scriptForest department forgot to declare Jodhpur district's mascot | जोधपुर जिले का शुभंकर घोषित कर भूल गया वन विभाग | Patrika News

जोधपुर जिले का शुभंकर घोषित कर भूल गया वन विभाग

बजट अभाव में विभाग की ओर से एक भी जागरूकता कार्यक्रम नहीं,

पांच साल में सिर्फ दो सूचना पट्ट

जोधपुर

Published: December 31, 2021 09:21:33 pm

जोधपुर. वन विभाग की ओर से प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण एवं सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से प्रत्येक जिले में एक वन्यजीव को शुभंकर घोषित किए पांच साल से अधिक बीत चुके है लेकिन अधिकांश जिलों में इस दिशा में कार्य शून्य ही रहा है। वन अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए अलग से कोई बजट का प्रावधान नहीं है। शुभंकर दरअसल जिला वन्यजीव जिस तरह राष्ट्रीय पक्षी, राज्य पशु घोषित है उसी तरह वनविभाग ने प्रदेश के 33 जिलों में मार्च 2016 में अलग अलग जिला शुभंकर याने जिला वन्यजीव घोषित किया था। इसका चुनाव संबंधित जिले में पाए जाने वाले सर्वाधिक वन्यजीवों अथवा पक्षियों में से ही किया गया है । उदाहरण के लिए जयपुर में चीतल को व भरतपुर में सारस जिले का शुभंकर घोषित है। वन्यजीवों के जानकारी के लिए जागरूकता कार्यक्रम और स्कूलों तथा आमजन को वन्यजीवों की दुनिया से परिचित कराने की घोषणा की गई थी। वन्य जीवों के अस्तित्व पर लगातार मंडराते खतरे को देखते हुए संरक्षण की दिशा में शुभंकर बनाकर जिला प्रशासन व वन विभाग को यह जिम्मेदारी दी थी कि वे उन प्रजातियों के संरक्षण का प्रयास करें । इनमें अधिकांश पक्षी और वन्यजीव तो राजस्थान प्रदेश की पहचान है। पिछले पांच साल में पूरे जिले में वनविभाग की ओर से खींचन में दो सूचना पट्ट लगाने के अलावा किसी भी तरह का कोई जागरूकता कार्यक्रम नहीं हो पाया है।
जोधपुर जिले का शुभंकर घोषित कर भूल गया वन विभाग
जोधपुर जिले का शुभंकर घोषित कर भूल गया वन विभाग
जोधपुर जिले का शुभंकर कुरजां

अप्रवासी पक्षी कुरजां आगमन के लिए जिले का खींचन ग्राम इनके लिए प्रसिद्ध है । कुरजां को जोधपुर जिले का शुभंकर घोषित किया गया है । इनकी आंख लाल , चोंच हल्की हरे रंग की व सिरे पर लाल रंग की होती है । भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में इस पक्षी को शेड्यूल डी में रखा गया है ।
प्रदेश के जिलों के ये है शुभंकर

अजमेर जिले का खरमोर , अलवर का सांभर , बांसवाडा का जल पीपी, बारां का मगर , बाडमेर -मरु लोमड़ी , भीलवाडा का मोर , बीकानेर का भट्ट तीतर , बूंदी का सुर्खाब , चित्तौडगढ़़ का चौसिंगा , चूरू का कृष्ण मृग , दौसा का खरगोश , धौलपुर का पचीरा ( इण्डियन स्क्रीमर ) , डूंगरपुर का जांघिल , हनुमानगढ़ का छोटा किलकिला , जैसलमेर का गोडावण , जालोर का भालू , झालावाड़ का गागरोनी तोता , झुंझुनूं का काला तीतर , जोधपुर का कुरंजा , करौली का घडिय़ाल , कोटा का उदबिलाव , नागौर का राजहंस , पाली का तेन्दुआ , प्रतापगढ़ का उडऩ गिलहरी , राजसमंद का भेडिया , सवाईमाधोपुर का बाघ , श्रीगंगानगर का चिंकारा , सीकर का शाहीन , सिरोही का जंगली मुर्गी , टोक का हंस तथा उदयपुर जिले का शुभंकर कब्र बिज्जू घोषित है।
वाइल्डलाइफ वीक में होते है आयोजन दरअसल वाइल्ड लाइफ वीक में सभी तरह के वन्यजीवों और पक्षियों के प्रति आमजन में जागरूकता के कार्यक्रम होते है। वन्यजीव विशेषज्ञों के माध्यम से स्कूलों में जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम करवाएं जाएंगे। विजय बोराणा, उपवन संरक्षक वन्यजीव जोधपुर

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