नेफेड को मूंग तुलवाकर कर अब पछता रहे किसान

नेफेड को मूंग तुलवाकर कर अब पछता रहे किसान
Farmers regretting after sold the moong

Pawan Kumar Pareek | Updated: 11 Apr 2017, 12:05:00 AM (IST) Jodhpur, Rajasthan, India

राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य के लालच में जिन किसानों ने अपने मंूग की उपज नेेफेड को बेची है, उन्हें अब पछतावा है, कई किसानों के घरों में शादी-ब्याह के आयोजनों की तैयारियां चल रही है, कइयों को अपनी बहनों, भाणजियों के यहां मायरा ले जाना है तो किसी परिवार में मौत हो जाने के पश्चात बारहवां करना है लेकिन ये किसान अपनी मंूग की उपज का भुगतान प्राप्त करने के लिए चक्कर काट रहे है।

 राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य के लालच में जिन किसानों ने अपने मंूग की उपज नेेफेड को बेची है, उन्हें अब पछतावा है, कई किसानों के घरों में शादी-ब्याह के आयोजनों की तैयारियां चल रही है, कइयों को अपनी बहनों, भाणजियों के यहां मायरा ले जाना है तो किसी परिवार में मौत हो जाने के पश्चात बारहवां करना है लेकिन ये किसान अपनी मंूग की उपज का भुगतान प्राप्त करने के लिए चक्कर काट रहे है।


राज्य सरकार ने वर्ष 2016-17 में किसानों से मूंग खरीदने के लिए 5225 रुपए प्रति क्विंटल मूल्य निर्धारित किए, जिस पर बिलाड़ा एवं आस-पास के किसानों ने नेफेड को 51 करोड़ की राशि के मूंग तुलवाए लेकिन मूंग की उपज तुलवाने के बाद भुगतान धीमी गति से मिला। अब भी करीब नौ सौ किसानों की 11 करोड़ की राशि बकाया है।

बीनावास के दुर्गाराम भींचर के नौ लाख रुपए बकाया है। इनके परिवार में लड़कियों की शादियां है। उसके लिए रुपयों की सख्त जरूरत है। भावी के मदनलाल पारासरिया के भी ढाई लाख रुपए बकाया है। 


उसे परिवार में मायरा लेकर जाना है। बीनावास का श्यामाराम मेघवाल सोमवार को सोसायटी के बाहर बैठा रो पड़ा कि उसके पिता की मृत्यु बारहवां करना है और उसे बकाया भुगतान नहीं मिल रहा है। 

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