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राज्य पक्षी गोडावण को बर्ड फ्लू प्रकोप से बचाने के लिए अभेद्य सुरक्षा

 

भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक और वनविभाग की टीमें मुस्तैद

 

जोधपुर

Published: November 18, 2021 12:28:34 pm

नंदकिशोर सारस्वत

जोधपुर. राज्य पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड गोडावण को पश्चिमी राजस्थान में तेजी से फैल रहे बर्ड फ्लू संक्रमण से बचाने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों और वनविभाग की टीमें पशुपालन विभाग के सहयोग से दिन रात जुटी हैं। जैसलमेर के गोडावण विचरण क्षेत्र के वॉटर पॉइंट सतर्कता बरतने के निर्देश हैं। जोधपुर और पाली जिले में जिस तरह शीतकालीन प्रवास पर आने वाले पक्षी कुरजां में बर्ड फ्लू का खतरा और मौतें हुई हैं, उनका ध्यान रखते हुए जैसलमेर जिले के लाठी व रामगढ़ के कुरजां के पड़ाव स्थलों पर विशेष सर्तकता व सघन मॉनेटरिंग की जा रही है।
राज्य पक्षी गोडावण को बर्ड फ्लू प्रकोप से बचाने के लिए अभेद्य सुरक्षा
राज्य पक्षी गोडावण को बर्ड फ्लू प्रकोप से बचाने के लिए अभेद्य सुरक्षा
क्लोजर एरिया में ही वॉटर पाइंट
डेजर्ट नेशनल पार्क सेंचुरी में वनविभाग ने गोडावण विचरण क्षेत्रों में राज्य पक्षियों के लिए अलग से वॉटर पाइंट का निर्माण करा रखा है। यदि बर्ड फ्लू प्रभावित कोई भी मृत पक्षी मिलता है तो तुरंत पशुपालन विभाग को सूचित करेंगे।
गोडावण चूजों के लिए अभेद्य सुरक्षा

जैसलमेर के सम क्षेत्र में अस्थाई रूप से स्थापित कृत्रिम हेचिंग सेंटर में गोडावण के चूजों का बाहरी दुनिया से बिल्कुल भी संपर्क नहीं है। एक तरह से चूजों के लिए अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था की गई है। सेंटर के सुरक्षित परिसर के आसपास कोई बर्ड फ्लू प्रभावित पक्षी पहुंचने की संभावना ना के बराबर है।
कपिल चन्द्रावल, उपवन संरक्षक (वन्यजीव ) जैसलमेर
राज्य पक्षी के असामान्य व्यवहार पर 24 घंटे निगरानी

इन दिनों पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर व पाली जिले में पक्षियों में तेजी से फैल रही बर्ड फ्लू महामारी से बचाव के लिए गोडावण प्रोजेक्ट में कार्यरत भारतीय वन्यजीव संस्थान के वेटेनरी वैज्ञानिक डॉ. श्रवणसिंह राठौड़ वनविभाग की टीम दूरबीन के साथ गोडावण विचरण स्थलों में राज्य पक्षी के असामान्य व्यवहार व अन्य गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रखे हुए है।
तीन अंकों में गोडावण
पूरे विश्व में तेजी से विलुप्त हो रहे राज्य पक्षी गोडावण अब जैसलमेर जिले के सम और पोकरण रेंज में नाम मात्र की संख्या में ही बचे है। जैसलमेर के सम क्षेत्र में अस्थाई रूप से स्थापित कृत्रिम हेचिंग सेंटर मे 16 गोडावण चूजों सहित गोडावण की कुल संख्या मात्र तीन अंकों के आसपास ही है।

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