निर्यातकों के लिए खुशखबरी, धोखाधड़ी से बचने के लिए पढ़े यह खबर

एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन पर बढ़ रहा निर्यातकों का भरोसा, लाखों के दावे निपटा रही ईसीजीसी

By: Deenbandhu Vashisth

Published: 25 Apr 2018, 12:37 PM IST

जोधपुर में 80 प्रशिशत से ज्यादा निर्यातक ईसीजीसी के क्लाइंट

जोधपुर. विश्वव्यापी मंदी के दौर में हैण्डीक्राफ्ट निर्यातकों का एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (ईसीजीसी ) पर भरोसा बढ़ गया है। कई मामलों में निर्यातकों को विदेशों में भेजे अपने भेजे हुए माल का भुगतान नही मिल पाता । कभी कंपनी दिवालिया हो जाती है, तो कभी खरीदार ही किसी परिस्थिति के चलते भेजा हुआ माल लेने से इनकार कर देता है। ऐसे में निर्यातकों को अपना पैसा डूबता हुआ नजर आता है, लेकिन ईसीजीसी से क्रेडिट गारंटी लेने के बाद निर्यातक निश्चित हो सकते हैं कि उनका पैसा नहीं डूबेगा।

 

2003 में खुली जोधपुर ब्रांच
एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की जोधपुर में 2003 में ब्रांच खुली थी । उस समय इसके 30 क्लाइंट थे, जिनकी संख्या आज बढ़ कर 400 से ज्यादा हो गई है। इसमें से करीब 80 प्रतिशत हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक हैं। जोधपुर ब्रांच अब तक कई कंपनियों के दावे सफलतापूर्वक निपटा चुकी है। इनमें उन बैंकों का क्लेम भी शामिल है, जो निर्यातकों ने बायर से तो ले लिया, लेकिन बैंक में जमा नहीं कराया ।

 

ईसीजीसी बायर्स की गारंटी देता है

ईसीजीसी के एक अधिकारी के अनुसार, माल निर्यात करते समय बायर कई बार भुगतान नहीं कर पाते। ऐसे में निर्यातकों को अपना भुगतान लेने में बहुत परेशानी होती है। यदि खरीदार भेजा हुआ माल नहीं लेता है, तो उसे लौटाना भी बहुत खर्चीला होता है। जनरल इंश्योरेंस भी कमोडिटी बीमा करता है लेकिन वह कमोडिटी के फि जिकल लॉस से सम्बन्धित होता है। माल बेचने के बाद पेमेंट नहीं आना या कन्साइनमेंट पूरा नहीं होने पर जनरल इंश्योरेंस की कोई जिम्मेदारी नहीं होती। ईसीजीसी निर्यातकों को बायर्स की गारंटी देता है, ताकि ऐसी स्थिति में निर्यातकों का पैसा नहीं रुके।

 

 

सुरक्षित हुई निर्यातकों की राशि
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. भरत दिनेश के अनुसार ईसीजीसी की जोधपुर ब्रांच खुले हुए 15 साल हो गए हैं, लेकिन पिछले 3-4 साल में ईसीजीसी पर भरोसा बढ़ा है। इससे जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट निर्यातकों की राशि सेफ हो गई है। बायर कंपनी दिवालिया होने की स्थिति में पॉलिसी के अनुसार 80 से 90 प्रतिशत तक भुगतान किया जाता है । माल स्वीकार नहीं करने पर या तो माल वहीं सस्ता बेचने की सलाह दी जाती है और नुकसान ईसीजीसी वहन करती है या फि र लौटाने का सारा खर्चा दिया जाता है। इसलिए नए निर्यातकों को तो पूरा टर्नओवर ही इंश्योर्ड कराना चाहिए।

 

क्या है ईसीजीसी?

केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधीन 1957 में ईसीजीसी की स्थापना हुई, जो निर्यातकों को निर्यात क्रेडिट इंश्योरेंस और गारंटी सुविधा देता है। ईसीजीसी निर्यात संवद्र्धन संगठन है, जो भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धी योग्यता प्रोत्साहित करने के लिए बनाया गया है। भारत में कम से कम प्रीमियम पर दिया जाने वाला क्रेडिट इंश्योरेंस और गारंटी सपोर्ट दूसरे कई देशों की तुलना में बेहतर है।

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