scriptForest department forgot to declare wildlife as mascot | वन विभाग वन्यजीवों को शुभंकर घोषित कर भूल गया | Patrika News

वन विभाग वन्यजीवों को शुभंकर घोषित कर भूल गया

- बजट अभाव में विभाग की ओर से एक भी जागरूकता कार्यक्रम नहीं
- पांच साल में सिर्फ दो सूचना पट्ट

जोधपुर

Published: December 31, 2021 04:05:17 pm

जोधपुर. वन विभाग की ओर से प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण एवं सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से प्रत्येक जिले में एक वन्यजीव को शुभंकर घोषित किए पांच साल से अधिक बीत चुके है लेकिन अधिकांश जिलों में इस दिशा में कार्य शून्य ही रहा है। वन अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए अलग से कोई बजट का प्रावधान नहीं है।
वन विभाग वन्यजीवों को शुभंकर घोषित कर भूल गया
वन विभाग वन्यजीवों को शुभंकर घोषित कर भूल गया
शुभंकर है जिला वन्यजीव
जिस तरह राष्ट्रीय पक्षी, राज्य पशु घोषित है उसी तरह वनविभाग ने प्रदेश के 33 जिलों में मार्च 2016 में अलग अलग जिला शुभंकर यानि जिला वन्यजीव घोषित किया था। इसका चुनाव संबंधित जिले में पाए जाने वाले सर्वाधिक वन्यजीवों अथवा पक्षियों में से ही किया गया है । उदाहरण के लिए जयपुर में चीतल को व भरतपुर में सारस जिले का शुभंकर घोषित है। वन्य जीवों के अस्तित्व पर लगातार मंडराते खतरे को देखते हुए संरक्षण की दिशा में शुभंकर बनाकर जिला प्रशासन व वन विभाग को यह जिम्मेदारी दी थी कि वे उन प्रजातियों के संरक्षण का प्रयास करें।
जोधपुर जिले का शुभंकर कुरजां
अप्रवासी पक्षी कुरजां आगमन के लिए जिले का खींचन ग्राम इनके लिए प्रसिद्ध है । कुरजां को जोधपुर जिले का शुभंकर घोषित किया गया है इनकी आंख लाल , चोंच हल्की हरे रंग की व सिरे पर लाल रंग की होती है । भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में इस पक्षी को शेड्यूल डी में रखा गया है ।
प्रमुख जिलों के शुभंकर
जिला ------ शुभंकर वन्यजीव
अजमेर ---- खरमोर
अलवर ---- सांभर
बांसवाडा --- जल पीपी
बाडमेर ---- मरु लोमड़ी
भीलवाडा ---- मोर
बीकानेर ---- भट्ट तीतर
जैसलमेर ----- गोडावण
जालोर ----- भालू
झालावाड़ ---- गागरोनी तोता
जोधपुर ----- कुरंजा
कोटा ----- उदबिलाव
नागौर ----- राजहंस
पाली ------ तेन्दुआ
राजसमंद ---- भेडिया
सीकर ----- शाहीन
सिरोही ----- जंगली मुर्गी
उदयपुर ---- कब्र बिज्जू
वाइल्डलाइफ वीक में होते हैं आयोजन
दरअसल वाइल्ड लाइफ वीक में सभी तरह के वन्यजीवों और पक्षियों के प्रति आमजन में जागरूकता के कार्यक्रम होते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के माध्यम से स्कूलों में जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम करवाए जाएंगे।
- विजय बोराणा, उपवन संरक्षक वन्यजीव जोधपुर

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