जोधपुर ( jodhpur news current news ).आप सभी को हैप्पी होली ( Happy Holi 2020 )। शहर की आबादी बढऩे और विस्तार होने के साथ ही अधिक पानी की आवश्यकता पडऩे लगी है। होली ( Holi Latest News ) के त्योहार ( Holi 2020 ) पर पानी के लिए प्रबंधन करना सरकार,प्रशासन और जल संसाधन विभाग के साथ साथ स्वयंसेवी संस्थाओं और आम बाशिंदों का भी कर्तव्य है। एेसे में शहर के सभी मोहल्लों और कॉलोनियों में नये जलाशय बनाना जरूरी हो गया है। होली के त्योहार पर ( Holi news in hindi ) प्रख्यात आर्किटेक्ट ( architect ) अनु मृदुल ( anu mridul ) मरुधरा में पानी के मोल के बारे में बता रहे हैं ( Latest NRI news in hindi ) :

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लोगों को यह समझना चाहिए कि जिस तरह हमारे पुरखों ने पानी की बचत करने की परंपरा डाली थी, हमें भी बुजुर्गों की उस परंपरा का निर्वाह करना चाहिए। होली के त्योहार पर आप न केवल आप पानी की बचत करें, बल्कि घर-घर ,मोहल्ला-मोहल्ला और कॉलोनी-कॉलोनी में पानी की बचत करने के लिए लोगों को प्रेरित भी करें। पानी की यह थोड़ी -थोड़ी बचत ही हमें कल काम आने वाला जल सहेजने के लिए संस्कारित करेगी। एक अहम तथ्य यह है कि देश में लगभग दो तिहाई वर्षा जल व्यर्थ बहता है और शहरी क्षेत्रों में पानी की कुल खपत व्यर्थ जाने वाले वर्षा जल से बहुत कम है। यह बात हतोत्साहित करने वाली है, लेकिन इसी में बहुत बड़ी आशा भी निहित है। इस संदर्भ में, मैं एक परिदृश्य साझा करना चाहूंगा, जो यह इंगित करता है कि जल के मामले में जोधपुर में जल स्वावलम्बी होने की कितनी अपार संभावनाएं हैं।

पिछली शताब्दी के शुरुआत में जोधपुर की जनसंख्या एक लाख से भी कम थी और उनके लिए लगभग 400 जलाशय उपलब्ध थे। बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक दौर में जब पाइप से घर-घर में असीमित पानी कीसप्लाई शुरू हुई, तब नये जलाशय बनाने का सिलसिला टूटा। अंग्रेजी शासन व स्वाधीनता के बाद वृहद जल परियोजनाओं के कारण सैकड़ों बरसों की समृद्ध जल विरासत को न सिर्फ उपयोग में लेना बंद कर दिया, बल्कि उनकी घोर उपेक्षा भी हुई। इन 100 बरसों के अंतराल में ये खण्डहर में तब्दील हो गए और कचरे के पात्र बन कर रह गए। विडंबना रही कि दो पूरी पीढि़यां इनकी महत्ता जाने बिना बड़ी हुई।

जोधपुर के 2031 के प्रस्तावित मास्टर प्लान में जनसंख्या 31 लाख व पानी की मांग 200 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन आंकी गई है। इसलिए 31 लाख लोगों के लिए 62 करोड़ लीटर पानी प्रति दिन की मांग बनती है।इस प्रस्तावित मास्टर प्लान में सन 2031 में जोधपुर के लिए पुराने और नया प्रस्तावित क्षेत्रफल पर बरसते 362 मिमी वर्षावार्षिक औसत से प्राप्त कुल पानी का महज 15 प्रतिशत कुल जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है और अगर वेस्ट वॉटर रिसाइकल कर के काम में लें तो यह प्रतिशत आधा रह जाएगा। ये आंकड़े अनुपातिक दृष्टि से संपूर्ण देश के लिए भी सही ठहरते हैं और इसीलिए जल संकट से उबरने के लिए यह अति आवयश्क हो गया है कि इन आंकड़ों में जो इंगित है, हमें इस दिशा में सोचना चाहिए। हमें अपनी पारम्परिक जल विरासत पुन: अपना कर आगे बढऩा चाहिए और पानी की समस्या का समाधान जो मूलत: इस शहर के घट घट में निहित है, क्या उसे ढूंढने हमें वन-वन भटकना चाहिए? बहरहाल इस होली पर हमें जलस्रोतों की सार संभाल के साथ ही पानी की बचत करने का पूरा-पूरा प्रयास करने का प्रण करना होगा।

( जैसा प्रख्यात आर्किटेक्ट अनु मृदुल ने पत्रिका के एम आई जाहिर को बताया। )

 Holi 2020

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