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Green Energy: ग्रीन एनर्जी की बलिवेदी पर हरियाली की चढ़ रही बलि, जाने कैसे

Green Energy: जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर समेत कई जगह सोलर प्लांट के लिए कट रहे सैकड़ों पेड़

जोधपुर

Published: June 16, 2022 02:31:31 pm

Green Energy: सुरेश व्यास/जोधपुर। सौर ऊर्जा उत्पादन में भले ही राजस्थान सिरमौर बन रहा हो, लेकिन संयंत्र लगाने में निजी कम्पनियों के अचानक बढ़े प्रवाह से पर्यावरण प्रभावित होने का खतरा भी खड़ा होने लगा है। संयंत्र लगाने के लिए राज्य वृक्ष खेजड़ी ही नहीं, पश्चिम राजस्थान की जैव विविधता में अहम भूमिका निभाने वाले जाल, केर-कूमट व बोरड़ी के पेड़ भी बड़ी संख्या में काटे जा रहे हैं। इसके विरोध में जोधपुर, जैसलमेर व बीकानेर जिलों में लोग सड़कों पर उतरने लगे हैं तो पर्यावरणविद् भी पेड़ों की कटाई और इससे पश्चिम राजस्थान की जैव विविधता पर पड़ रहे असर पर चिंता जता रहे हैं। इनका कहना है कि ग्रीन एनर्जी की बलिवेदी पर हरियाली की बलि शुभ संकेत नहीं है।
Green Energy: ग्रीन एनर्जी की बलिवेदी पर हरियाली की चढ़ रही बलि, जाने कैसे
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जानकारों का कहना है कि राजस्थान में अभी सूरज की रोशनी से 13,156.61 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है, इसमें से अकेले 11,228.35 मेगावाट जमीन पर लगे सौर ऊर्जा संयंत्रों से उत्पादित हो रही है। एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश में लगभग साढ़े तीन लाख बीघा जमीन सौर ऊर्जा संयंत्रों के काम आ रही है।

जमीन में दफना दी खेजड़ी
जोधपुर के बाप इलाके में बड़ी सिड्ड गांव में आठ सोलर प्लांट के लिए करीब 25 हजार बीघा जमीन किराए पर ली गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट स्थापित करने के लिए खेजड़ी के करीब 40 फीसदी पेड़ काटे जा चुके हैं। ग्रामीणों की शिकायत पर बाप के तहसीलदार ने बड़ी सिड्ड पंचायत के मोडेरी नाडी के पास जेसीबी से खुदाई करवाई तो जमीने गाड़े हुए खेजड़ी के पेड़ मिले।

ओरण भी चपेट में
जैसलमेर के फतेहगढ़ उपखंड इलाके के देवीकोट, रासला, मूलाना, देवड़ा, झिनझिनयाली, म्याजलार और रामगढ़ क्षेत्र के पारेवर, बांधा गांवों में सोलर ऊर्जा के संयंत्रों का कार्य चल रहा है। पोकरण के विभिन्न गांवों में 17 प्लांट लग चुके हैं और चार पर काम चल रहा है। इनके लिए ओरण व अन्य जगहों से हजारों की संख्या में पेड़ काटने की बात सामने आ रही है। अकेले फतेहगढ़ के दवाड़ा गांव में खेजड़ी, केर, कूमट व जाल के 111 पेड़ काटने और 51 पेड़ जाने का उल्लेख तो पटवारी ने अपनी मौका रिपोर्ट में किया है।

दिखने लगा असर
सौर ऊर्जा संयंत्रों का पर्यावरण पर प्रतिकूल असर दिखने लगा है। बीकानेर के महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के छात्र जतिन वर्मा ने "थार मरुस्थल में सोलर प्लांट से आस पास के पर्यावरण व जैवविविधता में आए बदलाव का अध्ययन" विषयक शोध में पाया कि सोलर प्लांट से वातावरण का तापमान दो से तीन डिग्री पढ़ रहा है। इन प्लांट् के 50 मीटर के दायरे में मधुमक्खी, ततैया, मड़वास्प एवं तितलियां अब नहीं दिखती। प्लांट के आसपास किसी पक्षी का घोंसला भी नहीं है। सांप, गो, सांडा, चूहों आदि के प्राकृतआवास भी नजर नहीं आते।
photo_2022-06-16_12-12-13.jpgएक्सपर्ट कमेंट-
एनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट जरूरी
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय किसी भी विकास परियोजना के लिए "एनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट" करवाता है, लेकिन थार मरुस्थल में सौर व पवन ऊर्जा परियोजनाओ के लिए कोई एनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट नहीं करवाया जाता है। इन परियोजनों में पर्यावरणीय नियमों की लगातार अनदेखी हो रही है। इससे मरुस्थल की जैविक संपदा, जल संसाधनों, स्थानीय वनस्पति और जीव-जंतुओं को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर के कई हिस्सों में संयंत्रों के लिए खेजड़ी, जाल, रोहिडा, बेर व केर-कूमट आदि स्थानीय प्रजाति के पेड़ों को जड़ से उखाड़ा जा रहा है। इससे स्थानीय जैव विविधता को बहुत नुकसान पहुंच रहा है। पक्षियों, सरीसृपों, स्तनधारी जीवों को आश्रय स्थल उपलब्ध नहीं हो पाते। छोटे कीट पतंगे विशेषकर मधुमक्खियां, तितलियां, आदि की आबादी में अप्रत्याशित कमी आई है। किसान मित्र कीट-पतंगों की संख्या में कमी से कई किसानों को अप्राकृतिक परागण करवाना पड़ रहा है। यह आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आएगा।
-प्रो. अनिल कुमार छंगाणी,
विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान विभाग, महाराजा गंगासिंह विवि, बीकानेर

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