जोधपुर।

सरसों-रायड़ा में आई बंपर तेजी से किसानों के चेहरे खिले हुए है। अमूमन 3500-4000 रुपए क्ंिवटल बिकने वाला रायड़ा (काली सरसों) 5200 से 6300 के भाव बिक रहा। वहीं सरसों (पीली) 6100 से 7000 क्ंिवटल रुपए तक बिकी। सरकार ने रबी 2020-21 के लिए रायड़ा (काली सरसों) का समर्थन मूल्य 4650 रुपए प्रति क्ंिवटल तय किया था। इस रबी सीजन में जिले के तिंवरी-मथानिया, ओसियां, बावड़ी, बापिणी, फ लौदी आदि क्षेत्रों में 1 लाख हैक्टेयर से अधिक की बुवाई हुई थी। जहां 2 लाख मीट्रिक टन से अधिक उत्पादन हुआ।बढ़ रहा रुझान, तेल आयात पर निर्भरता कम होगीफ सल आवक के समय से ही बाजार में सरसों का बाजार भाव समर्थन मूल्य से ज्यादा था इस कारण किसानों को समर्थन मूल्य पर निर्भर नही रहना पड़ा और खुले बाजार में ही किसानों को सरसों के अच्छे भाव मिले। तिलहन फ सलों में आई तेजी से किसानों का रुझान इन फ सलों की ओर बढऩे की उम्मीद है। जिससे देश की खाद्य तेल आयात आवश्यकता पर निर्भरता कम होगी।

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देश में सर्वाधिक उत्पादन राजस्थान में

देश में सबसे ज्यादा सरसों का उत्पादन राजस्थान में करीब 35 लाख टन हुआ है। देश में कुल 89.50 लाख टन सरसों उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया गया।

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पॉम ऑयल के आयात को हतोत्साहित करना

विशेषज्ञों की मानें तो इस बार सरकार ने विदेशों से पाम ऑयल के आयात पर रोक लगा दी है। पाम ऑयल का इस्तेमाल रिफ ाइंड तेल बनाने में होता है। पाम ऑयल का आयात बंद है इसलिए सरसों के तेल की मांग बहुत अधिक हो गई है और सरसों के भाव आसमान छू रहे हैं। सरसों तेल 175 से 200 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है।

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अन्य खाद्य तेलों की मिक्सिंग को प्रतिबंधित करना भी तेजी का कारण

केन्द्र सरकार के खाद्य सुरक्षा प्रमाणन नियामक की ओर से सितम्बर 2020 में सरसों में 20 प्रतिशत तक अन्य खाद्य तेल की मिक्सिंग को प्रतिबंधित कर दिया गया था। लेकिन कंपनियों ने पुराने स्टॉक के उत्पादन का हवाला देकर कोर्ट में याचिका दायर की थी जिससे इसके लिए अतिरिक्त समय दिया गया। अब 6 जून से सरसों तेल में अन्य खाद्य तेलों की मिक्सिंग पूर्णतया प्रतिबंधित हो गई है। सरकार के इस कदम से उपभोक्ताओं को शुद्ध तेल मिलेगा, वहीं किसानों को फ सलों के सही कीमत मिल सकेगी।

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भारत बड़ी मात्रा में खाद्य तेल आयात करता है, ऐसे में अच्छे भाव रहने से तिलहन फ सलों के प्रति किसानों का रुझान बढ़ेगा, इससे किसानों व देश दोनों को फ ायदा होगा।

रतनलाल डागा, राष्ट्रीय जैविक प्रमुख

भारतीय किसान संघ

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रबी सीजन में 14 बीघा में 50 किंवटल सरसों का उत्पादन हुआ। पिछले 10 सालों में इस बार फ सल के अच्छे दाम मिले। सरकार फ सलों के भाव बढऩे से रोकने के लिए हस्तक्षेप नही करें तो किसानों को फ सल के हर बार सही दाम मिल सकेंगे।

श्रवण भादू, प्रगतिशील किसान

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