scriptInjured wildlife of western Rajasthan will get treatment in natural en | पश्चिमी राजस्थान के घायल वन्यजीवों को प्राकृतिक माहौल में मिलेगा उपचार | Patrika News

पश्चिमी राजस्थान के घायल वन्यजीवों को प्राकृतिक माहौल में मिलेगा उपचार


हर साल दो हजार से अधिक वन्यजीव होते है घायल

जोधपुर

Published: March 07, 2022 04:06:28 pm

जोधपुर. माचिया जैविक उद्यान में प्रतिवर्ष संभाग के विभिन्न जिलों से आने वाले विभिन्न प्रजातियों के दो हजार से अधिक घायल वन्यजीवों को उपचार के दौरान प्राकृतवास उपलब्ध कराने के लिए रीवाइल्डिंग एनक्लोजर निर्माण की तैयारियां शुरू कर दी गई है। पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े वन्यजीव रेस्क्यु सेंटर में वन्यजीवों को रीवाइल्डिग करने की महती आवश्यकता के कारण राज्य सरकार की ओर से माचिया वन खण्ड में रीवाइल्डिग एन्क्लोजर निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। हर साल रेस्क्यू सेंटर में आने वाले घायल वन्यजीवों में पैंथर, काले हरिण, चिंकारे, भेडि़ए, हायना सहित विभिन्न प्रजातियों के पक्षी भी शामिल है।
पश्चिमी राजस्थान के घायल वन्यजीवों को प्राकृतिक माहौल में मिलेगा उपचार
पश्चिमी राजस्थान के घायल वन्यजीवों को प्राकृतिक माहौल में मिलेगा उपचार
दुर्लभ वन्यजीवों की संख्या पर सकारात्मक असर

रीवाइल्डिंग एनक्लोजर बनने से थार की कई दुर्लभ प्रजातियों की संख्या पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। वन्यजीव विशेषज्ञों का का मानना है कि तिलोर, गोडावण सहित लुप्त हो रही कई प्रजातियों की संख्या में भी इजाफा हो सकेगा।
जोधपुर वनमंडल में गत तीन वर्षों में वन्यजीव रेस्क्यू व मौत के आंकड़े

वर्ष --------------------रेस्क्यू दौरान मृत्यु ---------शिकार से मृत्यु ------- योग

2018-19 --------------1757-----------------------17 ---------------------1774

2019-20 --------------1239----------------------- 23 --------------------1262

2020-21--------------1358----------------------- 22----------------------1380
पहली बार फैंसिंग के लिए एन्करिंग पद्धति

एन्क्लोजर निर्माण के तहत आरयन एंगल फिक्स कर उस पर चैनलिंक जाली लगाया जाना प्रस्तावित है । माचिया वनखण्ड मे अधिकतर चट्टानी भू - भाग हैं , ये चट्टानें कठोर प्रकृति की होने के कारण फेंसिंग की नीव के लिए खुदाई करना संभव नहीं हो पाता , पूर्व में इसी वन खण्ड मे स्थित माचिया जैविक उद्यान में एन्क्लोजर निर्माण के लिए फैंसिंग के लिए एन्करिंग पद्धति काम में ली गयी थी तथा इसी कारण वर्तमान में प्रस्तावित रीवाइल्डिंग एन्क्लोजर की फैंसिंग के लिए एन्करिंग पद्धति काम में लिया जाना प्रस्तावित है । इसके लिए टेंडर जारी हो गए हैं । रीवाइल्डिंग एनक्लोजर बनने से घायल वन्यजीवों को विचरण में सुविधा मिलेगी और वन्यजीवों की प्रकृति के अनुरूप आवास उपलब्ध कराया जाएगा। यह करीब एक साल में तैयार हो जाएगा ।
विजय बोराणा, उप वन सरंक्षक , वन्यजीव जोधपुर

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