राव जोधा की बसाई 562 साल पुरानी सूर्यनगरी पर महानगर का मुलम्मा

- नीले घर-संकड़ी गलियों वाले शहर में अब अट्टालिकाओं का अट्टहास
-विस्तार हुआ, लेकिन पूरी नहीं हुई विकास की आस

By: Jay Kumar

Published: 13 Sep 2021, 10:59 AM IST

सुरेश व्यास/जोधपुर। राठौड़ शासक राव जोधा के हाथों ५६२ साल पहले बसी सूर्यनगरी आज भी दुनिया में भले ही ब्ल्यू सिटी के नाम से पहचानी जाती हो, लेकिन अब इस प्राचीन शहर के वैभव पर चारों ओर बनी अट्टालिकाएं (बहुमंजिला इमारतें) अट्टहास करती नजर आती हैं। चिडिय़ानाथ जी की टूंक पर समुद्रतल से करीब २४० मीटर ऊंचाई पर बने मेहरानगढ़ की प्राचीर या शहर की मसूरिया पहाड़ी से देखने पर शहर के चारों ओर बहुमंजिला इमारतें नजर आती हैं। नीले रंग का आकर्षण मेहरानगढ़ की तलहटी में बसे कुछ इलाकों में ही दिखता है।
रियासतकाल में शहर परकोटे के भीतर बसा था। छह दरवाजों सोजतीगेट, जालोरीगेट, सिवांचीगेट, चांदपोल, नागौरीगेट और मेड़तीगेट के बाहर हालांकि सत्तर के दशक और बाद में सरदारपुरा, पावटा पोलो, प्रतापनगर, कमला नेहरू नगर, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड, भगत की कोठी, सरस्वती नगर, बासनी व मधुबन आदि इलाकों में आवासीय बस्तियां अस्तित्व में आ गई, लेकिन पिछले दशक से पहले शहर में बंगलों व स्वतंत्र मकानों का ही क्रेज था। बाद में बहुमंजिला इमारतें बननी शुरू हुई तो अब पाली, बाड़मेर, जैसलमेर व नागौर रोड जैसे बाहरी इलाकों में विस्तार के साथ-साथ घनी आबादी में आ चुके सरदारपुरा, शाीनगर व पावटा जैसे इलाकों में भी बहुमंजिला इमारतों के साथ फ्लैट संस्कृति का उदय हो चुका है।

सरकारी एजेंसियां भी आई आगे
पिछले एक दशक में ही शहर में ११० बहुमंजिला इमारतें बन चुकी हैं और कई नए इलाकों में करीब चार दर्जन से ज्यादा हाईराइज बिल्डिंग्स आवासीय योजनाओं का निर्माण चल रहा है। निजी क्षेत्र ही नहीं, आवासन मंडल जैसी सरकारी एजेंसी भी चौपासनी व कुड़ी भगतासनी योजनाओं में सैकड़ों आवासीय फ्लैट बनाकर बेच चुकी हैं। जोधपुर विकास प्राधिकरण ने भी सांगरिया व कई अन्य इलाकों में फ्लैट बनाए हैं।

चारों ओर फैला शहर
पाली रोड पर मोगड़ा से आगे, बाड़मेर रोड पर गांगाणा व झंवर, जैसलमेर बाइपास पर चौखा के आगे तक, नागौर रोड पर करवड़ के आगे तक, शिकारगढ़ रोड पर बाइपास तक और जयपुर रोड पर बनाड़-नांदड़ी तक बसी नई कॉलोनियों और टाउनशिप में रहवास करने लगे हैं। बड़ली में नगर निगम की गांधीनगर योजना और पाली रोड पर मोगड़ा में जेडीए आवासीय योजनाएं लॉन्च कर चुका है।

विस्तार के साथ विकास भी हो
शहर का विस्तार जिस रफ्तार से हुआ है, उस रफ्तार से विकास नहीं हो सका है। आज भी शहर के बाहरी इलाकों में बसी बस्तियों में आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। साठ से ज्यादा नई कॉलोनियों में पेयजल लाइन व सीवरेज सुविधा तक नहीं है। इन इलाकों में चौड़ी सडक़ें तो दिखती हैं, लेकिन परिवहन के साधन नहीं के बराबर हैं। जेडीए के मोबेलिटी प्लान में हालांकि मैट्रो ट्रेन जैसे सपने भी दिखाए गए हैं, लेकिन अभी तो बीआरटीएस भी पूरी तरह से विकसित नहीं हो सका है। जो लोग बाहरी इलाकों में जा बसे हैं, उनमें से अधिकांश को निजी संसाधनों का इस्तेमाल ही करना पड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि बिजली-पानी के साथ सार्वजनिक परिवहन विस्तार विकास की पहली जरूरत है। इसके बिना विस्तार उपयोगी नहीं हो सकता।

फैक्ट फाइल
- १३.२ लाख है अभी नगर निगम सीमा में शहर की जनसंख्या
- १६ लाख से अधिक लोग रहते हैं कुल शहर के पेरिफेरी में (जेडीए क्षेत्र मिलाकर)
- २५ प्रतिशत औसत हर एक दशक में बढ़ती है जनसंख्या
- २०३१ तक का मास्टर प्लान बनाया गया है जेडीए की ओर से
- ३९५ राजस्व ग्राम सम्मिलित किए गए हैं मास्टर प्लान में
- ८९४३ हेक्टेयर में शहर की आवासीय योजनाएं हैं
- २५ हजार हेक्टेयर का कुल नगरीय क्षेत्र है
- ५.४ प्रति व्यक्ति एक मकान में रहते हैं २०११ की जनगणना के अनुसार
- २१६ कच्ची बस्तियां हैं शहर में सूचीबद्ध
- ४.४६ लाख हेक्टेयर के लिए मास्टर प्लान बनाया गया है


विस्तार के साथ योजनाबद्ध विकास जरूरी
शहर का विस्तार पिछले कुछ साल में लगातार हुआ है। नक्शा पास करवा कर उसको आवासीय योजना के रूप में उपयोग करना ही वैध तरीका है। इसमें सभी सुविधाएं दर्शायी जाती है। जो कि व्यक्ति बसना चाहता है वह इस बात का जरूर ध्यान रखे। जिसने नक्शा व प्लान अप्रूव नहीं करवाया है, वह तो पूरी तरह से अवैध है। अब तक नियमानुसार स्वीकृति लेने के बाद भी कोई सुविधाएं नहीं देता है तो रेरा में शिकायत की जा सकती है और उसके खिलाफ कार्रवाई होती है। पहले १२ प्रतिशत जमीन रोकने का प्रावधान था, लेकिन अब हटा दिया गया है।
- सुखराम चौधरी, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता जेडीए

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