scriptGovernment School of Khangta | सांसद के गोद लेने के बावजूद ऊंचाई नहीं छू पाया खांगटा का सरकारी स्कूल | Patrika News

सांसद के गोद लेने के बावजूद ऊंचाई नहीं छू पाया खांगटा का सरकारी स्कूल

पंचायत समिति का सीमावर्ती गांव खांगटा का राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सबसे पुराने सरकारी विद्यालयों में शुमार होने के बावजूद वो विकास नहीं कर पाया जिसकी छात्रों को उम्मीद थी। प्रधानमंत्री के आह्वान पर खांगटा गांव सांसद विकास योजना में चयनित होने के बावजूद इसके आदर्श विद्यालय का सपना पूरा नही हो सका।

जोधपुर

Published: January 11, 2022 11:26:54 pm

पीपाड़सिटी (जोधोपुर) . पंचायत समिति का सीमावर्ती गांव खांगटा का राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सबसे पुराने सरकारी विद्यालयों में शुमार होने के बावजूद वो विकास नहीं कर पाया जिसकी छात्रों को उम्मीद थी। प्रधानमंत्री के आह्वान पर खांगटा गांव सांसद विकास योजना में चयनित होने के बावजूद इसके आदर्श विद्यालय का सपना पूरा नही हो सका।
सांसद के गोद लेने के बावजूद ऊंचाई नहीं छू पाया खांगटा का सरकारी स्कूल
सांसद के गोद लेने के बावजूद ऊंचाई नहीं छू पाया खांगटा का सरकारी स्कूल
राज्यसभा के तत्कालीन सदस्य रामनारायण डूडी ने खांगटा गांव को दो वर्षों तक गोद ले रखा था, फिर भी केंद्र या राज्य सरकार की ओर से कोई लाभ नहीं मिल सका। जबकि इस विद्यालय के छह सौ से अधिक छात्र शिक्षा प्राप्त कर भारतीय सेना और केंद्रीय पैरामिलिट्री फोर्स में शामिल होकर देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

खांगटा के इस विद्यालय की स्थापना सन 1954 में प्राथमिक स्कूल के रूप में की गई थी। उसके बाद उच्च प्राथमिक बना, फिर राज्य सरकार की पंचायत मुख्यालयों पर माध्यमिक और उसके बाद सन 2016 में सीनियर उच्च माध्यमिक विद्यालय के रूप में क्रमोन्नत हो सका। वर्तमान में इस विद्यालय में कुल चौबीस पद स्वीकृत हैं, जिनमे 19 पद पर स्टाफ कार्यरत है। यहां 258 नामांकन हैं, इनमें छात्राओं की संख्या पिचहतर है। कोरोना काल से पहले यहां 358 का नामांकन था, लेकिन मर्ज राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय को पुन: शुरू करने से 108 छात्राओं को स्थानांतरित कर दिया गया है।
जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार

चुनावों के समय में इस विद्यालय के आगे बने चौक में वर्षों तक चुनावी सभाएं हुई हैं। सांसद पीपी चौधरी के निर्वाचन क्षेत्र की प्रमुख पंचायत के खांगटा गांव के इस विद्यालय की हालत ये है कि आज तक इसके भवन का पट्टा तक जारी नहीं हो सका। कई सांसद, विधायक अपने कार्यकाल में विद्यालय में आए लेकिन कुछ नहीं हो पाया। छात्रों व अभिभावकों की प्रमुख मांग कृषि संकाय की है जो आज तक पूरी नहीं हो सकी। खेल मैदान के अभाव में खेल प्रतिभाओं को अपना कौशल दिखाने का मौका नहीं मिल रहा हैं, अब पंचायत प्रशासन ने अलग से खेल मैदान का बीड़ा उठाया है।
भामाशाहों पर आश्रित

विद्यालय में मिड डे मील, गार्गी पुरस्कार, साइकिल योजना के अलावा पृथक से किसी योजना का लाभ छात्रों को नहीं मिला है। विद्यालय विकास में गांव के भामाशाहों के साथ स्कूल से सेवानिवृत्त शिक्षकों ने कम्प्यूटर सेट, इन्वर्टर सहित अन्य आवश्यक सामग्री भेंट की है। भवन का रंग रोगन भी ग्रामीणों के सहयोग से पूरा किया जा सका। छात्राओं के लिए पृथक से शौचालय भी ग्राम पंचायत ने स्वच्छ भारत मिशन में बनाया। अब छात्रों के साथ अभिभावकों की प्रमुख मांग कृषि संकाय खोलने की हैं, ताकि स्कूल में नामांकन बढ़ोतरी के साथ कायाकल्प हो सके।
इन्होंने कहा

खांगटा के राउमावि में कृषि संकाय खोलने की राज्य सरकार से मांग की गई,अगर ये खुले तो ही छात्रों को लाभ मिल सकेगा।

-प्रकाश बोराणा, सरपंच, खांगटा

जिले के सबसे पुराने विद्यालयों में एक होने के बाद भी यहां कला संकाय ही है, अब कृषि के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
-पुखराज गर्ग,विधायक भोपालगढ़

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