scriptFCA's mockery flying in the waste of forest land | वनभूमि की बंदरबांट में उड़ रहा एफसीए का मखौल | Patrika News

वनभूमि की बंदरबांट में उड़ रहा एफसीए का मखौल

 

नहीं थम रहा वनभूमि पर अतिक्रमण, ऐसा ही चलता रहा तो खत्म हो जाएगा ग्रीन बेल्ट

जोधपुर

Updated: December 22, 2021 09:56:26 pm

जोधपुर. देश भर में वनों पर अतिक्रमण करने में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत को कड़ाई से रोकने के लिए बना वन संरक्षण अधिनियम-1980 (एफसीए) का मखौल जोधपुर में खुले आम उड़ाया जा रहा है। वर्ष 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 अक्टूबर 1980 को पूरे भारत में ही वन संरक्षण अधिनियम लागू किया। इस अधिनियम के तहत वन भूमि में किसी भी प्रकार का गैर वानिकी कार्य अथवा वन भूमि का किसी भी रूप में अतिक्रमण कर प्रयोग करने के लिए देश के सभी सरकारी विभाग के अधिकारियों यहां तक राज्य सरकार को भी भारत सरकार से स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया था। कानून के उल्लंघन पर दोषी पाए जाने वाले सरकारी अधिकारी को सीधे 15 दिन कारावास का प्रावधान किया गया। लेकिन यह कानून लागू होने के बावजूद वन अधिकारियों व वनकर्मियों की खुली मिलीभगत से वनभूमि की बंदरबांट कर कानून का खुला उल्लंघन हो रहा है।
वनभूमि की बंदरबांट में उड़ रहा एफसीए का मखौल
वनभूमि की बंदरबांट में उड़ रहा एफसीए का मखौल
वनभूमि पर विकास कार्य का स्वामी कौन
जोधपुर में वनभूमि पर 55 से अधिक कच्ची बस्तियां आबाद होकर 50 हजार से अधिक छोटे-बड़े अतिक्रमण हो चुके हैं। इन बस्तियों में भारत सरकार की अनुमति बिना सड़क निर्माण, पानी की लाइनें व हजारों की संख्या में बिजली के पोल पीएचईडी की ओर से वनभूमि पर पानी की टंकियों का निर्माण, जेडीए की ओर से विकास कार्य, जनप्रतिनिधियों की ओर विधायक कोष से करोड़ों के विकास कार्य करवाए जा चुके है। सवाल यह है कि वनभूमि पर विकास कार्य का मालिकाना हक किसके पास है इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
वैधानिक अस्तित्व कमजोर

वनविभाग का वैधानिक अस्तित्व कमजोर होने और वनभूमि का अमल दरामद (वनविभाग के नाम भू-रूपान्तरण) जानबूझ कर नहीं किया जा रहा है। जबकि तहसीलदारों और जिला कलक्टरों को 1998 में आदेश देने के बावजूद यह काम जानबूझ कर अभी तक कछुआ गति से चलाया जा रहा है।
नए अतिक्रमण केस --1
रावटी घोड़ा घाटी रोड पर वनचौकी बनी है और देवकुण्ड वन भूमि की सुरक्षा दीवार भी निर्मित है। लेकिन रावटी मेन रोड पर ही करोड़ों की लागत से बनी वन सुरक्षा को दीवार तोड़ कर दुकानें और मकान धड़ल्ले से निर्मित हो रहे है और वनविभाग के अधिकारी और वन रक्षक चुप है।
नए अतिक्रमण केस-2

भूतेश्वर वन क्षेत्र में राज्य मानवाधिकार आयोग ने अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए लेकिन अतिक्रमण दुगने हो गए। अब भूतेश्वर नर्सरी के सामने हो रहे अतिक्रमण हटाने को लेकर क्षेत्रीय विधायक सूर्यकांता व्यास मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग कर रही है।
जोधपुर में वन क्षेत्र की स्थिति
वन खंड की संख्या ----------- क्षेत्रफल हैक्टैयर में

87------------------------17829 (रक्षित )
156-----------------------5631 (अवर्गीकृत )

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