निलंबित आईएएस निर्मला मीना पर गिरफ्तारी की तलवार, घर से पति भी गायब

निलंबित आईएएस निर्मला मीना पर गिरफ्तारी की तलवार, घर से पति भी गायब

santosh trivedi | Publish: Apr, 17 2018 06:51:36 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2018 06:55:01 PM (IST) Jodhpur, Rajasthan, India

अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद निलंबित आईएएस व तत्कालीन जिला रसद अधिकारी निर्मला मीना पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है।

जोधपुर। आठ करोड़ रुपए के पैंतीस हजार क्विंटल गेहूं का गबन करने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद निलंबित आईएएस व तत्कालीन जिला रसद अधिकारी निर्मला मीना पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है।

याचिका खारिज होने के बाद मंगलवार अपराह्न भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पीडब्ल्यूडी कॉलोनी में मीना के सरकारी आवास पहुंची, लेकिन पति-पत्नी गायब मिले। एसीबी ने आवास पर नोटिस चस्पां कर मीना और उनके पति को बुधवार सुबह ग्यारह बजे एसीबी की ग्रामीण चौकी में अति आवश्यक रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस अधीक्षक (एसीबी) अजयपाल लाम्बा के अनुसार, प्रकरण में निलंबित आईएएस निर्मला मीना आरोपी है। हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। प्रकरण में उनसे और पति पवन मित्तल से कई बिन्दुओं पर पूछताछ की जानी है।

जांच अधिकारी व पुलिस निरीक्षक मुकेश सोनी के नेतृत्व में एसीबी अपराह्न में पीडब्ल्यूडी कॉलोनी स्थित मीना के सरकारी आवास पहुंची, लेकिन वहां न तो मीना मिली और न ही उनके पति पवन मित्तल।

एेसे में जांच अधिकारी सोनी ने सरकारी आवास पर एक नोटिस चस्पां किया, जिसमें मीना व पति पवन मित्तल को बुधवार सुबह ग्यारह बजे एसीबी की ग्रामीण चौकी में आवश्यक रूप से उपस्थित होने को सूचित किया गया है।

अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने पर गायब एसीबी का कहना है कि प्रकरण में निलम्बित आईएएस मीना के अलावा उनके पति पवन मित्तल से भी पूछताछ की जानी है। इसीलिए मीना के साथ पति को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

तीन-चार महीने बाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होते ही दोनों गायब हो गए हैं। दोनों सरकारी आवास पर नहीं मिले। एसीबी को पति मित्तल से भी पूछताछ करनी है। उसके बाद ही उनकी भूमिका स्पष्ट हो पाएगी।

अब तक सिर्फ आटा मिल मालिक गिरफ्तार, तीन फरार
जिला रसद विभाग ने मार्च 2016 में अचानक पैंतीस हजार बीपीएल परिवार की संख्या में बढ़ोतरी बताकर तैंतीस हजार क्विंटल अतिरिक्त गेहूं मंगवा लिया था। जिसकी लागत करीब आठ करोड़ रुपए थी, लेकिन इसका वितरण बीपीएल लोगों को नहीं किया गया।

आश्चर्यजनक रूप से इसके बाद वाले माह में बीपीएल परिवार की संख्या फिर से कम हो गई थी। जांच में घोटाले की पुष्टि होने पर एसीबी ने आईएएस मीना के साथ आटा मिल संचालक स्वरूप सिंह राजपुरोहित, ठेकेदार सुरेश उपाध्याय व रसद विभाग के क्लर्क अशोक पालीवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। एसीबी अब तक सिर्फ आटा मिल मालिक स्वरूप सिंह को ही गिरफ्तार कर पाई है। शेष तीनों गायब है।

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