जेनेवा बैठक पर टिका हजारों हस्तशिल्पियों का भविष्य

जेनेवा बैठक पर टिका हजारों हस्तशिल्पियों का भविष्य

Amit Dave | Publish: Jun, 18 2019 10:24:13 PM (IST) Jodhpur, Jodhpur, Rajasthan, India

- भारत से शीशम उत्पादों के निर्यात का फैसला जेनेवा में

- 16 अगस्त को जेनेवा में होगी साइटस की बैठक

- संयुक्त राष्ट्र संघ की सिक्योरिटी टीम ने श्रीलंका को बताया असुरक्षित

जोधपुर।

शीशम की लकड़ी की नक्काशी और चमक जो फिकी हो गई थी, अब पुन: लौटाने के लिए हस्तशिल्पियों को जेनेवा (स्विट्जरलेण्ड) से काफी उम्मीदें है। करोड़ों का निर्यात एक बैठक में मिलने वाली स्वीकृति पर टिका है। जेनेवा में होने वाली अन्तरराष्ट्रीय संस्था कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एनडेंजर्ड ऑफ वाइल्ड फ ाउना एंड फ्लोरा (साइटस) की बैठक में यदि इसे हरी झंडी मिलती है तो एक बार फिर शीशम की लकड़ी भारत ही नहीं विदेशों में भी अपनी धाक पुन: जमा लेगी। पिछले दो वर्ष से साइटस की ओर से शीशम की लकड़ी पर बेन लगाने के बाद निर्यात घट गया। 16 अगस्त को जेनेवा में बैठकसाइटस की 18वीं कन्वेंशन मीटिंग 16 से 28 अगस्त को जेनेवा शहर के पाले एक्सपो सेन्टर में आयोजित होगी। इस मीटिंग में भारत से शीशम की लकड़ी से बने उत्पादो के निर्यात पर फैसला होना है। श्रीलंका में 21 अप्रेल को हुए आतंकी हमले की वजह से साईटस की मई माह में होने वाली बैठक को स्थगित कर दिया गया था। बाद में युनाइटेड नेशन्स की सिक्योरिटी टीम ने श्रीलंका के हालात का जायजा लेते हुए साइटस मीटिंग के लिए श्रीलंका को असुरक्षित बताया था। इस मीटिंग में करीब 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल होने थे। बाद में साइटस ने अपने मुख्यालय जेनेवा में मीटिंग कराने का निर्णय लिया।

40 हजार हस्तशिल्पी प्रभावित

हस्तशिल्पियों के अनुसार, किसी समय अर्श पर रहने वाला शीशम लकड़ी का उद्योग फर्श पर आ गया है । जोधपुर व आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न लकडि़यों पर काम करने वाले करीब 1 लाख से ज्यादा कारीगर है। इनमें केवल शीशम की लकड़ी पर नक्काशी व कलात्मक कारीगरी करने वाले करीब 40 हजार हस्तशिल्पी है, जो बेन लगने के बाद सीधे रूप से प्रभावित हुए है। साइटस की ओर से शीशम को लकड़ी की विलुप्त होती प्रजाति मानते हुए 2 जनवरी 2017 से शीशम की लकड़ी के व्यवसायिक गतिविधियों व निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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जोधपुर से शीशम उत्पादों की निर्यात स्थिति

माह-वर्ष-------------------- कंटेनर्स----- निर्यात राशि (करोड़ रुपए )

जनवरी - दिसम्बर 2016 ---करीब 8500 --- 1000

जनवरी - दिसम्बर 2017 --- करीब 3900 --- 550

जनवरी - दिसम्बर 2018 --- करीब 2850--- 400

जनवरी- अप्रेल 2019 तक--- करीब 800 ---- 100

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जोधपुर के कलात्मक हैण्डीक्राफ्ट फर्नीचर के लिए शीशम की लकड़ी आम व बबूल से ज्यादा बढि़या है। इपीसीएच, नीति आयोग व वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के साझा सहयोग से हम शीशम पर रोक हटाने का प्रयास कर रहे है ।

डॉ. भरत दिनेश, अध्यक्ष जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन

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